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‘किसानों की मानसिकता बदलने की जरूरत’…धान-गेहूं की खेती पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट में पीली मटर के ड्यूटी फ्री आयात को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने धान-गेहूं की फसल की खेती पर अहम टिप्पणी की है।

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भारत

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Vinay Shakya

Mar 13, 2026

फोटो पत्रिका नेटवर्क

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को 'पीली मटर के ड्यूटी फ्री आयात' को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। इस याचिका में कहा गया था कि 2026 तक आयात शुल्क हटाने के फैसले से घरेलू दालों की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे चली जाएंगी। इससे किसानों को नुकसान होगा। सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने अहम टिप्पणी की है। इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार को दालों को बढ़ावा देने और फसल विविधीकरण (crop diversification) के लिए प्रोत्साहित करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छोटे किसानों को दालें उगाने के लिए प्रोत्साहित MSP दी जाए और उनकी उपज की समय पर खरीद सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही पीली मटर की कीमत तय करते समय इस बात का ध्यान रखा जाए कि इससे देश में उगाई जाने वाली दालों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़े।

किसानों की मानसिकता बदलने की जरूरत

सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा- हमें ये देखना होगा कि क्या हमें उतना ही धान और गेहूं चाहिए, जितना हम पैदा कर रहे हैं। अब गेहूं ही एकमात्र विकल्प नहीं है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने फसलों में विविधता पर केंद्र सरकार से नई नीतिगत पॉलिसी मांगी है। कोर्ट ने कहा- देश में कृषि नीति की समीक्षा करके गेहूं और धान के बजाय दालों जैसी वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए नया नीतिगत ढांचा तैयार किया जाए।

कोर्ट ने आगे कहा कि अपनी मानसिकता के कारण किसान धान और गेहूं को सबसे सुरक्षित फसल मानते हैं। किसानों की इस मानसिकता को बदलने की जरूरत है। सामान्य धान की खेती में उत्पादन संभवतः खपत से अधिक हो जाता है और यदि उस क्षेत्र को धान से हटाकर दालों की ओर मोड़ा जाए तो एक संतुलन बन सकता है।

दाल उगाने वाले किसानों को नहीं मिल रहे पर्याप्त दाम

कोर्ट में किसानों का पक्ष रख रहे अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि सरकार द्वारा MSP तय करने के बाद भी दाल उगाने वाले किसानों को तय मूल्य नहीं मिल रहे हैं। भूषण ने सबूत पेश करते हुए कहा कि किसानों को सरकार द्वारा निर्धारित MSP से 20-25% कम दाम मिल रहे हैं। MSP एक अन्य याचिका का विषय है, जो जल्द ही अदालत के सामने पेश की जाएगी।

भूषण ने कहा- हमने दिखाया है कि जो MSP तय किया जा रहा है, वह किसानों की वास्तविक उत्पादन लागत तक को पूरा नहीं करता है। अधिवक्ता प्रशांत भूषण की दलील पर CJI ने सुझाव दिया कि फसल बेचने के लिए एक गारंटीड प्लेटफॉर्म होना चाहिए। किसान को कुछ सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए, तभी वे खेती के तहत अपना क्षेत्र बढ़ा सकते हैं।

नीतिगत ढांचा तैयार करे सरकार

अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कोर्ट में दलील दी कि दालों के लिए ऐसी प्रोत्साहित MSP होनी चाहिए, जो मध्यम या लघु स्तर के किसानों की लागत निकालने के लिए पर्याप्त हो। इसके साथ ही उत्पाद की समय पर बिक्री की गारंटी भी मिले। आयातित पीली मटर की कीमत इस तरह तय की जानी चाहिए कि उससे घरेलू दालों पर बुरा असर न पड़े।
प्रशांत भूषण की दलील पर CJI सूर्यकांत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से कहा कि वे सभी हितधारकों की बैठक बुलाकर मौजूदा नीति की समीक्षा करें और एक बेहतर नीति ढांचा तैयार करें। इसको लेकर हुए विचार-विमर्श का पूरा विवरण कोर्ट के समक्ष रिकॉर्ड पर रखा जाए। कोर्ट ने आगे कहा कि केंद्र सरकार को नीतिगत ढांचे पर फिर से विचार करने के लिए विभिन्न हितधारकों के साथ बैठक करनी चाहिए। इसमें ऐसे बेहतर विकल्पों की तलाश की जानी चाहिए, जो किसानों को पारंपरिक फसलों से हटकर दालों के विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित करें।