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पीएमओ की वो बातें, जो राज नहीं रहीं- कैसे अमेठी से साउथ ब्लॉक पहुंच कर पावरफुल बन गया था एक अफसर!

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से पूरा देश चलता है, लेकिन यह कार्यालय कैसे चलता है? यह लोगों की दिलचस्पी का बड़ा सवाल है, लेकिन इस बारे में बहुत ज्यादा जानकारी सामने आती नहीं है। कुछ किताबों के जरिये इससे जुड़ी कई बातें जरूर सामने आई हैं।

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भारत

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Vijay Kumar Jha

Feb 18, 2026

PMO secret, inside stories of PMO during manmohan, indira

पीएमओ के पुराने दफ्तर (साउथ ब्लॉक) की कई कहानियां दीवारों में कैद ही रह गईं। कुछ बाहर आई हैं। (फोटो सोर्स: एआई टूल्स)

मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने अपनी किताब 'The Accidental Prime Minister-The Making and Unmaking of Manmohan Singh' में पीएमओ के काम और कार्यशैली के बारे में बहुत सी बातें लिखी हैं। इनसे यह भी पता चलता है कि उनके पीएमओ में अफसरों की भर्ती कैसे हुई थी।

मनमोहन के प्रिंसिपल सेक्रेटरी टीकेए नायर के बारे में बारू ने बताया है कि वह उनकी पहली पसंद नहीं थे। मनमोहन सिंह एनएन वोहरा को लाना चाहते थे। लेकिन, सोनिया गांधी किसी और को लाना चाहती थीं। उन्होंने आने से मना कर दिया, क्योंकि उनका पिता से वादा था कि रिटायर होने के बाद सरकार से कोई पद नहीं लूंगा। इसके बाद मनमोहन को उनके एक करीबी ने नायर का नाम सुझाया।

पीएमओ में Safe Game खेलने वाले प्रिंसिपल सेक्रेटरी

नायर इंद्र कुमार गुजराल के समय प्रिंसिपल सेक्रेटरी जरूर रहे थे, लेकिन इसके अलावा वह गृह, रक्षा, वित्त जैसे किसी बड़े मंत्रालय में सचिव तक नहीं रहे थे। मतलब वह कोई रसूख वाले या बहुत अनुभवी नौकरशाह नहीं थे। यह उनके काम में भी दिखता था।

नायर फ़ाइल पर नोट लिखने तक में हिम्मत नहीं दिखा पाते थे। वह जूनियर अफसरों को अपनी बात बता देते थे। वही बात उनके दस्तखत के साथ फाइल पर लिखवा लेते थे।

अनुभव कम, रसूख ज्यादा; सोनिया और मनमोहन के बीच की कड़ी डिप्टी सेक्रेटरी

नायर प्रिंसिपल सेक्रेटरी होते हुए भी काफी हद तक अपने एक जॉयंट सेक्रेटरी पुलक चटर्जी पर निर्भर रहते थे। चटर्जी ने पहले राजीव और सोनिया गांधी के साथ काम किया था। वह 'दस जनपथ' (सोनिया गांधी) व पीएमओ के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी थे।

पुलक चटर्जी के पास भी पीएमओ जैसी जगह काम करने लायक कोई पिछला अनुभव नहीं था। जब वह अमेठी (राजीव का संसदीय क्षेत्र) में तैनात थे, तभी राजीव गांधी की नजर उन पर पड़ी थी। बाद में राजीव ने उन्हें पीएमओ में बतौर डिप्टी सेक्रेटरी जॉइन करा दिया।

राजीव की मौत के बाद पुलक ने राजीव गांधी फ़ाउंडेशन के लिए काम किया। वह सोनिया गांधी (नेता प्रतिपक्ष) के निजी स्टाफ में भी शामिल रहे थे। बारू के मुताबिक, सोनिया की वजह से ही वह मनमोहन सरकार में पीएमओ में रखे गए थे।

सबकी फाइल तैयार रखने वाले एनएसए नारायणन

मनमोहन सिंह के पीएमओ में एक और अहम नौकरशाह थे एमके नारायणन। वह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) बनाए गए थे। नारायणन को उनके करीबी 'एमके' या 'माइक' बुलाते थे। राजीव और नरसिम्हा राव सरकार में वह खुफिया ब्यूरो (आईबी) के प्रमुख थे। राजीव गांधी की हत्या के वक्त भी आईबी चीफ वही थे।

नारायणन के बारे में बारू लिखते हैं, 'उनकी जुबान पर एक लाइन सबके लिए रहती थी- मेरे पास आपकी फ़ाइल है।' नेता, मंत्री, पत्रकार, अफसर, जिनसे भी वह मिलते, उनसे मज़ाक में यह वाक्य जरूर कह देते। और ऐसे कह देते कि सामने वाला इसे मज़ाक में नहीं ले पाता था। उन्होंने अपनी ऐसी छवि बना ली थी कि वह सबकी जासूसी करते हैं।'

