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सेना दिवस से पहले चर्चा में रॉकेट मिसाइल फोर्स, चीन ने 2015 में ही बना लिया था, अब भारत को क्यों है इसकी जरूरत?

थलसेना अध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि सेना को रॉकेट मिसाइल फोर्स की जरूरत है। चीन ने 2015 में ही इसका गठन कर लिया था, जबकि पाकिस्तान ने भी बीते साल रॉकेट फोर्स बनाने की घोषणा की थी।

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भारत

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Mukul Kumar

Jan 14, 2026

रॉकेट मिसाइल। (फाइल फोटो- ANI)

थलसेना अध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को कहा कि सेना को रॉकेट मिसाइल फोर्स की जरूरत है। चीन ने इसका गठन 2015 में ही कर लिया था।

वहीं, पाकिस्तान ने भी ऑपरेशन सिंदूर में मिली हार के बाद बीते साल रॉकेट फोर्स बनाने की घोषणा की है। ऐसे में यह जानना आवश्यक है कि आखिर ये रॉकेट फोर्स होती क्या है। यह कैसे काम करेगी और इससे भारत की क्षमता कैसे बढ़ेगी?

रॉकेट फोर्स आखिर होती क्या है?

युद्ध की बदले तौर तरीकों में रॉकेट फोर्स लंबी दूरी तक सटीक मार करने में किसी भी सेना को सक्षम बनाती है। आमतौर पर तोपखाने की मारक क्षमता 5 से 50 किलोमीटर तक होती है। जबकि इससे ज्यादा दूरी तक मार करने में मल्टी बैरल रॉकेट लांचर और क्रूज और सबसोनिक मिसाइलों का उपयोग किया जाता है।

रॉकेट फोर्स एकीकृत इकाई के रूप में काम करते हुए मिसाइल,रॉकेट हथियारों को संचालित, नियंत्रित और उन्हें फायर करती है। आम तौर पर रॉकेट फोर्स का उद्देश्य पारंपरिक और परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम मिसाइलों को इस्तेमाल करना होता है। वर्तमान समय के युद्ध में रॉकेट फोर्स को गेम चेंजर माना जाता है।

भारत में रॉकेट फोर्स को लेकर क्या है स्थिति ?

भारतीय सेना के लिए रॉकेट फोर्स की जरूरत काफी समय से महसूस की जा रही है। इसके गठन को लेकर देश के पहले सीडीएस रहे जनरल विपिन रावत ने जोर दिया था। ताकि चीन और पाकिस्तान की आक्रामकता से ज्यादा बेहतर तरीके से निपटा जा सके। अभी भारतीय सेना में कोर ऑफ आर्टिलरी, सामरिक बल कमांड के तहत मिसाइल क्षमताओं को संचालित किया जाता है।

रॉकेट फोर्स में होंगी कौन सी मिसाइलें?

भारतीय के रॉकेट फोर्स के गठन में कई अहम मिसाइलों को शामिल करने के साथ इसके संचालन के लिए इंटीग्रेटेड कमांड प्रणाली को डेवलप किया जाएगा।

माना जा रहा है कि गैर परमाणु बैलिस्टिक मिसाइलों के इतर रॉकेट फोर्स में पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम के एडवांस वर्जन, ब्रम्होस क्रूज मिसाइल, प्रलय मिसाइल, हाइपरसोनिक मिसाइल और निर्भय सबसोनिक मिसाइलें होंगी।

यह सभी मिसाइलें जमीन से जमीन पर सटीक और घातक प्रहार करने में सक्षम हैं। इससे भारतीय सेना को 500 से हजार किलोमीटर तक मार करने में क्षमता मिलेगी।

मिसाइल डेवलपमेंट और प्रोडक्शन पर कितना जोर?

भारत ने लंबी रिसर्च के बाद स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों को विकसित किया है। पृथ्वी से लेकर अग्रि मिसाइल सिस्टम,के-4,के-15 मिसाइलों के जरिए भारत की न्यूक्लियर ट्रायड मजबूत हुई हैै।

इसके अतिरिक्त प्रलय मिसाइलों की खरीद की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। ब्रम्होस मिसाइल के प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए लखनऊ में प्लांट तैयार हो रहा है।

हाल में भारत ने 120 किलोमीटर तक मार करने वाले पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लांचर के नए संस्करण का सफल परीक्षण किया है। जिसे भारतीय सेना खरीदेगी।


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