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बांग्लादेश से भारत रिश्ते सुधारने को दे रहा प्राथमिकता? तारिक को जीत का संदेश भेजने वाले पहले नेता थे PM मोदी

भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्ते सुधारने की कोशिश तेज होती दिख रही है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों देश अलग-अलग मामलों को सुलझाने में जुटे हुए हैं।

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बांग्लादेश के नए पीएम बनने जा रहे तारिक रहमान और पीएम मोदी। (फोटो- ANI)

बांग्लादेश में आम चुनाव शांतिपूर्ण रूप से संपंन्न हो गया। बड़े स्तर पर हिंसा की कहीं से खबरें सामने नहीं आई। इस चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी को बंपर जीत मिली। 299 सीटों वाली जातीय संसद में BNP गठबंधन को 212 सीटें मिली। BNP को अकेले 209 सीटें मिली। BNP नेता तारिक रहमान अब देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे। वह 17 फरवरी को पद की शपथ लेंगे।

तारिक की जीत के बाद पीएम मोदी को बधाई

बांग्लादेश ने तारिक रहमान के शपथ ग्रहण के लिए 13 देशों को निमंत्रण भेजा है। इसमें भारत भी शामिल हैं। वहीं, तारिक की जीत के बाद पीएम मोदी पहले नेता थे, जिन्होंने तारिक रहमान और BNP को जीत की बधाई दी थी। पीएम मोदी और तारिक रहमान की बातचीत को भारत-बांग्लादेश के रिश्तों को फिर पटरी पर लौटने की दिशा वाला माना जा रहा है। दरअसल, भारत पड़ोसी देश से रिश्ते सुधारने के लिए उत्सुकता दिखा रहा है। इसकी कई वजहें भी हैं।

बांग्लादेश-भारत रिश्ते को पटरी पर लाने में जुटे

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत, बांग्लादेश की नई सरकार के साथ अपने कूटनीतिक रिश्तों को अलग-अलग मुद्दे पर अलग-अलग नजरिये से देखेगी। वहीं, जीत के बाद BNP नेता तारिक रहमान के एडवाइजर हुमायूं कबीर ने कहा कि हम भारत के साथ रिश्तों को ठीक करना चाहते हैं।

खालिदा के वक्त रिश्तों में नहीं थी गर्माहट

साल 2001 से 2006 तक जब बांग्लादेश में BNP की सरकार थी। खालिदा जिया प्रधानमंत्री थी। उस दौरान भी भारत संग बांग्लादेश के रिश्ते मैत्रीपूर्ण नहीं थे। ढाका में राजनायिक रहे पूर्व IFS अधिकारी पिनाक रंजन चक्रवर्ती ने कहा कि बांग्लादेश की पूर्व PM शेख हसीना, जो अभी भारत में निर्वासित जीवन जी रही हैं। वह भारत और BNP के संपर्क को लेकर बहुत सेंसिटिव थी। चक्रवर्ती ने कहा कि तख्तापलट के बाद BNP भारत के लिए अपने सुरक्षा हितों और आर्थिक दांव की सुरक्षा के लिए 'साफ' पसंद बनकर उभरी है।

रहमान ने भारत विरोधी बयानबाजी से किया परहेज

चक्रवर्ती ने आगे कहा कि रहमान के हालिया बयान से भी रिश्तों पर जमीं बर्फ पिघलने के आसार भी दिखने लगे हैं। रहमान ने भारत विरोधी बयानबाजी से पूरी तरह परहेज किया है। इसका सकारात्मक असर भी देखने को मिला। पीएम नें उन्हें जीत की बधाई दी।

भारत सरकार साल 2024 में बांग्लादेश में हसीना सरकार के गिरने के बाद लगातार अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे हमले से चिंतित थी। अब रहमान के नेतृत्व में नई दिल्ली एक स्थिर पड़ोसी देश चाहती है, ताकि उसके पूर्वोत्तर राज्य में शांति कायम रहे। भारत का पहला इंटरेस्ट हिस्टोरिकल पॉलिटिकल लॉयल्टी से हटकर माइनॉरिटी राइट्स और रीजनल सिक्योरिटी की तुरंत सुरक्षा में बदल गया है।

क्या पीएम मोदी शपथ ग्रहण में होंगे शामिल

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संभवत तारिक रहमान के शपथ ग्रहण में शामिल न हो पाएं, क्योंकि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों AI इम्पैक्ट समिट के लिए भारत में होंगे। साथ ही, राफेल डील को लेकर भी दोनों देशों के बीच बड़ी बातचीत हो सकती है। लिहाजा, भारत सरकार विदेश मंत्री एस जयशंकर या फिर केंद्रीय मंत्रिमंडल से किसी बड़े नेता को भेज सकती है।