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कोलकाता, Jun 02, 2026

TMC से निकाले गए दो विधायक की अब क्या जाएगी विधानसभा सदस्यता? जानें क्या कहता है नियम

Bengal TMC Politics: तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी को निष्कासित कर दिया है।

Trinamool Congress Expels MLAs

क्या TMC से निकाले गए दोनों विधायकों की जाएगी विधानसभा सदस्यता (Photo-X)

TMC MLAs Expelled: तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में दो विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी को निष्कासित कर दिया है। TMC ने इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेज दिया है। बताया जा रहा है कि दोनों विधायकों को ईमेल और व्हाट्सऐप के जरिए निष्कासन की सूचना दे दी गई है।

क्या विधानसभा सदस्यता हो जाएगी रद्द?

हालांकि अब सवाल यह उठ रहा है कि पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद क्या उनकी विधायक सदस्यता भी रद्द हो जाएगी? बता दें कि दल-बदल विरोधी कानून के अनुसार किसी विधायक की सदस्यता कुछ परिस्थितियों में समाप्त हो सकती है-

1- यदि कोई विधायक स्वेच्छा से अपनी पार्टी छोड़ दे।

2- यदि वह जिस पार्टी के टिकट पर चुना गया है, उसे छोड़कर किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो जाए।

3- यदि वह विधानसभा में किसी महत्वपूर्ण विधेयक पर पार्टी के व्हिप के खिलाफ मतदान करे या मतदान से अनुपस्थित रहे।

वहीं टीएमसी ने दोनों विधायकों को पार्टी से निष्कासित करते हुए आरोप लगाया है कि ऋतब्रत और संदीपन कई महत्वपूर्ण पार्टी बैठकों में शामिल नहीं हुए और पार्टी-विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहे। लेकिन नियमों के अनुसार केवल इस आधार पर उनकी विधायक सदस्यता समाप्त नहीं की जा सकती।

क्योंकि दोनों विधायकों ने स्वयं तृणमूल कांग्रेस की सदस्यता नहीं छोड़ी है। इसके अलावा वे किसी अन्य दल, जैसे भाजपा, में शामिल नहीं हुए हैं। उन्होंने विधानसभा में पार्टी के किसी व्हिप का उल्लंघन भी नहीं किया है। वहीं अभी तक ऐसी कोई स्थिति भी नहीं बनी है जिसमें उन्होंने व्हिप के खिलाफ मतदान किया हो।

TMC क्या कर सकती है? 

दोनों विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द करवाने के लिए टीएमसी के पास अभी भी एक विकल्प बचा हुआ है। TMC विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत कर सकती है और दोनों विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग कर सकती है। पार्टी यह भी अनुरोध कर सकती है कि उन्हें तृणमूल विधायक के रूप में मान्यता न दी जाए।

हालांकि अंतिम फैसला विधानसभा अध्यक्ष के हाथ में होगा। यदि अध्यक्ष उन्हें तृणमूल विधायक के रूप में मान्यता नहीं देते हैं, तो वे विधानसभा में तृणमूल विधायक दल के साथ नहीं बैठ सकेंगे और न ही तृणमूल को मिले समय के हिस्से के रूप में सदन में बोलने का अधिकार प्राप्त कर सकेंगे।

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