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अरब की रिफाइनरियां बंद होने का भारत पर क्या होगा असर ? जानिए देश के पास कितने दिन का तेल है मौजूद

Strategic Petroleum Reserve: अरब देशों और कतर की रिफाइनरियों पर भीषण हमले के बाद दुनिया में कच्चे तेल का हाहाकार मचा है। जानिए इस महाविनाश के बीच भारत के पास कितने दिनों का पेट्रोल-डीजल (74 days oil reserve) सुरक्षित है और LPG सप्लाई का क्या होगा।

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भारत

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MI Zahir

Mar 11, 2026

Pachpadra-Refinery

पचपदरा रिफाइनरी। फोटो: पत्रिका

Crude Oil Supply: सऊदी अरब के रास तनूरा (Ras Tanura), कतर के रास लाफ्फान (Ras Laffan) और यूएई की रुवैस (Ruwais) रिफाइनरी पर हमलों और मध्य पूर्व में मौजूदा तबाही के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार बुरी तरह हिल गया है। दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) से तेल की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। जानकारी के अनुसार भारत अपनी जरूरत का लगभग 88-89% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि खाड़ी देशों की इन विशाल रिफाइनरियों के बंद होने का भारत की आपूर्ति पर क्या असर पड़ेगा?

भारत के पास कितना तेल मौजूद है ? (74 दिनों का महा-कवच)

भारत सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, किसी भी वैश्विक आपातकाल से निपटने के लिए भारत के पास कुल 74 दिनों का तेल भंडार (Strategic and Commercial Reserves) मौजूद है।

स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व (SPR): भारत ने विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश), मंगलौर और पादुर (कर्नाटक) की भूमिगत गुफाओं में 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) कच्चा तेल सुरक्षित रखा है। यह रिज़र्व देश की लगभग 9.5 से 10 दिनों की मांग को पूरी तरह कवर करता है।

तेल कंपनियों का वाणिज्यिक भंडार: देश की सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) और रिफाइनरियों के पास कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों (पेट्रोल-डीजल) का लगभग 64.5 दिनों का स्टॉक (करीब 144 मिलियन बैरल) मौजूद है।

अरब व भारत की रिफाइनरियां और तेल उपलब्धता।

क्या भारत में पेट्रोल-डीजल की कमी होगी? (नया सप्लाई प्लान)

भारत पर इस संकट का सीधा असर सीमित रहेगा, क्योंकि भारत ने खाड़ी देशों पर अपनी निर्भरता काफी कम कर ली है:

70% तेल अब सुरक्षित रास्तों से : पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में संकट को देखते हुए भारत ने अपना सप्लाई रूट बदल लिया है। अब भारत का 70% कच्चा तेल संघर्ष वाले क्षेत्रों के बाहर से (Non-Strait sources) आ रहा है, जो 2025 में 60% था।

40 देशों से तेल खरीद: भारत अब केवल अरब देशों पर निर्भर नहीं है, बल्कि अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और रूस सहित 40 देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है।

तटों पर तैरता तेल: ऊर्जा एनालिटिक्स फर्म Kpler की रिपोर्ट के अनुसार, रूस का करोड़ों बैरल कच्चा तेल जहाजों के माध्यम से भारतीय तटों (अरब सागर और बंगाल की खाड़ी) के करीब मौजूद है, जो किसी भी शॉर्टेज को तुरंत पूरा कर सकता है। भारत की रिफाइनरियां (जैसे जामनगर, मंगलौर) वर्तमान में अपनी पूरी क्षमता पर काम कर रही हैं।

तेल या गैस का असली खतरा कहां है? (LPG और LNG संकट)

कच्चे तेल (पेट्रोल-डीजल) के मामले में भारत भले ही 74 दिनों के लिए सुरक्षित है, लेकिन असली चिंता LPG (रसोई गैस) और LNG (प्राकृतिक गैस) को लेकर है।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% LPG और 68% LNG खाड़ी देशों से ही आयात करता है।

रसोई गैस की सप्लाई चेन पर भारी दबाव पड़ा

जानकारी के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से रसोई गैस की सप्लाई चेन पर भारी दबाव पड़ा है। यही कारण है कि हाल के दिनों में कमर्शियल LPG सिलेंडरों के दाम बढ़े हैं। हालांकि, सरकार घरेलू एलपीजी उत्पादन को 10% तक बढ़ाकर और ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे व अमेरिका से आयात बढ़ा कर इस कमी को दूर करने का प्रयास कर रही है।

भारत में रातों-रात पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं होगी

बहरहाल, अरब देशों की रिफाइनरियां ठप होने से भारत में रातों-रात पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं होगी। भारत के पास 74 दिनों का पर्याप्त बफर और रूस-अमेरिका जैसे वैकल्पिक सप्लायर मौजूद हैं। लेकिन, अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें (जो पहले ही 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं) भारत में महंगाई और माल ढुलाई की लागत बढ़ा सकती हैं।