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PMO का सबसे बड़ा वह अफसर, जो जूनियर के नाम से फाइल पर लिखवाते थे अपने मुंह की बात

पता बदल जाने की वजह से PMO आजकल चर्चा में है। जानिए,, पीएमओ से जुड़ी कुछ मजेदार बातें।

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भारत

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Vijay Kumar Jha

Feb 17, 2026

How PMO works, Stories of various principal secretaries in PMO

पीएन हक्सर, ब्रजेश मिश्रा जहां कद्दावर प्रिंसिपल सेक्रेटरी के रूप में जाने जाते हैं, वहीं कुछ पीएस ऐसे भी हुए जो फ़ाइल पर नोट लिखने से भी बचते थे। (प्रतिकात्मक फोटो सोर्स: एआई)

पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय या Prime Minister's Office) का प्रिंसिपल सेक्रेटरी, यानि नौकरशाहों का ‘असली’ शहंशाह। लेकिन इनकी बादशाहत कितनी चलेगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि पीएमओ का मुखिया (प्रधानमंत्री) कितना कद्दावर है, उनसे इन्हें कितनी ताकत मिली हुई है और वे खुद उस ताकत का कितना इस्तेमाल करते हैं।

पीएन हक्सर (इंदिरा गांधी) और ब्रजेश मिश्रा (अटल बिहारी वाजपेयी) का नाम सबसे ताकतवर प्रिंसिपल सेक्रेटरीज में लिया जाता है। इन दोनों को पीएम ने लगभग असीमित अधिकार दे दिए थे। इन्हें पीएम के समानांतर, सत्ता का दूसरा प्रतीक समझा जाने लगा था। दूसरी ओर, मनमोहन सिंह के प्रिंसिपल सेक्रेटरी टीकेए नायर थे, जो फाइल पर नोट लिखने तक से परहेज करते थे।

मनमोहन के प्रधान सचिव हर फ़ाइल पर लिख देते थे- प्लीज डिस्कस

मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने अपनी किताब 'The Accidental Prime Minister-The Making and Unmaking of Manmohan Singh' में नायर के काम करने के तरीके के बारे में बताया है। बारू लिखते हैं कि नायर किसी फ़ाइल पर साफ-सटीक और खुल कर टिप्पणी नहीं लिखते थे। ज़्यादातर मामलों में उनकी टिप्पणी होती थी 'प्लीज डिस्कस' (कृपया चर्चा करें)। वह अपने नीचे के अफसरों को मौखिक निर्देश देते थे और इन निर्देशों को उन्हीं से उनकी राय के रूप में फ़ाइल पर नोट करवाते थे। नायर प्रिंसिपल सेक्रेटरी थे, लेकिन अपने जूनियर पुलक चटर्जी (जॉयंट सेक्रेटरी) पर उनकी बड़ी निर्भरता थी। इसकी वजह यह थी कि चटर्जी का सोनिया गांधी से सीधा कनेक्शन था।

वो प्रधान सचिव, जो बन गए थे 'सरकार'

पीएमओ में रसूख के मामले में पीएन हक्सर और ब्रजेश मिश्रा की जो छवि बनी, वह कोई और अफसर आज तक नहीं बना सका है। वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी ने अपनी किताब 'How Prime Ministers Decide'में लिखा है कि इन दोनों को एक तरह से 'सरकार' ही माना जाता था।

मनमोहन सिंह के बारे में नीरजा लिखती हैं कि वह तो कैबिनेट की बैठकों में भी कम बोलते थे और मंत्रियों के समूहों के जरिए सरकार चलाते थे। इनमें से कई समूहों की अध्यक्षता प्रणव मुखर्जी को सौंप दी थी। बक़ौल नीरजा, मनमोहन सरकार के दौरान सत्ता का असली केंद्र सोनिया गांधी थीं, जो अपने राजनीतिक सचिव अहमद पटेल के जरिए काम करवाती थीं।

नरेंद्र मोदी का है अलग स्टाइल

2014 में नरेंद्र मोदी पीएमओ में आए। वह अपने इस दफ्तर के जरिए पूरी सरकार पर नजर रखते हैं। नीरजा लिखती हैं कि पीएमओ ही मंत्रालयों के एजेंडे तय करता है, संबंधित मंत्री इस पर अमल करवाते हैं और इसकी रिपोर्ट पीएमओ को देते रहते हैं। अमित शाह को इससे छूट मिली हुई है। उच्च स्तर पर फैसले लेने में उनकी भागीदारी रहती है।

