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‘मुहर लाओ, फिर बात करो!’ अडानी केस में भारत का सख्त रुख, अमेरिकी रेगुलेटर के दस्तावेजों को कूड़ेदान में डाला

Adani-SEC controversy: भारत के विधि मंत्रालय ने अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (US SEC) द्वारा जारी समन को गौतम अदानी और उनके भतीजे सागर अदानी को औपचारिक रूप से तामील करने से दो बार इनकार कर दिया। पहला इनकार मई 2025 में और दूसरा दिसंबर 2025 में हुआ। मुख्य कारण: कवर लेटर पर स्याही से […]

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Adani

गौतम अदानी

Adani-SEC controversy: भारत के विधि मंत्रालय ने अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (US SEC) द्वारा जारी समन को गौतम अदानी और उनके भतीजे सागर अदानी को औपचारिक रूप से तामील करने से दो बार इनकार कर दिया। पहला इनकार मई 2025 में और दूसरा दिसंबर 2025 में हुआ। मुख्य कारण: कवर लेटर पर स्याही से हस्ताक्षर की कमी, आधिकारिक सील न होना और दस्तावेजों की प्रामाणिकता सत्यापित न हो पाना। इससे SEC को न्यूयॉर्क की संघीय अदालत से ईमेल के जरिए समन भेजने की अनुमति मांगनी पड़ी।

SEC की जांच का पूरा मामला

SEC ने नवंबर 2024 में शिकायत दायर की थी, जिसमें आरोप है कि गौतम अदानी और सागर अदानी ने Adani Green Energy Ltd के सितंबर 2021 के ऋण प्रस्ताव में संघीय प्रतिभूति कानूनों के एंटी-फ्रॉड प्रावधानों का उल्लंघन किया। इसमें झूठे और भ्रामक बयान दिए गए। यह मामला अमेरिकी न्याय विभाग की रिश्वत संबंधी आपराधिक जांच से जुड़ा है, जिसके बाद अदानी ग्रुप ने 600 मिलियन डॉलर का बॉन्ड ऑफर वापस ले लिया था। SEC की यह सिविल जांच है, जिसमें फ्रॉड के आरोप हैं। फरवरी 2025 में SEC ने हेग कन्वेंशन के तहत भारत से सहायता मांगी थी।

मंत्रालय की आपत्तियां और SEC का जवाब

मई 2025 में मंत्रालय ने कहा, 'फॉरवर्डिंग लेटर पर सील और हस्ताक्षर नहीं हैं, इसलिए प्रामाणिकता सत्यापित नहीं हो सकती।' दिसंबर 2025 में दूसरा इनकार SEC के आंतरिक नियम 5(b) (17 C.F.R. § 202.5(b)) का हवाला देकर किया गया, क्योंकि समन SEC के प्रवर्तन उपकरणों में शामिल नहीं था। SEC ने तर्क दिया कि हेग कन्वेंशन प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है, न कि SEC के नियम। SEC ने अदालत में कहा, 'मंत्रालय की स्थिति से हेग कन्वेंशन के जरिए सेवा पूरी होने की उम्मीद नहीं।'

अदानी ग्रुप का पक्ष और बाजार पर असर

Adani Green Energy ने स्टॉक एक्सचेंज को बताया, कंपनी इस कार्यवाही की पक्षकार नहीं है और कोई आरोप नहीं लगाए गए। यह सिविल प्रकृति का मामला है। ग्रुप ने आरोपों को आधारहीन बताया और सभी कानूनी विकल्प अपनाने की बात कही। गौतम अदानी ने Kirkland & Ellis LLP और Quinn Emanuel Urquhart & Sullivan LLP को हायर किया है, जबकि सागर अदानी ने Hecker Fink LLP को। इस खबर से अदानी ग्रुप की कंपनियों के शेयर 3.3% से 14.6% तक गिरे, जिससे बाजार पूंजीकरण में करीब ₹1 लाख करोड़ का नुकसान हुआ।

अंतरराष्ट्रीय कानूनी सहयोग में चुनौती

यह घटना हेग कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय कानूनी सहयोग में तकनीकी और प्रक्रियागत बाधाओं को उजागर करती है। भारत सरकार ने प्रक्रिया का सख्ती से पालन किया, जबकि SEC अब अदालत के हस्तक्षेप से बायपास करने की कोशिश में है। यह मामला अदानी ग्रुप की वैश्विक छवि और भारत-अमेरिका संबंधों पर असर डाल सकता है, खासकर जब आपराधिक और सिविल जांचें साथ चल रही हैं।

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