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क्यों पब्लिश नहीं हुई पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की ‘Four Stars of Destiny’, जानें नियम

Manoj Mukund Naravane Book: पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की आत्मकथा “फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी (Four Stars of Destiny)” अभी तक प्रकाशित नहीं हो पाई है।

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भारत

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Ashib Khan

Feb 03, 2026

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पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की किताब का हुआ जिक्र

Four Stars of Destiny: सोमवार को लोकसभा में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) द्वारा पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (Manoj Mukund Naravane) की किताब के कुछ हिस्से पढ़ने के बाद हंगामा खड़ा हो गया। इस पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) और गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने आपत्ति जताई और नेता प्रतिपक्ष को बीच में कई बार टोका। इसके अलावा स्पीकर ओम बिरला (Om Birla) को भी हस्तक्षेप करना पड़ा।

लोकसभा में राहुल द्वारा किताब का जिक्र करने पर एक बार फिर उन नियमों और कानूनों पर बहस तेज हो गई जो कि रिटायरमेंट के बाद वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को गोपनीय जानकारी सार्वजनिक करने से रोकते हैं।

क्या है नियम?

जिन सैन्य अधिकारियों के पास संवेदनशील और गोपनीय जानकारियां होती हैं, वे ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (Official Secrets Act) और अन्य रक्षा नियमों के तहत आते हैं। इन नियमों के अनुसार, रिटायरमेंट के बाद भी कोई अधिकारी बिना सरकारी अनुमति के ऐसी जानकारियां प्रकाशित नहीं कर सकता, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हों।

सरकार से लेनी होती है अनुमति

हालांकि सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए निजी या व्यावसायिक नौकरी करने से पहले एक साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड होता है, लेकिन किताब, लेख या संस्मरण प्रकाशित करने के लिए सरकार से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है, खासकर जब विषय संवेदनशील हो।

नरवणे की ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ नहीं हुई प्रकाशित

पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की आत्मकथा “फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी (Four Stars of Destiny)” अभी तक प्रकाशित नहीं हो पाई है। उनकी यह किताब जनवरी 2024 में बाजार में आने वाली थी, लेकिन रक्षा मंत्रालय और सेना ने प्रकाशक से कहा कि जब तक किताब की सामग्री की समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक इसे प्रकाशित न किया जाए।

इस कारण नहीं मिली मंत्रालय की अनुमति

मीडिया के मुताबिक, किताब में 2020 के LAC (वास्तविक नियंत्रण रेखा) गतिरोध और अग्निपथ योजना से जुड़े संवेदनशील विवरण हैं, जिस कारण मंत्रालय की मंजूरी अब तक नहीं मिली है। फिलहाल न तो प्रकाशक, न लेखक और न ही रक्षा मंत्रालय की ओर से किताब की स्थिति पर कोई आधिकारिक बयान सामने आया है।

उल्लंघन करने पर हो सकती है कार्रवाई

नियमों के उल्लंघन की स्थिति में सरकार कानूनी कार्रवाई कर सकती है। इसके अलावा CCS (Pension) Rules के तहत संबंधित अधिकारी की आंशिक या पूरी पेंशन भी रोकी जा सकती है। रक्षा सूत्रों का मानना है कि अगर यह किताब बिना मंजूरी प्रकाशित होती है, तो इससे भारत-चीन LAC हालात फिर से भड़क सकते हैं।

भारत और चीनी सैनिकों में हुई थी झड़प

जनरल नरवणे 31 दिसंबर 2019 से 30 अप्रैल 2022 तक भारतीय सेना के प्रमुख रहे। दरअसल, 2020 में मई-जून में पूर्वी लद्दाख और सिक्किम सेक्टर में भारत और चीन की सेनाओं के बीच गंभीर टकराव हुआ था। 15 जून 2020 को गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे, जबकि चीनी पक्ष को भी नुकसान हुआ था। यह दशकों में सबसे बड़ा सैन्य टकराव माना गया।

किताब के पब्लिश नहीं होने पर क्या बोले नरवणे?

एक यूट्यूब चैनल से बात करते हुए पूर्व सेना प्रमुख नरवणे ने अपनी किताब प्रकाशित नहीं होने पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मैंने यह किताब एक ऑटोबायोग्राफी के तौर पर लिखी थी। पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि उनका काम किताब लिखना और पब्लिशर को देना था। जब कभी किताब को लेकर अनुमति मिलेगी, तो किताब पब्लिश हो जाएगी। 

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