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लहसुन के दाम धड़ाम, 62 हजार रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाली उपज 8-9 हजार पर अटकी

mp news: लागत भी नहीं निकल रही, व्यापारियों पर मनमानी के आरोप, बेहतर दाम के लिए नीमच-निम्बाहेड़ा का रुख कर रहे अन्नदाता।

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mp news: मध्यप्रदेश के नीमच जिले में कभी किसानों को करोड़पति बनाने वाला लहसुन अब उन्हें रुला रहा है। जावद कृषि उपज मंडी में लहसुन के दामों में आई भारी गिरावट ने किसानों की कमर तोड़ दी है। पिछले साल जिस लहसुन 62,000 रुपये प्रति क्विंटल का रिकॉर्ड बनाया था, वह अब 8,500 से 9,000 रुपए पर आ गिरा है। हालत यह है कि किसानों के लिए फसल की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। कम भाव मिलने से निराश किसान अब व्यापारियों पर दाम गिराने का आरोप लगा रहे हैं, जिससे मंडी में आए दिन विवाद की स्थिति बन रही है।

3 लाख खर्च, लागत भी वसूल नहीं

जावद मंडी पहुंचे मोरका के किसान कमल नागदा ने बताया कि 2 बीघा में लहसुन की फसल पर 3 लाख रुपए खर्च हुए, लेकिन मौजूदा भाव में यह लागत भी नहीं निकल रही। पिछले साल इसी खेत से 9.30 लाख का मुनाफा हुआ था। वहीं, किसान बावल के कन्हैया अहीर का आरोप है कि जावद में व्यापारी सिंडिकेट बनाकर कम भाव दे रहे हैं। जो लहसुन जावद में 6,500 रुपए में मांगी गई, वही राजस्थान के निम्बाहेड़ा में 7,500 रुपए में बिकी। नीमच में भी जावद से 1,500 रुपए प्रति क्विंटल तक ज्यादा भाव मिल रहा है।

व्यापारी बोले- आगे से ही बाजार मंदा है

जावद में उपज का सही मूल्य न मिलने के कारण अब यहां के किसान नीमच और राजस्थान की निम्बाहेड़ा मंडी का रुख कर रहे हैं। शनिवार को जावद मंडी में 3,190 बोरी लहसुन पहुंची, जहां न्यूनतम भाव 1,500 और अधिकतम 10,500 रहा। मंडी व्यापारी राजेश गोयल का कहना है कि व्यापारी सिर्फ मध्यस्थ हैं। आगे के बड़े बाजारों में ही भाव कम हैं, उसी आधार पर यहां नीलामी होती है।