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‘नाम नरेंडर – काम सरेंडर!’ पवन खेड़ा का पीएम मोदी पर अब तक का सबसे बड़ा हमला

कांग्रेस का तीखा हमला: एआईसीसी (AICC) मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। खेड़ा ने दावा किया कि भारत सरकार अपने फैसले भारतीय हितों के बजाय अमेरिका के टाइम जोन और दबाव के हिसाब से ले रही है।

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pawan Khera pm modi

पवन खेड़ा और पीएम मोदी

Pawan Khera Slams PM Modi: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर पीएम को 'नाम नरेंडर - काम सरेंडर' करार दिया। विपक्ष का आरोप है कि अमेरिका भारत पर दबाव डालकर अपने फायदे की डील करवा रहा है, जबकि केंद्र सरकार इसे राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बता रही है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक समझौते पर सहमति बन गई है।

पवन खेड़ा का पीएम मोदी पर बड़ा हमला

AICC मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने कांग्रेस के आधिकारिक X हैंडल से पोस्ट किया। पोस्ट में लिखा, 'भारत सरकार अमेरिका के टाइम जोन के हिसाब से चल रही है, क्योंकि सारे निर्णय अमेरिका के हिसाब से हो रहे हैं। हमारे लिए इससे ज्यादा खेदजनक बात और कुछ नहीं हो सकती। डील सामने बैठकर नेगोशिएट की जाती है, लेकिन कनपटी पर बंदूक रख, CD दिखाकर, ब्लैकमेल कर जो किया जाए- वो सरेंडर होता है। 'नाम नरेंडर - काम सरेंडर'।'

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट

यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कांग्रेस ने केंद्र पर अमेरिकी दबाव में झुकने का आरोप लगाया। खेड़ा का इशारा ट्रेड डील में कथित ब्लैकमेल और दबाव की ओर है, जहां अमेरिका भारत से कृषि, डेयरी और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी जैसे क्षेत्रों में रियायतें मांग रहा है। कांग्रेस का कहना है कि यह डील किसानों और छोटे व्यापारियों के हितों के खिलाफ है।

कांग्रेस का स्टैंड और विपक्षी हमला

कांग्रेस ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया है। पार्टी का कहना है कि मोदी सरकार विदेशी दबाव में राष्ट्रीय संप्रभुता को ताक पर रख रही है। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी पहले ट्रेड डील पर सवाल उठाए थे, लेकिन खेड़ा का यह हमला सबसे व्यक्तिगत और तीखा माना जा रहा है। विपक्षी नेता इसे लोकसभा चुनावों से पहले सरकार को घेरने का मौका मान रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने कहा कि अमेरिका के साथ डील में पारदर्शिता की कमी है और यह "सरेंडर" की तरह है।

सरकार का रिएक्शन और ट्रेड डील का बैकग्राउंड

केंद्र सरकार ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि ट्रेड डील दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखकर की जा रही है और कोई ब्लैकमेल नहीं है। पीएम मोदी ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात में आर्थिक सहयोग पर जोर दिया था। ट्रेड डील में अमेरिका भारत से टैरिफ कम करने की मांग कर रहा है, जबकि भारत अमेरिकी वीजा नीतियों और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर फोकस कर रहा है।