उन्होंने पीएम के साथ यात्राओं के दौरान कई बार बारू को बताया कि कैसे कई प्रधानमंत्रियों ने उन्हें अपने सहयोगियों के बारे में जानकारी लेने के लिए बुलवाया था। वह यह भी बताते थे कि बड़े संपादकों के क्रेडिट कार्ड बिल तक पर उनकी नजर रहती थी।

बक़ौल बारू, मनमोहन सिंह नारायणन का इस्तेमाल किसी की जासूसी के लिए नहीं किया करते थे। उल्टा वह उनसे सचेत रहने की हिदायत देते थे ताकि कोई संवेदनशील मामला लीक न हो जाए।

क्या पीएमओ में रहती है बड़े नेताओं, अफसरों की फाइलें?

जहां तक नेता-अफसर आदि की गुप्त फाइल होने की बात है, नीरजा चौधरी अपनी किताब ‘How Prime Ministers Decide’ में लिखती हैं कि पीएमओ में नेताओं और मंत्रियों की फाइलें बनी होती हैं। उनका कहना है कि चन्द्रशेखर ने खुद उन्हें बताया था, 'हां, ऐसी फाइलें होती हैं। पर मैंने कभी उनका इस्तेमाल नहीं किया। मेरे पास आईबी से सूचनाएं आईं। मुझे बताया गया कि इंदिरा गांधी के जमाने में भी ऐसा होता था।'

पीवी नरसिम्हा राव के पीएमओ में राज्य मंत्री रहे भुवनेश चतुर्वेदी के हवाले से नीरजा चौधरी ने लिखा है, 'पीएमओ में नेताओं, बड़े नौकरशाहों और दूसरे अहम लोगों की फाइलें होती हैं। ये तालों के अंदर रखी होती हैं और चाभी पीएमओ के पास होती है।'

तो क्या पीएमओ की ताकत की एक वजह यह भी हो सकती है? कह नहीं सकते। पर, प्रिंसिपल सेक्रेटरी की ताकत के बारे में यह सब जानते हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी के पीएमओ में ब्रजेश मिश्रा प्रिंसिपल सेक्रेटरी से बहुत आगे की चीज थे।

प्रिंसिपल सेक्रेटरी की तरह काम करते थे मनमोहन!

संजय बारू ने मिश्रा के दबदबे का जिक्र करते हुए मनमोहन सिंह से एक बार मज़ाक में कहा- वाजपेयी के जमाने में प्रिंसिपल सेक्रेटरी ऐसे काम करते थे, जैसे वही पीएम हों और आपके मामले में कहा जाता है कि ऐसे काम करते हैं जैसे प्रिंसिपल सेक्रेटरी हों।

बारू की यह टिप्पणी इस संदर्भ में थी कि पीएम प्रशासन के हर छोटे-बड़े काम में दिलचस्पी लेते थे और अफसरों के साथ लंबी बैठकें किया करते थे।

वाजपेयी शायद ही कभी ऐसा करते होंगे। उन्होंसे काम-काज की ज़्यादातर जिम्मेदारियां मिश्रा को सौंप रखी थी।

इंदिरा से मोदी तक: पीएम के प्रिंसिपल सेक्रेटरी

क्र.प्रधान सचिव का नामकार्यकालप्रधानमंत्री
1पी. एन. हक्सर (IFS)1971 - 1973इंदिरा गांधी
2पी. एन. धर (IES)1973 - 1977इंदिरा गांधी
3वी. शंकर (ICS)1977 - 1979मोरारजी देसाई
4पी. सी. अलेक्जेंडर (IAS)1981 - 1985इंदिरा गांधी / राजीव गांधी
5सरला ग्रेवाल (IAS)1985 - 1989राजीव गांधी
6बी. जी. देशमुख (IAS)1989 - 1990राजीव गांधी / वी.पी. सिंह
7एस. के. मिश्रा (IAS)1990 - 1991चंद्रशेखर
8अमर नाथ वर्मा (IAS)1991 - 1996पी. वी. नरसिम्हा राव
9टी. आर. सतीशचंद्रन (IAS)1996 - 1997एच. डी. देवेगौड़ा / आई. के. गुजराल
10एन. एन. वोहरा (IAS)1997 - 1998आई. के. गुजराल
11ब्रजेश मिश्रा (IFS)1998 - 2004अटल बिहारी वाजपेयी
12टी. के. ए. नायर (IAS)2004 - 2011डॉ. मनमोहन सिंह
13पुलक चटर्जी (IAS)2011 - 2014डॉ. मनमोहन सिंह
14नृपेंद्र मिश्रा (IAS)2014 - 2019नरेंद्र मोदी
15डॉ. पी. के. मिश्रा (IAS)2019 - वर्तमाननरेंद्र मोदी
16शक्तिकांत दास (IAS)2025 - वर्तमाननरेंद्र मोदी (प्रधान सचिव-2)