मोदी सरकार में पीएमओ संभालने वाले नृपेंद्र मिश्रा (2014-2019) और पीके मिश्रा लो प्रोफ़ाइल ही रहते हैं। उनके पास पीएन हक्सर या ब्रजेश मिश्रा जैसी ताकत भी नहीं है। मोदी के पीएमओ में एनएसए अजित डोवाल की ज्यादा अहमियत है और प्रधानमंत्री का उन पर पूरा भरोसा है।

नरेंद्र मोदी ने पीएमओ की कार्यशैली तो बदली ही, हाल ही में एक बड़ा बदलाव यह किया कि दफ्तर की जगह बदल दी। आजादी के बाद से ही पीएमओ 'साउथ ब्लॉक' में हुआ करता था। अब 'सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स' में चला गया है।

नेहरू नहीं बढ़वा पाए थे पीएमएस की शक्ति

पीएमओ को ताकतवर बनाने की कोशिश देश के पहले प्रधानमंत्री के समय भी हुई थी। पंडित जवाहर लाल नेहरू के प्रधानमंत्री सचिवालय (पीएमएस) का मुखिया जॉयंट सेक्रेटरी लेवल का एक अफसर हुआ करता था। यह ज़िम्मेदारी एमओ मथाई के पास थी। वह पंडित नेहरू के निजी सचिव (पीएस) भी हुआ करते थे। नेहरू ने पीएमएस को शक्तिशाली बनानाने के पहल की, लेकिन सरदार पटेल ऐसा नहीं चाहते थे।

शास्त्री के जमाने में पीएमएस की ताकत थोड़ी बढ़ी

नेहरू के बाद जब लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने अपने दफ्तर का जिम्मा सीनियर अफसर को सौंपा और आईसीएस अफसर एलके झा को पीएमएस का सेक्रेटरी बनाया। वह प्रधानमंत्री के हर काम काज का ख्याल रखते थे और इस तरह कैबिनेट सचिव से भी ज्यादा शक्तिशाली हो गए थे। भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 की लड़ाई के बाद पीएम शास्त्री को ताशकंद जाने के लिए झा ने ही राजी किया था।

इंदिरा के आने पर बढ़ी पीएमएस की 'असली ताकत'

इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं तो उन्होंने पीएमएस को काफी ताकतवर बना दिया। उन्होंने सबसे पहले पीएमएस में राज्य मंत्री को एंट्री दी और पीएमएस में प्रिंसिपल सेक्रेटरी नियुक्त किया।

इंदिरा ने राज्य मंत्री दिनेश सिंह को पीएमएस का चार्ज दिया। 1967 में पीएन हक्सर को पीएमएस का सेक्रेटरी बनाया। 1971 में वह प्रिंसिपल सेक्रेटरी (प्रधान सचिव) बनाए गए।

1971 से 2026 तक कौन कब रहे पीएम के प्रिंसिपल सेक्रेटरी

क्र.प्रधान सचिव का नामकार्यकालप्रधानमंत्री
1पी. एन. हक्सर (IFS)1971 - 1973इंदिरा गांधी
2पी. एन. धर (IES)1973 - 1977इंदिरा गांधी
3वी. शंकर (ICS)1977 - 1979मोरारजी देसाई
4पी. सी. अलेक्जेंडर (IAS)1981 - 1985इंदिरा गांधी / राजीव गांधी
5सरला ग्रेवाल (IAS)1985 - 1989राजीव गांधी
6बी. जी. देशमुख (IAS)1989 - 1990राजीव गांधी / वी.पी. सिंह
7एस. के. मिश्रा (IAS)1990 - 1991चंद्रशेखर
8अमर नाथ वर्मा (IAS)1991 - 1996पी. वी. नरसिम्हा राव
9टी. आर. सतीशचंद्रन (IAS)1996 - 1997एच. डी. देवेगौड़ा / आई. के. गुजराल
10एन. एन. वोहरा (IAS)1997 - 1998आई. के. गुजराल
11ब्रजेश मिश्रा (IFS)1998 - 2004अटल बिहारी वाजपेयी
12टी. के. ए. नायर (IAS)2004 - 2011डॉ. मनमोहन सिंह
13पुलक चटर्जी (IAS)2011 - 2014डॉ. मनमोहन सिंह
14नृपेंद्र मिश्रा (IAS)2014 - 2019नरेंद्र मोदी
15डॉ. पी. के. मिश्रा (IAS)2019 - वर्तमाननरेंद्र मोदी
16शक्तिकांत दास (IAS)2025 - वर्तमाननरेंद्र मोदी (प्रधान सचिव-2)

1973 में इस्तीफा देने से पहले हक्सर ने प्रधानमंत्री सचिवालय को 'पावर सेंटर' बना दिया था। इंदिरा के हर निर्णय पर उनकी छाप होती थी। मामला चाहे बैंकों के राष्ट्रीयकरण का हो या बांग्लादेश से युद्ध करने का।

