भारत, Jun 03, 2026

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल और नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह। (Photo- IANS)
India Nepal border dispute: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के कथित सीमा विवाद पर दिए बयान पर भारत ने मंगलवार को कहा कि यह मुद्दा द्विपक्षीय है। इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है। दोनों देशों के बीच पहले से द्विपक्षीय तंत्र मौजूद है। दरअसल, बालेन ने ब्रिटेन से मध्यस्थता की मांग की थी। उनका तर्क था कि विवाद की जड़ 1816 की सुगौली संधि है, जिसका ब्रिटेन पक्षकार था। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस पर कहा कि 98% सीमा का सीमांकन हो चुका है। गंडक नदी के मार्ग में समय के साथ हुए बदलाव के कारण कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में समस्याएं पैदा हुई हैं। सीमापार अतिक्रमण और नो मैन्स लैंड पर कब्जे के कुछ मामले सामने आए हैं। इन क्षेत्रों का दोनों देशों द्वारा संयुक्त रूप से मानचित्रण किया जा रहा है।
भारतीय विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया रविवार को आई, जब नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने दावा किया कि भारत ने नेपाल की भूमि पर अतिक्रमण किया है। हालांकि उन्होंने इस दावे को लेकर किसी भी तरह के स्पष्ट भौगोलिक विवरण साझा नहीं किए कि यह कथित अतिक्रमण किन क्षेत्रों में हुआ है।
शाह ने यह बयान स्थानीय सांसदों के सवालों के जवाब में दिया, जिन्होंने भारत द्वारा लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी जैसे विवादित क्षेत्रों पर कथित नियंत्रण को लेकर सवाल उठाए थे। ये क्षेत्र लंबे समय से भारत और नेपाल के बीच विवाद का विषय रहे हैं, हालांकि इन पर वर्तमान में प्रभावी नियंत्रण भारत का है।
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा कि पद संभालने के बाद उन्हें यह जानकारी मिली कि केवल भारत ही नहीं, बल्कि नेपाल ने भी कुछ स्थानों पर भारतीय भूमि पर कथित रूप से अतिक्रमण किया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को मिलकर इस पूरे मामले की जांच करनी चाहिए।
बालेन शाह ने यह भी बताया कि नेपाल ने सीमा विवाद को लेकर भारत के साथ-साथ चीन और यूनाइटेड किंगडम से भी राजनयिक बातचीत की है। उनके अनुसार, यह पहली बार है जब नेपाल ने सार्वजनिक रूप से ब्रिटेन की भूमिका का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि यह विवाद ऐतिहासिक है और इसकी जड़ें उस समय से जुड़ी हैं जब भारतीय उपमहाद्वीप पर ब्रिटिश शासन था, इसलिए इस मुद्दे में ब्रिटेन की भी भूमिका मानी जानी चाहिए।
पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर का जिक्र करने पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत के आंतरिक मामलों पर ऐसी टिप्पणियां पूरी तरह अनुचित हैं। उन्हें सिरे से खारिज किया जाता है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न हिस्से हैं।
Published on: 03 Jun 2026 03:16 am

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