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अजित पवार की मौत के बाद अब कौन होगा वारिस? ये दो नाम रेस में आगे

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में दुखद निधन के बाद अब सबकी नजरें इस सवाल पर हैं कि उनकी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का नेतृत्व कौन करेगा।

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अजित पवार की विरासत का वारिस कौन

Who Will Lead NCP Ajit Pawar Group: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख अजित पवार की बारामती प्लेन क्रैश में मौत ने पार्टी में नेतृत्व का बड़ा संकट पैदा कर दिया है। 2023 में शरद पवार से अलग होकर बीजेपी-शिवसेना गठबंधन में शामिल होने वाली एनसीपी (अजित गुट) अब वारिस की तलाश में है। अजित पवार की व्यक्तिगत सत्ता और विधायकों पर पकड़ के कारण पार्टी संगठन कमजोर था, जिससे उत्तराधिकार की दौड़ में परिवार, पुराने साथी और क्षेत्रीय नेता शामिल हो गए हैं। दो नाम सबसे आगे हैं-प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे-जो पार्टी को स्थिरता दे सकते हैं, लेकिन जनाधार की कमी चुनौती बनी हुई है।

प्रफुल्ल पटेल: रणनीतिकार और दिल्ली का चेहरा

एनसीपी के संस्थापक सदस्य प्रफुल्ल पटेल को अजित पवार का सबसे भरोसेमंद साथी माना जाता है। केंद्र में नागरिक उड्डयन मंत्री रह चुके पटेल शरद पवार के समय दिल्ली में वार्ताकार थे। 2023 के विभाजन में वे अजित गुट में शामिल हुए और पार्टी को वैधता प्रदान की। उनकी ताकत गठबंधन प्रबंधन, राष्ट्रीय संपर्क और संकट निपटारा है, लेकिन महाराष्ट्र में जननेता के रूप में कमी है। वे अंतरिम या प्रबंधकीय भूमिका के लिए उपयुक्त हैं, लेकिन लंबे समय के लिए जनाधार की जरूरत होगी।

सुनील तटकरे: संगठन का मजबूत स्तंभ

रायगढ़ से उभरे सुनील तटकरे कोकण में एनसीपी का मजबूत आधार हैं। सहकारी क्षेत्र और स्थानीय निकायों से मजबूत हुए तटकरे जल संसाधन और ग्रामीण विकास जैसे विभाग संभाल चुके हैं। 2023 के बाद वे अजित गुट के महाराष्ट्र यूनिट अध्यक्ष बने और कैडर-जिला मशीनरी पर पकड़ रखते हैं। उनकी राज्यव्यापी प्रशासनिक अनुभव ताकत है, लेकिन प्रभाव मुख्य रूप से कोकण तक सीमित है। वे संगठन को एकजुट रखने में सक्षम हैं, लेकिन अजित पवार जैसी राज्यव्यापी सत्ता नहीं है।

अन्य दावेदार: परिवार और क्षेत्रीय नेता

परिवार से सुनेत्रा पवार (पत्नी) और पार्थ पवार (बेटा) दौड़ में हैं। सुनेत्रा 2024 में बारामती से लोकसभा हारीं, लेकिन राज्यसभा सांसद बनीं। वे भावनात्मक अपील और बारामती गढ़ पर पकड़ रखती हैं, लेकिन अनुभव की कमी है। पार्थ 2019 में मावल से हारे और राजनीति से दूर हैं। धनंजय मुंडे (ओबीसी नेता) लोकप्रिय हैं, लेकिन बीड में विवादों से घिरे। छगन भुजबल (वरिष्ठ ओबीसी नेता) अनुभवी हैं, लेकिन उम्र और पुराने मामले बाधा हैं। सामूहिक नेतृत्व का विकल्प भी चर्चा में है।

महाराष्ट्र राजनीति पर असर

अजित पवार की मौत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए झटका है, जो महायुति गठबंधन में अस्थिरता ला सकती है। एनसीपी का मराठा वोट बैंक प्रभावित हो सकता है। पार्टी को एकजुट रखना चुनौतीपूर्ण होगा, वरना विघटन का खतरा है।