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क्या होती है ऑरेंज इकोनॉमी? आखिर भारत के लिए क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

Orange Economy: भारत की युवा आबादी, तेजी से बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम और वैश्विक प्लेटफॉर्म्स की पहुंच ने रचनात्मक क्षेत्रों को तेजी से बढ़ने का अवसर दिया है। इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के अनुसार…

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भारत

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Saurabh Mall

Feb 03, 2026

Orange Economy

केंद्रीय बजट 2026-27 में ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ का उल्लेख (इमेज सोर्स: AI जनरेटेड)

Budget 2026 Orange Economy: केंद्रीय बजट 2026-27 में ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ का उल्लेख इस बात का संकेत है कि भारत अब विचारों, रचनात्मकता और बौद्धिक संपदा को आर्थिक विकास के मजबूत स्तंभ के रूप में देख रहा है। यह बदलाव रोजगार, स्किलिंग और वैश्विक प्रतिस्पर्धा- तीनों स्तरों पर महत्वपूर्ण है।

ऑरेंज इकोनॉमी क्या होती है?

ऑरेंज इकोनॉमी को रचनात्मक अर्थव्यवस्था कहा जाता है। इसमें वे सभी गतिविधियां शामिल हैं, जहां मूल्य का स्रोत कोई भौतिक वस्तु नहीं, बल्कि विचार, कल्पनाशीलता और बौद्धिक संपदा होती है। फिल्म, संगीत, एनिमेशन, गेमिंग, डिजाइन, फैशन, डिजिटल कंटेंट, विज्ञापन और पब्लिशिंग जैसे क्षेत्र इसके दायरे में आते हैं।

ऑरेंज इकोनॉमी की अभी जरूरत क्यों?

भारत की युवा आबादी, तेजी से बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम और वैश्विक प्लेटफॉर्म्स की पहुंच ने रचनात्मक क्षेत्रों को तेजी से बढ़ने का अवसर दिया है। इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के अनुसार गेमिंग, एनिमेशन, वीएफएक्स और लाइव एंटरटेनमेंट से न केवल आय बढ़ रही है, बल्कि पर्यटन और शहरी सेवाओं को भी मजबूती मिल रही है। इसी संदर्भ में बजट 2026-27 ने ऑरेंज इकोनॉमी को सेवाओं के नेतृत्व वाली विकास रणनीति के केंद्र में रखा।

बजट में ऑरेंज इकोनॉमी के लिए क्या किया गया?

वित्त मंत्री ने एवीजीसी सेक्टर को भविष्य का बड़ा रोजगार स्रोत बताया, जिसमें 2030 तक करीब 20 लाख पेशेवरों की जरूरत होगी। इसके लिए 15,000 माध्यमिक स्कूलों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया। साथ ही डिजाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पूर्वी भारत में नए राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान की घोषणा भी की गई।

एवीजीसी ऑरेंज इकोनॉमी के केंद्र में क्यों है?

एवीजीसी यानी एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स वह सेक्टर है, जहां रचनात्मकता और तकनीक का सीधा मेल होता है। सिनेमा, ओटीटी, विज्ञापन, एजु-टेक और इमर्सिव टूरिज्म- सभी इसकी मांग पैदा करते हैं। स्कूल और कॉलेज स्तर पर एवीजीसी लैब्स से टैलेंट की पहचान जल्दी होगी, स्किल गैप घटेगा और क्रिएटिव करियर मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रहेंगे। इससे रचनात्मक काम अनौपचारिकता से निकलकर संगठित रोजगार में बदलेगा।

इकोनॉमी के और कौन-से रंग होते हैं?

ऑरेंज के अलावा ग्रीन इकोनॉमी (पर्यावरण और सतत विकास), ब्लू इकोनॉमी (समुद्री संसाधन), वाइट इकोनॉमी (स्वास्थ्य और सामाजिक देखभाल) और सिल्वर इकोनॉमी (वरिष्ठ नागरिकों से जुड़ी अर्थव्यवस्था) भी प्रचलित हैं।

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