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जब पाक के सपोर्ट में अमेरिका ने भारत को दी थी खुली धमकी, लाल बहादुर शास्त्री भी अड़ गए, कहा- नहीं रोकेंगे युद्ध…

Lal Bahadur Shastri: आज लाल बहादुर शास्त्री की 60वीं पुण्यतिथि है। वह सादगी और ईमानदारी की मिसाल थे।

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भारत

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Mukul Kumar

Jan 11, 2026

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री। (फोटो- ANI)

आज भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 60वीं पुण्यतिथि है। जब भी 'शास्त्री जी' की बात होती है तो उनसे जुड़े कई दिलचस्प किस्से उभरकर सामने आ जाते हैं।

जैसे कि जब वह प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने अपनी पत्नी ललिता शास्त्री को कहा था कि अब वह घर के कामों में मदद नहीं कर पाएंगे। वह बहुत सादगी से जीते थे और उनकी ईमानदारी के किस्से आज भी मशहूर हैं।

अमेरिकी के आगे नहीं झुके शास्त्री जी

उनसे जुड़ा एक और किस्सा भी काफी मशहूर है। 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच जंग छिड़ गई थी। तब शास्त्री जी प्रधानमंत्री थे। उस समय भारत भारी सूखे और युद्ध के कारण गंभीर खाद्य संकट का सामना कर रहा था। इस बीच, अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति लिंडन बी जॉनसन ने भारत पर दबाव बनाने के लिए शास्त्री जी को खुली धमकी दी थी।

शास्त्री जी ने अमेरिका को बेबाकी से दिया जवाब

अमेरिका ने धमकी दी कि पाकिस्तान के साथ युद्ध रोक दीजिये वरना हम आपको गेहूं देना बंद कर देंगे। इस पर पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री ने बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने अमेरिका से सीधे कहा- अगर ऐसा है तो आप गेहूं देना बंद कर दीजिये, हम युद्ध नहीं रोकेंगे।

शास्त्री जी अमेरिकी दबाव के सामने न कभी झुके, न ही युद्ध रोका और न ही कोई शर्त मानी। उस समय पूर्व पीएम ने देश को एकजुट रहने की अपील की। साथ ही उन्होंने जनता से सप्ताह में कम से कम एक दिन का भोजन छोड़ने का अनुरोध किया।

जय जवान जय किसान का नारा

खुद प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने अपने परिवार के साथ उपवास रखा, ताकि लोग समझें कि सेना और देश के लिए बलिदान जरूरी है। उसी समय शास्त्री जी ने 'जय जवान जय किसान' का नारा दिया था।

इस नारे से उन्होंने सेना (जवान) का मनोबल बढ़ाया और किसानों को अधिक उत्पादन के लिए प्रेरित किया, ताकि भविष्य में विदेशी मदद पर निर्भरता कम हो।

23 सितंबर, 1965 को दोनों देशों के बीच युद्ध विराम हुआ। कहा जाता है कि अगर उस समय युद्ध जारी रहता, तो भारत लाहौर तक पहुंच सकता था।

ताशकंद में हुआ समझौता

इसके बाद, 10 जनवरी, 1966 को सोवियत संघ की मध्यस्थता में ताशकंद घोषणा पर हस्ताक्षर हुए। इसमें दोनों देशों ने युद्ध पूर्व स्थिति में वापस लौटने और सभी कब्जे वाले क्षेत्र छोड़ने पर सहमति जताई।

बता दें कि 1904 में उत्तर प्रदेश में जन्मे लाल बहादुर शास्त्री भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे। वह 1964 से 1966 तक पीएम रहे। पाकिस्तान के साथ ताशकंद समझौते पर साइन करने के कुछ ही समय बाद, 11 जनवरी, 1966 को 61 साल की उम्र में ताशकंद में उनका निधन हो गया।


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