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अजित पवार की मौत के बाद NCP में हलचल, प्रफुल्ल पटेल ने अफवाहों पर लगाया विराम

प्रफुल्ल पटेल ने मीडिया में चल रही अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में नेतृत्व का फैसला तय और स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।

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मुंबई

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Ashib Khan

Feb 01, 2026

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प्रफुल्ल पटेल ने अफवाहों को किया खारिज (Photo-IANS)

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) इन दिनों गंभीर राजनीतिक दौर से गुजर रही है। पार्टी के प्रमुख अजित पवार के निधन ने संगठन के भीतर नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज कर दी है। वहीं अटकलें लगाई जाने लगी कि एनसीपी का नेतृत्व प्रफुल्ल पटेल कर सकते हैं, हालांकि इन खबरों को उन्होंने खारिज कर दिया और कहा कि इस तरह की खबरें निराधार हैं।

अध्यक्ष पद को लेकर स्थिति

प्रफुल्ल पटेल ने मीडिया में चल रही अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में नेतृत्व का फैसला तय और स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी किसी जल्दबाजी में निर्णय नहीं लेगी।

उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व का फैसला किसी एक व्यक्ति के आधार पर नहीं, बल्कि संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत ही होगा। पटेल ने आगे कहा, “नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी एक लोकतांत्रिक संस्था है। इतने बड़े फैसले वरिष्ठ नेताओं, विधायकों, पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से विचार-विमर्श के बाद ही लिए जाते हैं। एक राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते हम तय प्रक्रिया का पालन करते हैं।”

अजित पवार के बाद बदलाव

बता दें कि बुधवार को महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की विमान हादसे में मौत हो गई। इसके बाद प्रदेश की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई है। उनके निधन से न केवल एनसीपी बल्कि राज्य की सत्तारूढ़ व्यवस्था पर भी असर पड़ा है। तत्काल राजनीतिक घटनाक्रम में उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को एनसीपी विधायक दल का नेता चुना गया और उन्हें डिप्टी चीफ मिनिस्टर पद की शपथ दिलाई गई। इसके बाद पार्टी के एक वर्ग ने मांग उठाई कि उन्हें ही राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सौंपी जाए।

एकता और भविष्य की राजनीति

अजित पवार के निधन से पहले एनसीपी के दोनों गुटों के बीच विलय को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी। अब यह प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है और सभी नेता हालात का आकलन कर रहे हैं। वरिष्ठ नेता प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से चुप्पी साध रखी है। वहीं नरहरी जिरवाल जैसे नेता लगातार पार्टी एकता और साझा भविष्य की राजनीति पर जोर दे रहे हैं।

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