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भारत, May 29, 2026

नीट पेपर को लेकर युद्ध स्तर पर तैयारी, PMO रखेगा परीक्षा पर नजर, एयरफोर्स के जरिए पहुंचेंगे पेपर

NEET UG Exam: नीट-यूजी री-एग्जाम को सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र सरकार युद्ध स्तर पर तैयारी कर रही है। इसके तहते PMO इन परीक्षाओं की सीधे निगरानी करेगा, जबकि प्रश्न पत्रों के सुरक्षित ट्रांसपोर्ट के लिए भारतीय वायु सेना को शामिल करने पर विचार चल रहा है।

Air Force to transport NEET paper

एयरफोर्स के जरिए नीट पेपर ट्रांसपोर्ट हो सकते है (फोटो- एआई जनरेटेड)

NEET UG Exam: विवादों और पेपर लीक के आरोपों के बाद अब केंद्र सरकार नीट-यूजी परीक्षा को लेकर पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रही है। 3 मई को आयोजित मेडिकल प्रवेश परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर के 23 लाख से ज्यादा छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए थे। अब 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इस बार पूरी परीक्षा प्रक्रिया पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) सीधे नजर रखेगा और प्रश्न पत्रों की सुरक्षा के लिए भारतीय वायु सेना (IAF) की मदद लेने पर भी विचार किया जा रहा है।

अब तक डाक के जरिए जाते थे पेपर

सूत्रों के मुताबिक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बीच हुई हाई लेवल बैठक में यह प्रस्ताव सामने आया। बैठक में भारतीय वायु सेना (IAF) के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। योजना के अनुसार प्रश्न पत्रों को प्रिंटिंग प्रेस से सीधे देशभर के परीक्षा केंद्रों तक एयरफोर्स की मदद से पहुंचाया जा सकता है। सरकार का मानना है कि बारिश और खराब मौसम के बीच संवेदनशील दस्तावेजों के सुरक्षित ट्रांसपोर्ट के लिए एयरफोर्स सबसे भरोसेमंद विकल्प साबित हो सकती है। अभी तक नीट के पेपर डाक व्यवस्था के जरिए पहुंचाए जाते थे, जिसमें कई स्तरों पर मानवीय हस्तक्षेप होता था।

प्रिंटिंग प्रेस से शुरू हुई थी पेपर लीक

नीट परीक्षा अभी भी पेन और पेपर मोड में आयोजित होती है, जबकि जेईई जैसी परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार 3 मई का पेपर लीक महाराष्ट्र के नासिक स्थित प्रिंटिंग प्रेस से शुरू हुआ था। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच में सामने आया कि पेपर एक कथित एनटीए स्रोत के जरिए बाहर पहुंचा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के पास सीमित स्थायी स्टाफ है और एजेंसी का बड़ा हिस्सा आउटसोर्स कर्मचारियों पर निर्भर है। संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक एनटीए में बड़ी संख्या में संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी काम करते हैं। यही वजह है कि सुरक्षा में सेंध की आशंका लगातार बनी रहती है।

विपक्ष ने की आलोचना

नीट विवाद के बाद सरकार ने जीरो ट्रस्ट, ऑलवेज इंस्पेक्ट नीति अपनाने की बात कही है। हालांकि एयरफोर्स को शामिल करने के प्रस्ताव पर सवाल भी उठ रहे हैं। कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम सिविल सिस्टम पर घटते भरोसे को दिखाता है। पूर्व सैन्य अधिकारियों और विपक्षी नेताओं ने इसे सिस्टम की विफलता बताया है। वहीं सरकार का तर्क है कि परीक्षा की विश्वसनीयता बहाल करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। ऐसे में इस बार नीट परीक्षा केवल एक एग्जाम नहीं बल्कि देश की परीक्षा व्यवस्था की साख बचाने की चुनौती भी बन गई है।

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