भारत, May 21, 2026
TKS Elangovan Statement: तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय के मंत्रिमंडल शपथ ग्रहण समारोह के दौरान डीएमके (DMK) प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन (T. K. S. Elangovan) ने राज्यपाल पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने राजभवन पर निशाना साधते हुए कहा कि 'सरकार बीजेपी समर्थित राज्यपाल के दबाव में काम कर रही है, जो तमिल संस्कृति का अनादर है।' एमडीएमके नेता वाइको ने भी इसका विरोध किया है। इस विवाद की आंच पड़ोसी राज्य केरल तक भी पहुंच गई है, जहां शपथ ग्रहण में पूरा 'वंदे मातरम' गाए जाने पर विपक्ष और सीपीआई (एम) ने आपत्ति जताई है। टीकेएस एलंगोवन ने पूरे मामले पर बेहद तीखा रुख अपनाते हुए कहा, 'तमिलनाडु की सरकार इस वक्त भारी दबाव में काम कर रही है।'
चेन्नई में डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने राज्य सरकार की लाचारी और राजभवन के हस्तक्षेप पर एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि 'उनका तमिलनाडु सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। वे राज्यपाल के दबाव में हैं, जो कि BJP के व्यक्ति हैं। वे तमिल भाषा और तमिलनाडु की रीतियों का अनादर करेंगे।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री विजय के मंत्रिमंडल में 23 नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया था। इस सरकारी कार्यक्रम के दौरान स्थापित परंपराओं को दरकिनार करते हुए राज्य के आधिकारिक गीत पर 'वंदे मातरम' को प्राथमिकता दे दी गई। इसके बाद से ही क्षेत्रीय अस्मिता और भाषा को लेकर विवाद की आग सुलग उठी है।
MDMK के महासचिव वाइको ने भी इस घटनाक्रम पर बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' को शामिल करने का विरोध किया। वाइको ने कहा कि 'राज्यपाल द्वारा आयोजित कार्यक्रमों के दौरान, 'वंदे मातरम' को बार-बार लाया जा रहा है और हर जगह थोपा जा रहा है। हम पहले ही कह चुके हैं कि तमिलनाडु सरकार द्वारा आयोजित किसी भी कार्यक्रम में 'वंदे मातरम' को कोई स्थान नहीं दिया जाना चाहिए।' वाइको ने कहा कि राज्य सरकार के कार्यक्रमों में सबसे पहले 'तमिल थाई वाझथु' गाया जाना चाहिए और उसके बाद कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगान 'जन गण मन' होना चाहिए।
यह विवाद सिर्फ तमिलनाडु तक ही सीमित नहीं रहा। पड़ोसी राज्य केरल में भी यूडीएफ (UDF) कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान 'वंदे मातरम' के पूरे संस्करण को गाए जाने पर हंगामा मचा हुआ है। तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों से बात करते हुए केरल के मुख्यमंत्री ने इस पर अपनी सफाई पेश की। वहीं सतीशन ने इस पर बड़ा बयान दिया, "हमें नहीं पता था कि 'वंदे मातरम' पूरी तरह से गाया जाएगा। निर्देश लोक भवन से आए थे। हमें इस बात का एहसास तभी हुआ, जब हम वहाँ खड़े थे और इसे पूरी तरह से गाया जाने लगा। इसे बीच में रोकना संभव नहीं था। आमतौर पर, कार्यक्रम के अंत में केवल राष्ट्रगान ही गाया जाता है। अब इसे भी इसमें शामिल कर लिया गया है। हमें इसकी कोई पूर्व जानकारी नहीं थी।"
इसी बीच, 19 मई को CPI-M ने एक कड़ा बयान जारी कर केरल कैबिनेट के शपथ ग्रहण में पूरे 'वंदे मातरम' को गाए जाने को एक "गलत और अनुचित कदम" बताया। सीपीआई(एम) ने साल 1937 के एक ऐतिहासिक प्रस्ताव की याद दिलाते हुए कहा कि 'यह कांग्रेस कार्यसमिति ही थी जिसने यह रुख अपनाया था कि 'वंदे मातरम' के सभी अंशों का गायन एक बहुलवादी समाज के लिए उपयुक्त नहीं है। 30 अक्टूबर, 1937 को कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा पारित आधिकारिक प्रस्ताव के तहत इन अंशों को हटा दिया गया था। जिन अंशों को इस प्रकार हटा दिया गया था, उन्हें शपथ ग्रहण समारोह के दौरान भी गाया गया।'
Published on: 21 May 2026 04:21 pm

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