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गाजियाबाद में तीन किशोर बहनों की खुदकुशी के बाद उत्तर प्रदेश के मेरठ में गेम खेलते हुए 22 वर्षीय मोहम्मद कैफ की ब्रेन-हेमरेज से मौत चेता रही है कि ऑनलाइन गेमिंग अब केवल समय की बर्बादी ही नहीं रहा बल्कि एक 'न्यूरोलॉजिकल टाइम बम' बन गया है। भारत में भी निम्हांस और अन्य संस्थानों में देशभर से गेमिंग और इंटरनेट लत के मामलों में लगातार तेजी आ रही है।
अकेले कर्नाटक में पिछले तीन सालों में ऑनलाइन गेमिंग एडिक्शन से जुड़ी 18 मौतें दर्ज की गई, जिनमें कुछ लोगों ने गेमिंग फीचर खरीदने के दबाव और मानसिक तनाव के कारण जीवन समाप्त किया। पुणे में एक 15 साल के बच्चे ने कुछ दिनों तक गेमिंग के बाद 'लॉगआउट' लिखकर आत्महत्या कर ली। विशेषज्ञों के अनुसार, गेमिंग के दौरान तीव्र उत्तेजना में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन बढ़ते हैं।
डोपामीन हाइवे: इन गेम में 'इंटरमिटेंट वेरिएबल रिवॉर्ड्स' का उपयोग होता है। हर जीत पर दिमाग में 'डोपामीन' हार्मोन रिलीज होता है। धीरे-धीरे दिमाग को ऐसी लत लगती है कि सामान्य जीवन उसे 'उबाऊ' लगने लगता है।
प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स पर प्रहार: अत्यधिक गेमिंग दिमाग के उस हिस्से को कमजोर कर देती है जो निर्णय लेने और आवेग को नियंत्रित करता है। यही कारण है कि युवा आर्थिक नुकसान या सेहत बिगड़ने के बावजूद फोन नहीं छोड़ पाते।
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Updated on:
12 Feb 2026 07:07 am
Published on:
12 Feb 2026 07:06 am
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