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रांची, Apr 03, 2026

नक्सलवाद के एक युग का अंत! 1 करोड़ का इनामी ‘प्रशांत बोस’ खत्म, अस्पताल में ली आखिरी सांस

बोस बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल, रांची में बंद थे। जेल में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें RIMS में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

Naxalite leader Prashant Bose

Naxalite leader Prashant Bose

Prashant Bose Naxalite Death: प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के वरिष्ठ पोलित ब्यूरो सदस्य और नक्सल आंदोलन के दिग्गज नेता प्रशांत बोस उर्फ किशन दा का शुक्रवार को रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) अस्पताल में निधन हो गया। 82 वर्षीय बोस लंबे समय से बहुबीमारी से जूझ रहे थे। उनकी मौत के साथ नक्सलवाद के पुराने युग का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है।

जेल में अचानक बिगड़ गई थी तबीयत

बोस बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल, रांची में बंद थे। जेल में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें RIMS में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। RIMS अधीक्षक डॉ. हिरेन बिरुआ ने पुष्टि की कि बोस कई बीमारियों से ग्रस्त थे। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, जेल में ही सुबह करीब 4 बजे उन्होंने दम तोड़ा, जिसके बाद शव पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया।

कौन था प्रशांत बोस?

प्रशांत बोस 1960 के दशक से नक्सल आंदोलन से जुड़े हुए थे। वे भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य थे और बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल तथा छत्तीसगढ़ में संगठन की गतिविधियों के प्रमुख चेहरों में शुमार थे। उन्हें 'किशन दा' के नाम से जाना जाता था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वे नक्सली विचारधारा के 'एन्साइक्लोपीडिया' माने जाते थे और पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो का नेतृत्व संभालते थे। उनके नाम पर सैकड़ों हिंसक घटनाओं, हमलों और सुरक्षा बलों पर हमलों के मामले दर्ज थे।

नवंबर 2021 में झारखंड पुलिस ने कोल्हान क्षेत्र (साराइकेला-खरसावां जिले) में एक चेकिंग के दौरान बोस को उनकी पत्नी शीला मरांडी (जो खुद माओवादी नेता हैं) और चार अन्य सक्रिय सदस्यों के साथ गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी को झारखंड पुलिस ने उस समय अपना सबसे बड़ा उपलब्धि बताया था। उस वक्त बोस के सिर पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। इंस्पेक्टर जनरल (ऑपरेशंस) अमोल विनुकांत होमकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी थी।

सरंडा जंगलों में थे सक्रिय

झारखंड के डीजीपी निराज सिन्हा ने बोस को बिहार-झारखंड समेत आसपास के राज्यों में नक्सलवाद का प्रमुख नेता बताया। उन्होंने कहा कि 1960 के दशक से जुड़े बोस के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठा करने में समय लगेगा। बोस की गिरफ्तारी के समय उनकी उम्र 75 वर्ष के आसपास बताई गई थी और वे सरंडा जंगलों में सक्रिय माने जाते थे।

नक्सल आंदोलन में बोस की भूमिका को 'थिंक टैंक' के रूप में देखा जाता था। उन्होंने ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता के रूप में शुरुआत की और दशकों तक वामपंथी उग्रवाद की विचारधारा को मजबूत किया। उनकी पत्नी शीला मरांडी भी माओवादी सेंट्रल कमिटी की सदस्य रहीं और गिरफ्तारी के बाद वे भी जेल में हैं।

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