
विमान के ब्लैक बॉक्स की प्रतीकात्मक फोटो ( स्रोत Gemini)
Ajit Pawar plane Crash बुधवार सुबह महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की विमान दुर्घटना में मौत हो गई। आशंका जताई जा ही है कि, लैडिंग के समय उनका विमान रनवे से करीब पांच किलोमीटर पहले एक छोटी चट्टान से टकराकर आग का गोला बन गया। इस विमान में मुख्य यात्री डिप्टी सीएम के अलावा महिला पायलट और महिला अटेंडेंट समेत कुल पांच लोग सवार थे। हाद्सा इतना भयंकर था कि कोई नहीं बचा और सभी पांच लोगों की मौत हो गई।
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने बुधवार सुबह जिस विमान से उड़ान भरी थी वह दुनिया भर के टॉप चार्टेड विमानों की श्रेणी में आता है। यह विमान देखने छोटा है लेकिन अपनी पावर और स्पीड को लेकर दुनिया भर में मशहूर है। इस विमान का नाम लार्जेस्ट 45 है। यह 860 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से एक बार में चार हजार किलोमीटर तक सफर कर सकता है। इस विमान की उड़ान भरने की क्षमता इतनी अधिक है कि यह केवल 18 से 20 मिनट में ही यह जमीन से 41 हजार फीट तक की ऊंचाई पकड़ लेता है। ऐसे में इस विमान का दुर्घटना ग्रस्त होना एक्सपर्ट को समझ नहीं आ रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्राथमिक पड़ताल में पता चला है कि सुबह के समय मौसम भी खराब था। रनवे से करीब चार से पांच किलोमीटर यह हाद्सा हुआ है। विमान का पिछला हिस्सा बचा है ऐसे में आशंका यह भी जताई जा रही है कि विमान का अगला हिस्सा जमीन से लगा हो लेकिन ये सभी कयास है। यह दुर्घटना कैसे हुई और उस समय प्लेन में क्या चल रहा था इन सभी सवालों का जवाब जानने के लिए अब विमान के ब्लैक बॉक्स की तलाश की जा रही है। उम्मीद है कि ब्लैक बॉक्स ही अब इस दुर्घटना की परतों को खोलेगा। यह अलग बात है कि विमान के मलबे से अभी तक ब्लैक मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
ब्लैक बॉक्स एक तरह का रिकॉर्डर होता है। इसमें प्लेन से जुड़ी लगभग सभी जानकारियां ऑडियो और वॉडियों के रूप में रिकार्ड होती रहती हैं। यह इतना मजबूत होता है कि किसी तरह के दबाव पड़ने, पानी में डूबने या फिर आग में गिरने से भी यह खराब नहीं होता है। इसे फ्लाइट रिकॉर्डर भी कहा जाता है। ब्लैक बॉक्स पहली बार 1930 में बनाया गया था। इसे फ्रांस के एक इंजीनियर फ्रांस्वा हुसैनों ने बनाया था। ब्लैक बॉक्स अपने नाम से बिल्कुल विपरीत होता है। इसका नाम भले ही ब्लैक बॉक्स हो लेकिन इसका रंग नारंगी होता है। नारंगी रंग इसलिए होता है ताकि दुर्घटना होने पर यह काले मलबे में आसानी से दिखाई पड़ जाए।
ब्लैक बॉक्स दो हिस्सों में बना होता है। इसके पहले हिस्से को FDR यानी फ्लाइट डोटा रिकॉर्डर और दूसरे हिस्से को CVR यानी कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर कहा जाता है। FDR में फ्लाइट की तकनीकी संबंधी सारी जानकारियां रिकॉर्ड रहती हैं। इसमें फ्लाइट की जमीन से उंचाई, रफ्तार और इंजन की तकनीकी जानकारियां रिकार्ड होती रहती है। दूसरा CVR में पायलट और को पायलट के बीच हो रही बातचीत को रिकार्ड किया जाता है। यह प्लेन के पिछले हिस्से में होता है लेकिन आगे कॉकपिट में क्या चल रहा है इस पर 24 घंटे नजर रखता है। इसके अलावा प्लेन में डीवीआर भी होता है जो विमान में चल रही हर गतिविधि को वीडियो के रूप में रिकॉर्ड करता है। इस दुर्घटना से ठीक पहले क्या हुआ था इसका पता लगाने के लिए अब तकनीकी दल ब्लैक बॉक्स की तलाश कर रहा है। ब्लैक बॉक्स की रिकॉर्डिंग को सुनने के बाद ही पता चल पाएगा कि दुर्घटना कैसे हुई।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्राथमिक जांच पड़ताल में यह बता चला है कि विमान के क्रैश होने से पहले विमान की लेडी पायलट शांभवी पाठक विमान लैंडिंग की दो बार असफल कोशिश कर चुकी थी। उन्हे रनवे नहीं दिखाई दे रहा था। इस पर पायलट ने एक और चक्कर लगाया था और फिर ATC यानी एयर ट्रैफिक कंट्रोल से बात हुई थी। इस बार पूछने पर पायलट ने बताया था कि रनवे दिखाई दे रहा है लेकिन इसके कुछ देर बाद ही यह दुर्घटना हो गई और विमान क्षतिग्रस्त हो गया। अब ब्लैक बॉक्स से मिलने वाला डाटा के आधार पर अनुमान लगाया जाएगा कि आखिर यह दुर्घटना किस तरीके से हुई थी।
Updated on:
28 Jan 2026 03:32 pm
Published on:
28 Jan 2026 03:31 pm
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