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कोलकाता, May 29, 2026

सीनियर TMC नेता ने बंगाल में हार की एक और वजह बताई, बोले- ’26 हजार शिक्षकों की नौकरियां चली गईं’

tmc election loss reasons: लोकसभा चुनाव के बाद आरजी कर कांड के बाद TMC को सिर्फ 9 सीटें भी नहीं मिलतीं। सीनियर TMC नेता बिस्वजीत देब ने यह बयान दिया है।

West Bengal CM Mamata Banerjee reacts after polls, alleges misuse of central forces and dismisses exit polls.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। (Photo Credit - IANS)

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद अब पार्टी की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ रही है। टीएमसी के वरिष्ठ नेता और मिजोरम के एडवोकेट जनरल बिस्वजीत देब ने कहा कि अगर आरजी कर कांड के बाद लोकसभा चुनाव हुए होते तो तृणमूल को 9 सीटें भी नहीं मिलतीं।

उनकी इस टिप्पणी ने पार्टी में हलचल मचा दी है। देब ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई डॉक्टर के साथ दुष्कर्म-मर्डर की घटना को पार्टी की हार का सबसे बड़ा कारण बताया।

उन्होंने कहा- ममता बनर्जी इस मामले को संभाल नहीं पाईं। आरोपी को सजा दिलाने की बजाय स्थिति बिगड़ती गई। पूरे देश में आंदोलन हुआ। अगर लोकसभा चुनाव इस घटना के बाद होते तो पार्टी 29 की जगह 9 सीटें भी पार नहीं कर पाती।

भ्रष्टाचार ने जनता को तंग किया

बिस्वजीत देब ने कहा कि पिछले पांच साल में हर विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर था। मंत्री, सांसद और विधायक तक गिरफ्तार हुए, फिर भी कई को दोबारा टिकट दे दिया गया। लोग इससे नाराज थे। 26 हजार शिक्षकों की नौकरियां चली गईं, सरकार कुछ नहीं कर पाई। उन्होंने कहा कि जनता ने सोचा कि अगर तृणमूल फिर सत्ता में आई तो हालात और बिगड़ेंगे।

आई-पैक और कम्युनिकेशन गैप

नेता ने आई-पैक पर भी तीखा हमला बोला। उनका आरोप है कि यह कंपनी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच बातचीत का माध्यम बन गई थी। आई-पैक ने टिकट के लिए पैसे मांगे। ममता और अभिषेक बनर्जी को इसकी जानकारी थी, लेकिन कुछ नहीं किया गया।

साथ ही उन्होंने अभिषेक बनर्जी के बयानों और घमंड को भी हार का कारण बताया। उन्होंने कहा- कार्यकर्ताओं से कोई बातचीत नहीं रही। पार्टी को कॉर्पोरेट की तरह चलाने की कोशिश की गई, जबकि राजनीति जमीनी स्तर पर होती है।

ध्रुवीकरण का खेल उलटा पड़ा

देब ने ममता बनर्जी द्वारा एक समुदाय को लक्ष्य करने की रणनीति को खतरनाक बताया। उन्होंने कहा- सनातनी हिंदू एकजुट हो गए। उन्हें डर था कि 2026 में अगर तृणमूल आई तो बंगाल छोड़ना पड़ सकता है।

उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ नेता जमीनी हकीकत समझ रहे थे, लेकिन ऊपरी नेतृत्व अति आत्मविश्वास और घमंड में था। साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि वह अगले दो दिनों में इस्तीफे पर फैसला लेंगे।

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