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क्या होता है ‘राजकीय शोक’? अजित पवार के निधन पर महाराष्ट्र में 3 दिन तक लागू रहेंगे ये सख्त नियम

यह शोक अजित पवार के योगदान को सम्मान देता है, जो महाराष्ट्र की राजनीति में 'दादा' के नाम से जाने जाते थे। अंतिम संस्कार 29 जनवरी को बारामती में पूरे राजकीय सम्मान के साथ होगा।

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Ajit Pawar death

अजित पवार का निधन (Photo: IANS)

Ajit Pawar Plane Crash: राजकीय शोक (State Mourning) राज्य स्तर पर घोषित एक औपचारिक शोक अवधि है, जो राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री या किसी सम्मानित शख्सियत के निधन पर लागू की जाती है। यह प्रोटोकॉल फ्लैग कोड ऑफ इंडिया और राज्य सरकार के निर्देशों पर आधारित होता है। महाराष्ट्र में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बारामती प्लेन क्रैश में निधन (28 जनवरी 2026) के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 3 दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। फडणवीस ने कहा, "यह राज्य के लिए अपूरणीय क्षति है। अजित पवार एक मेहनती और समर्पित नेता थे।" शोक 28 से 30 जनवरी तक चलेगा, जिसमें राज्यव्यापी शोक का माहौल रहेगा।

मुख्य नियम और सख्त प्रोटोकॉल

राजकीय शोक के दौरान निम्नलिखित सख्त नियम लागू रहेंगे:

राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा: सभी सरकारी इमारतों, विधानसभा, सचिवालय, मंत्रालय और जहां नियमित रूप से तिरंगा फहराया जाता है, वहां ध्वज आधा झुका रहेगा। सुबह इसे शीर्ष पर फहराकर फिर आधा किया जाएगा।

सरकारी कार्यालय बंद: पूरे राज्य में सभी राज्य सरकार के कार्यालय बंद रहेंगे। 28 जनवरी को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।

स्कूल-कॉलेज और परीक्षाएं प्रभावित: सरकारी और निजी स्कूल-कॉलेज 30 जनवरी तक बंद रहेंगे। मुंबई यूनिवर्सिटी जैसी संस्थाओं ने 28 जनवरी की परीक्षाएं स्थगित की हैं।

उत्सव और मनोरंजन पर रोक: कोई सरकारी उत्सव, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सार्वजनिक समारोह या आधिकारिक मनोरंजन नहीं होगा।

अन्य प्रतिबंध: कोई नया सरकारी आयोजन नहीं होगा, ताकि शोक का सम्मान बना रहे। (नोट: राष्ट्रीय त्योहार जैसे गणतंत्र दिवस पर शोक नहीं मनाया जाता।)

गुरुवार को होगा अंतिम संस्कार

महाराष्ट्र सरकार ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन पर 3 दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। उनका अंतिम संस्कार गुरुवार (29 जनवरी 2026) को सुबह 11 बजे बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में पूरे राजकीय सम्मान के साथ होगा।

प्रोटोकॉल के मुख्य नियम:

  • ताबूत पर राष्ट्रीय ध्वज लपेटा जाएगा, जो उच्च पदाधिकारियों के लिए मानक है।
  • 21 तोपों की सलामी दी जाएगी, जो राज्य स्तर पर राजकीय सम्मान का प्रतीक है।
  • सशस्त्र बलों की टुकड़ी अंतिम यात्रा में शामिल होगी, जिसमें पुलिस और होमगार्ड की टुकड़ियां होंगी।
  • अंतिम यात्रा सुबह 9 बजे शुरू होगी। पार्थिव शरीर शाम 5 बजे से अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है।
  • अंतिम संस्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत कई दिग्गज नेता शामिल होंगे।
  • शोक अवधि में राज्य में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा, सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे, और कोई आधिकारिक समारोह नहीं होगा।

यह प्रोटोकॉल फ्लैग कोड ऑफ इंडिया और राज्य प्रोटोकॉल के अनुसार है, जो उपमुख्यमंत्री जैसे उच्च पद पर राजकीय सम्मान सुनिश्चित करता है। अंतिम संस्कार बारामती में होने से स्थानीय समर्थक भी बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

यह शोक अजित पवार के योगदान को सम्मान देता है, जो महाराष्ट्र की राजनीति में 'दादा' के नाम से जाने जाते थे। अंतिम संस्कार 29 जनवरी को बारामती में पूरे राजकीय सम्मान के साथ होगा, जिसमें पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह शामिल हो सकते हैं। राज्य में शोक की लहर है, जहां नेता और कार्यकर्ता उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। यह प्रोटोकॉल राज्य की एकजुटता और सम्मान को दर्शाता है।