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भारत, Jun 01, 2026

कर्नाटक में डिप्टी सीएम पर खींचतान: चार डिप्टी सीएम पर फंसा पेंच; आज दिल्ली में शिवकुमार-सिद्दारमैया

Karnataka Congress Deputy CM formula: कर्नाटक में डिप्टी सीएम को लेकर सियासी खींचतान तेज हो गई है। चार डिप्टी सीएम फॉर्मूले पर सहमति नहीं बनने से संकट गहरा गया है। डीके शिवकुमार और सिद्धरामय्या दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात कर आगे की रणनीति तय करेंगे।

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डीके शिवकुमार और सिद्दारमैया (Photo- IANS)

Deputy Chief Minister controversy on Karnataka: कर्नाटक में डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले ही डिप्टी सीएम को लेकर मतभेद सामने आ गए हैं। पहले चार डिप्टी सीएम बनाने का फार्मूला लाने पर चर्चा हुई थी, लेकिन अब तक इस पर सहमति नहीं बन पाई है। अब इसको लेकर डीके शिवकुमार और सिद्धरामय्या 1 जून को यानी आज दिल्ली आएंगे। इसके बाद कांग्रेस आलाकमान से चर्चा करके आगे की लाइन तय होगी।

मतभेद की वजह क्या

असल में कर्नाटक में डीके शिवकुमार और सिद्धरामय्या के बीच सियासी संतुलन रखने की मंशा के तहत चार डिप्टी सीएम- दो डिप्टी सीएम सिद्धारमैया और दो डिप्टी सीएम शिवकुमार के खेमे से लाने की संभावना थी। लेकिन अब सामने आया है कि शिवकुमार डिप्टी सीएम को लेकर राजी नहीं है।

सत्ता के सूत्र अपने हाथों में रखने की मंशा के साथ डीके शिवकुमार चाहते हैं कि कोई भी डिप्टी सीएम न हो। इसकी बजाय डिप्टी सीएम पद के दावेदारों को भारी-भरकम विभाग देकर संतुष्ट करने का कदम उठाया जा सकता है।

वहीं सिद्धरामय्या अपने बेटे को डिप्टी सीएम बनवाने को लेकर चर्चा कर सकते हैं। फिलहाल यह तय नहीं हो सका है कि सीएम के पद की शपथ के साथ डिप्टी सीएम भी बनेंगे या नहीं।

मंत्रिमंडल विस्तार बाद में होगा

फिलहाल यह तय है कि 3 जून को डीके शिवकुमार सीएम पद की शपथ लेंगे। उनके साथ डिप्टी सीएम या कुछ मंत्री भी बन सकते हैं, पर पूरा मंत्रिमंडल गठन बाद में होगा। अभी मंत्रियों के नाम पर कोई सहमति नहीं बनी है। मामले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने साफ तौर पर कहा कि हमारे पास अभी मंत्रियों के नाम या सूची नहीं आई है। सूत्र बताते हैं कि अभी 3 जून को कुछ मंत्री बन सकते हैं, जबकि मंत्रिमंडल विस्तार में करीब 1 माह लग सकता है। अभी संतुलन के लिहाज से सिद्धरामय्या खेमे व बेटे यतींद्र को पद दिया जा सकता है।

वैसे कांग्रेस के भीतर इस खींचतान को 2026 में राज्य की सत्ता-संतुलन की बड़ी राजनीतिक परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। आलाकमान सभी गुटों को साधने की कोशिश में है ताकि विवाद न बढ़े और कर्नाटक सरकार में स्थिरता बनी रहे, खासकर आगामी चुनावी रणनीति को देखते हुए।

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