मोरारजी ने फिर कम की ताकत

जब मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने पीएमएस का नाम भी बदला और चरित्र भी। पीएमएस अब पीएमओ हो गया। साथ ही, पीएमओ में अफसर भी घटाए और इसकी ताकत भी कम की।

नरसिम्हा राव ने अपनाया अलग तरीका

नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने पीएमओ में केवल एक अफसर पर निर्भर रहने की नीति नहीं अपनाई। वैसे तो अमरनाथ वर्मा उनके प्रिंसिपल सेक्रेटरी थे, लेकिन उन्होंने नरेश चंद्रा को भी आगे बढ़ाया। चंद्रा को 'अयोध्या सेल' के प्रमुख के तौर पर लाया गया, लेकिन उनसे और काम भी लिए जाने लगे। नीरजा चौधरी ने अपनी किताब में लिखा है कि राव ने 1995 में परमाणु परीक्षण के सिलसिले में वैज्ञानिकों से बातचीत का संपर्क सूत्र भी चंद्रा को ही बनाया था।

कब कौन रहे पीएम

क्र.प्रधानमंत्री का नामकार्यकालयाद रहे...
1जवाहरलाल नेहरू15 अगस्त 1947 - 27 मई 1964भारत के पहले और सबसे लंबे समय तक रहने वाले पीएम।
2गुलजारीलाल नंदा27 मई 1964 - 9 जून 1964पहले कार्यवाहक प्रधानमंत्री (13 दिन)।
3लाल बहादुर शास्त्री9 जून 1964 - 11 जनवरी 1966जय जवान जय किसान' का नारा दिया।
4गुलजारीलाल नंदा11 जनवरी 1966 - 24 जनवरी 1966दूसरी बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री।
5इंदिरा गांधी24 जनवरी 1966 - 24 मार्च 1977भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री।
6मोरारजी देसाई24 मार्च 1977 - 28 जुलाई 1979पहले गैर-कांग्रेसी पीएम और सबसे वृद्ध (81 वर्ष)।
7चौधरी चरण सिंह28 जुलाई 1979 - 14 जनवरी 1980अकेले पीएम जिन्होंने कभी संसद का सामना नहीं किया।
8इंदिरा गांधी14 जनवरी 1980 - 31 अक्टूबर 1984दूसरी बार प्रधानमंत्री बनीं।
9राजीव गांधी31 अक्टूबर 1984 - 2 दिसंबर 1989भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री (40 वर्ष)।
10विश्वनाथ प्रताप सिंह2 दिसंबर 1989 - 10 नवंबर 1990अविश्वास प्रस्ताव के कारण पद छोड़ने वाले पहले पीएम।
11चंद्रशेखर10 नवंबर 1990 - 21 जून 1991समाजवादी जनता पार्टी से संबंधित।
12पी. वी. नरसिम्हा राव21 जून 1991 - 16 मई 1996दक्षिण भारत से पहले प्रधानमंत्री।
13अटल बिहारी वाजपेयी16 मई 1996 - 1 जून 1996केवल 16 दिनों के लिए (सबसे छोटा कार्यकाल)।
14एच. डी. देवेगौड़ा1 जून 1996 - 21 अप्रैल 1997जनता दल से संबंधित।
15इंद्र कुमार गुजराल21 अप्रैल 1997 - 19 मार्च 1998गुजराल सिद्धांत' के लिए प्रसिद्ध।
16अटल बिहारी वाजपेयी19 मार्च 1998 - 22 मई 2004पूर्ण कार्यकाल पूरा करने वाले पहले गैर-कांग्रेसी पीएम।
17डॉ. मनमोहन सिंह22 मई 2004 - 26 मई 2014भारत के पहले सिख प्रधानमंत्री (लगातार दो कार्यकाल)।
18नरेंद्र मोदी26 मई 2014 - वर्तमानलगातार तीसरी बार निर्वाचित होने वाले दूसरे पीएम।

नरेंद्र मोदी के पीएमओ के कुछ प्रमुख अफसर

पद (Designation)वर्तमान पदाधिकारी / विवरण
राजनैतिक प्रमुखनरेंद्र मोदी (प्रधानमंत्री)
राज्य मंत्री (PMO)डॉ. जितेंद्र सिंह
प्रधान सचिव-1डॉ. पी. के. मिश्रा (IAS)
प्रधान सचिव-2शक्तिकांत दास (IAS, पूर्व गवर्नर RBI)
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारअजित डोभाल (IPS, KC)
सलाहकार (Advisor)तरुण कपूर, अमित खरे
विशेष सचिवआतिश चंद्रा (IAS)