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भारत, May 31, 2026

ममता बनर्जी के बुलावे पर भी क्यों नहीं पहुंचे TMC विधायक, 80 में से 60 गायब

Mamata Banerjee Meeting: ममता बनर्जी ने रविवार शाम 4 बजे अपने कालीघाट स्थित आवास पर TMC विधायकों की बैठक बुलाई। लेकिन 80 में से सिर्फ 20 विधायक ही पहुंचे।

mamta banrjee

ममता बनर्जी की बैठक रही फीकी। फोटो में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी (AI जनरेटेड इमेज)

Mamata Banerjee TMC MLA Meeting: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों हलचल मची हुई है। बंगाल चुनाव हारने के बाद तृणमूल कांग्रेस के सामने हर दिन नई-नई चुनौतियां खड़ी होती दिख रही हैं।

टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर हुए हमलों के बीच TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी ने हालात पर चर्चा के लिए अपने कालीघाट स्थित आवास पर विधायकों की अहम बैठक बुलाई। लेकिन बैठक शुरू होते ही ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए। 80 विधायकों वाली पार्टी में सिर्फ 20 विधायक ही बैठक में पहुंचे, जबकि 60 विधायक नदारद रहे। इतने बड़े पैमाने पर विधायकों की गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर असंतोष, गुटबाजी और संभावित बगावत की चर्चाओं को हवा दे दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ममता के बुलावे के बावजूद इतने विधायक बैठक से दूर क्यों रहे और क्या TMC के अंदर सब कुछ ठीक चल रहा है?

ममता के बुलावे के बावजूद क्यों नहीं पहुंचे विधायक?

बैठक में कुणाल घोष, शोभनदेव चट्टोपाध्याय, मदन मित्रा, नयना बंद्योपाध्याय, अशोक कुमार देब और बिमान बनर्जी समेत कुछ वरिष्ठ नेता पहुंचे, लेकिन कुल संख्या सिर्फ 20 विधायकों तक ही सीमित रही।

विधायकों की कम मौजूदगी को लेकर उठ रही अटकलों के बीच टीएमसी नेता और विधायक कुणाल घोष ने पार्टी में किसी तरह के मतभेद से इनकार किया। ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास के बाहर उन्होंने कहा कि ज्यादातर विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में पहले से तय कार्यक्रमों में व्यस्त थे, इसलिए बैठक में नहीं आ सके।

हालांकि सूत्रों के मुताबिक कई विधायक संपर्क से बाहर बताए गए और कुछ ने फोन कॉल का जवाब भी नहीं दिया। एक मौजूदा विधायक ने बताया कि उन्हें शनिवार को अभिषेक बनर्जी के स्टाफ की ओर से बैठक में शामिल होने के लिए फोन किया गया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में विधायकों का अनुपस्थित रह गए हैं।

टीएमसी में आंतरिक कलह की अटकलें तेज

तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता नेतृत्व से नाराज नजर आ रहे हैं। हाल के दिनों में कुछ विधायकों और नेताओं की दूसरे राजनीतिक दलों के नेताओं से मुलाकात की खबरों ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है और पार्टी में संभावित टूट की अटकलों को हवा दे दी है।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली टीएमसी सांसद काकोली घोष ने बारासात जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के साथ उन्होंने अपनी ही पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर नेतृत्व को असहज स्थिति में डाल दिया।

उधर, चुनावी हार के बाद रीजू दत्ता ने खुलकर विरोध का रास्ता अपनाया। पार्टी नेतृत्व के खिलाफ उनकी नाराजगी इतनी बढ़ी कि टीएमसी ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। इसके बाद असंतोष का सिलसिला थमता नहीं दिखा और कई अन्य नेताओं ने भी पार्टी से दूरी बनानी शुरू कर दी।

लगातार इस्तीफों, विरोध और बगावती सुरों के बीच टीएमसी अब चुनावी हार के साथ-साथ संगठनात्मक संकट से भी जूझती नजर आ रही है। ऐसे में सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि ममता बनर्जी पार्टी में बढ़ती नाराजगी को कैसे संभालती हैं?

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