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हक्सर के पास भरपूर पावर

इंदिरा गांधी ने तो अपने सेक्रेटरी को और भी ज्यादा ताकत दे रखी थी। उन्होंने पीएन हक्सर से सेक्रेटरी बनाया था। उनसे उनका बड़ा गहरा रिश्ता था। हक्सर प्रशासनिक और राजनीतिक ही नहीं, पारिवारिक मामलों में भी इंदिरा के संकटमोचक बनते थे। प्रधानमंत्री ने अपने बेटे संजय गांधी को समझाने तक का जिम्मा हक्सर को सौंपा था।

हक्सर ने कई मौकों पर इंदिरा को ऐसी बेबाक राय भी दी जो उन्हें पसंद नहीं आई। ऐसी ही एक राय इंदिरा को 'भारत रत्न' देने के राष्ट्रपति वीवी गिरि के फैसले पर थी।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अपनी किताब Intertwined Lives: PN Haksar and Indira Gandhi में बताया है कि हक्सर ने 1973 के गणतंत्र दिवस पर 'पद्म विभूषण' सम्मान लेने की पेशकश बड़ी विनम्रता के साथ ठुकरा दी थी। उन्होंने यह निर्णय पीएम की इच्छा के खिलाफ जाकर लिया था। साथ ही, उन्होंने इंदिरा गांधी को भी 'भारत रत्न' नहीं लेने की सलाह दी थी। इंदिरा को यह सलाह रास नहीं आई और कुछ दिनों तक वह हक्सर से नाराज भी रही थीं। हालांकि, यह नाराजगी कुछ ही दिनों की थी। हक्सर ने जनवरी, 1973 में इस्तीफा दे दिया था, लेकिन इसके बाद भी इंदिरा उन्हें काफी अहम काम सौंपती रही थीं।

1947-2026 के बीच पीएम की कुर्सी पर बैठ चुके हैं 15 नेता

क्र.प्रधानमंत्री का नामकार्यकालयाद रहे...
1जवाहरलाल नेहरू15 अगस्त 1947 - 27 मई 1964भारत के पहले और सबसे लंबे समय तक रहने वाले पीएम।
2गुलजारीलाल नंदा27 मई 1964 - 9 जून 1964पहले कार्यवाहक प्रधानमंत्री (13 दिन)।
3लाल बहादुर शास्त्री9 जून 1964 - 11 जनवरी 1966जय जवान जय किसान' का नारा दिया।
4गुलजारीलाल नंदा11 जनवरी 1966 - 24 जनवरी 1966दूसरी बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री।
5इंदिरा गांधी24 जनवरी 1966 - 24 मार्च 1977भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री।
6मोरारजी देसाई24 मार्च 1977 - 28 जुलाई 1979पहले गैर-कांग्रेसी पीएम और सबसे वृद्ध (81 वर्ष)।
7चौधरी चरण सिंह28 जुलाई 1979 - 14 जनवरी 1980अकेले पीएम जिन्होंने कभी संसद का सामना नहीं किया।
8इंदिरा गांधी14 जनवरी 1980 - 31 अक्टूबर 1984दूसरी बार प्रधानमंत्री बनीं।
9राजीव गांधी31 अक्टूबर 1984 - 2 दिसंबर 1989भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री (40 वर्ष)।
10विश्वनाथ प्रताप सिंह2 दिसंबर 1989 - 10 नवंबर 1990अविश्वास प्रस्ताव के कारण पद छोड़ने वाले पहले पीएम।
11चंद्रशेखर10 नवंबर 1990 - 21 जून 1991समाजवादी जनता पार्टी से संबंधित।
12पी. वी. नरसिम्हा राव21 जून 1991 - 16 मई 1996दक्षिण भारत से पहले प्रधानमंत्री।
13अटल बिहारी वाजपेयी16 मई 1996 - 1 जून 1996केवल 16 दिनों के लिए (सबसे छोटा कार्यकाल)।
14एच. डी. देवेगौड़ा1 जून 1996 - 21 अप्रैल 1997जनता दल से संबंधित।
15इंद्र कुमार गुजराल21 अप्रैल 1997 - 19 मार्च 1998गुजराल सिद्धांत' के लिए प्रसिद्ध।
16अटल बिहारी वाजपेयी19 मार्च 1998 - 22 मई 2004पूर्ण कार्यकाल पूरा करने वाले पहले गैर-कांग्रेसी पीएम।
17डॉ. मनमोहन सिंह22 मई 2004 - 26 मई 2014भारत के पहले सिख प्रधानमंत्री (लगातार दो कार्यकाल)।
18नरेंद्र मोदी26 मई 2014 - वर्तमानलगातार तीसरी बार निर्वाचित होने वाले दूसरे पीएम।