
पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू और पीएम मोदी। (फोटो- X/ANI)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका से विश्व हिंदू प्रवासियों ने पत्र लिखा है। जिसमें 1950 में पाकिस्तान के साथ हुए एक समझौते का जिक्र है। दरअसल, विश्व हिंदू प्रवासियों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ बढ़ रही हिंसा को लेकर आवाज बुलंद किया है।
उन्होंने पीएम मोदी और उनके सलाहकारों से बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर तुरंत एक्शन लेने की अपील की है। उन्होंने अपने पत्र में हत्याओं, भीड़ के हमलों और कथित तौर पर सरकार की तरफ से कोई एक्शन न लेने का हवाला दिया है।
पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी में वैश्विक हिंदू प्रवासियों ने कहा कि वे यह अपील बहुत दुख और जल्दबाजी के साथ कर रहे हैं। यह अपील समूहों ने एक युवा बांग्लादेशी हिंदू दीपू चंद्र दास की लिंचिंग और जिंदा जलाने और इसी तरह के कई हमलों के बाद की है।
पत्र में प्रवासी समूहों ने 1950 के लियाकत-नेहरू पैक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि 1950 में पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू ने पाकिस्तान के साथ जो समझौते किए थे, उसमें अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने का वादा किया गया था, लेकिन यह असल में विफल हो गया। बता दें कि तब बांग्लादेश पाकिस्तान का हिस्सा था। इसे पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था।
प्रवासी समूहों ने 1971 के लिबरेशन वॉर के बाद के समय की ओर भी इशारा किया। जब भारत गए कई हिंदू रिफ्यूजी को बाद में बांग्लादेश वापस भेज दिया गया था।
चिट्ठी में कहा गया- अगस्त 2025 से, हिंदुओं के खिलाफ हिंसा तेजी से बढ़ी। दिसंबर 2025 के मध्य से फैलाया गया आतंक लगातार जारी है। मनगढ़ंत ईशनिंदा के आरोपों के आधार पर लिंचिंग कोई नई बात नहीं है।
चिट्ठी में कहा गया कि बांग्लादेश में हिंदुओं को इतिहास ने बार-बार छोड़ दिया है। वैश्विक हिंदू प्रवासियों ने मौजूदा हालात को हिंदुओं का नरसंहार बताया।
उन्होंने कहा कि अगस्त 2024 से, मानवाधिकार के उल्लंघन पर स्थानीय मीडिया की रिपोर्टिंग लगभग ना के बराबर है। हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यकों को टारगेट करके गलत जानकारी वाले अभियान के बाद से मीडिया की यह चुप्पी और बढ़ गई।
चिट्ठी में इस्कॉन के वरिष्ठ संत चिन्मय कृष्ण दास के मामले का भी जिक्र किया गया, जिन्हें 25 नवंबर, 2024 से मनगढ़ंत आरोपों को लेकर जेल में रखा गया है और बार-बार जमानत देने से मना किया गया है।
चिट्ठी में यह भी बताया गया गया कि अगस्त 2024 और जून 2025 के बीच अल्पसंख्यकों पर 2,442 से ज्यादा हमले हुए और इनमें ज्यादातर हिंदू थे। इस दौरान दर्जनों अल्पसंख्यक हिंदुओं की हत्याएं भी हुईं।
समूह ने कहा कि अकेले अगस्त और नवंबर 2024 के बीच 82 लोग मारे गए। इसके साथ ही रेप, मंदिर में तोड़फोड़ और भीड़ द्वारा आग लगाने की घटनाएं भी सामने आईं।
समूह ने कहा कि पिछले कुछ में बांग्लादेश में हालात और खराब हो गए हैं। बीते 35 दिनों में लिंचिंग, शूटिंग और भीड़ के हमलों में 11 हिंदू मारे गए हैं।
विश्व हिंदू प्रवासियों ने भारत से हमलों की सबके सामने निंदा करने की अपील की। इसके साथ ही नई दिल्ली से यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में उठाने और कट्टरपंथी समूहों पर राजनयिक और आर्थिक दबाव डालने की भी अपील की।
Updated on:
11 Jan 2026 11:40 am
Published on:
11 Jan 2026 11:39 am
बड़ी खबरें
View Allराष्ट्रीय
ट्रेंडिंग
