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भारत, May 04, 2026

एलन मस्क के रॉकेट से भारत का कमाल, ‘दृष्टि’ मिशन से भारत ने रचा नया इतिहास

Drishti satellite Mission: भारतीय स्पेस कंपनी ने एलन मस्क के रॉकेट से अंतरिक्ष भेजा दुनिया का पहला 'ऑप्टोसार' सैटेलाइट।

Drishti satellite Mission

सर्कल में स्पेस X कंपनी के मालिक एलन मस्क और ‘दृष्टि’ मिशन लांच की तस्वीर (सोर्स: ANI)

Space-X Launch Satellite India: भारत में एक प्राइवेट स्पेस कंपनी गैलेक्सीआई ने अपना पहला कमर्शियल सैटेलाइट 'दृष्टि' रविवार को अंतरिक्ष में लॉन्च किया है। इसे एलन मस्क की कंपनी के फॉल्टन 9 रॉकेट के जरिए भेजा गया है। कंपनी का कहना है कि यह दुनिया का पहला 'ऑप्टोसार सैटेलाइट' (कैमरा और रडार) है। 190 किलो वजनी यह सैटेलाइट भारत का अब तक का सबसे बड़ा निजी तौर पर बनाया गया 'अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट' है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें एक ही प्लेटफॉर्म पर इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल (ईओ) और सिंथेटिक एपर्चर रडार (एसएआर) दोनों तकनीकें साथ में दी गई हैं। इसलिए यह बादल, बारिश, धुंध या अंधेरे में भी देख सकता है।

इस सैटेलाइट की उपयोगिता

इस सैटेलाइट का सीमा सुरक्षा, डिफेंस मॉनिटरिंग, आपदा प्रबंधन, खेती, इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग, बीमा जैसे कई कामों में उपयोग किया जाएगा। जब बादलों की वजह से सामान्य सैटेलाइट काम नहीं करते, तब भी यह रडार की मदद से लगातार जानकारी देता रहेगा।

अंतरिक्ष में ही डेटा प्रोसेसिंग

इस सैटेलाइट में खास फीचर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी है, जो 'एनवीडिया जेटसन ओरिन' प्लेटफॉर्म पर चलता है। इसका मतलब है कि सैटेलाइट को हर डेटा जमीन पर भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि कुछ प्रोसेसिंग अंतरिक्ष में ही हो जाएगी, जिससे जानकारी जल्दी मिल सकेगी और तुरंत फैसले लेने में मदद होगी।

फ्रिज के आकार का है सैटेलाइट

दृष्टि लगभग 1.5 मीटर तक की डिटेल वाली तस्वीरें दे सकता है और पूरी दुनिया के किसी भी इलाके की तस्वीर 7 से 10 दिन के अंदर दोबारा ले सकता है। इसका आकार लगभग एक छोटे फ्रिज जितना है और इसमें करीब साढ़े तीन मीटर लंबा एंटीना भी लगा है।

अंतरिक्ष में बनेगा पूरा नेटवर्क

कंपनी ने लॉन्च से पहले करीब 500 बार ड्रोन, सेसना विमान और हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म के जरिए टेस्ट किया। अब इस प्रोजेक्ट में डिफेंस और सिविल दोनों क्षेत्र की एजेंसियों अपनी दिलचस्पी दिखा रही है और इसका उपयोग करना चाहती है। कंपनी अगले चार साल में 8 से 12 सैटेलाइट्स का पूरा नेटवर्क बनाने की योजना पर काम कर रही है।

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