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Crude Oil Crisis: ईरान संकट से भारत में तेल-गैस की भारी किल्लत, सरकार ने खोले जमीन के नीचे बने ‘सीक्रेट रिजर्व’

Emergency: ईरान विवाद के कारण भारत में कच्चे तेल और एलपीजी गैस की भारी किल्लत हो गई है। हालात से निपटने के लिए सरकार ने अंडरग्राउंड गुफाओं में जमा इमरजेंसी कच्चे तेल (Strategic Petroleum Reserves) का भंडार खोल दिया है।

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भारत

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MI Zahir

Mar 12, 2026

Oil supply in India

Oil supply in India (Photo - AI Generated)

Middle East : ईरान और मध्य पूर्व (Middle East) में जंग का सीधा असर अब भारत की रसोई और सड़कों पर दिखने लगा है। देश के कई हिस्सों में एलपीजी (LPG) गैस और कच्चे तेल (Crude Oil) की अचानक भारी किल्लत (India Crude Oil Shortage) पैदा हो गई है। वैश्विक सप्लाई चेन के बुरी तरह बाधित होने से देश में ऊर्जा संकट गहरा गया है। लेकिन, इस आपात स्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार ने अपना मास्टरस्ट्रोक चल दिया है और देश को संकट से उबारने के लिए जमीन के नीचे बनी विशाल 'गुफाओं' (Underground Caves) का दरवाजा खोल दिया है।

पाताल में छिपा है भारत का 'इमरजेंसी खजाना' (Underground Cave Reserves)

दरअसल, खाड़ी देशों में युद्ध जैसे हालात के बीच कच्चे तेल का आयात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। आम जनता को पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कमी न हो, इसके लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने भारत के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (Strategic Petroleum Reserves - SPR) से तेल निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ये रिजर्व विशाखापट्टनम (आंध्र प्रदेश), मंगलुरु और पाडुर (कर्नाटक) में जमीन के काफी नीचे चट्टानों को काट कर बनाई गई विशालकाय गुफाएं हैं।

कितने दिन का है बैकअप ? (Strategic Petroleum Reserve)

इन अंडरग्राउंड गुफाओं में भारत ने लाखों मीट्रिक टन कच्चा तेल सिर्फ इसी तरह के आपातकालों (Emergency) के लिए सुरक्षित रखा था। विशेषज्ञों के अनुसार, यह रिजर्व भारत को हफ्तों तक बिना किसी बाहरी सप्लाई के तेल और गैस की जरूरतें पूरी करने में सक्षम बनाता है। सरकार का यह कदम साफ करता है कि भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई रुक गई हो, लेकिन भारत की रणनीतिक तैयारी (Geopolitical Strategy) आम नागरिक को ईंधन संकट से बचाने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है।

सरकार के इस कदम की सराहना

ऊर्जा विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों ने सरकार के इस कदम की सराहना की है। उनका मानना है कि दशकों पहले जो स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व बनाने का विजन रखा गया था, वह आज इस बड़े संकट में देश की ढाल बन गया है। आम जनता और इंडस्ट्रियल सेक्टर ने भी राहत की सांस ली है, क्योंकि अगर यह रिजर्व नहीं खोला जाता, तो देश में हाहाकार मच सकता था और पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ आवश्यक वस्तुओं के दाम आसमान छूने लगते।

सप्लाई की मॉनिटरिंग: एक नजर

सरकार ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को निर्देश दिया है कि वे इन अंडरग्राउंड गुफाओं से रिफाइनरी तक तेल पहुंचाने की प्रक्रिया को फास्ट-ट्रैक करें।

नई गुफाओं का निर्माण

इस संकट ने साबित कर दिया है कि भारत को ऐसे और रिजर्व चाहिए। अब ओडिशा के चंडीखोल और राजस्थान के बीकानेर में प्रस्तावित नए स्ट्रैटेजिक रिजर्व के निर्माण कार्य में तेजी लाई जा सकती है।

राशनिंग की संभावना

अगर ईरान विवाद लंबा खिंचता है, तो आने वाले दिनों में व्यावसायिक (Commercial) गैस और तेल के उपयोग पर कुछ नियम या सीमाएं (Rationing) लगाई जा सकती हैं।

भारत तेल के लिए मध्य पूर्व पर अपनी निर्भरता कम करने के दबाव में

इस पूरी घटना का एक बड़ा आर्थिक और कूटनीतिक 'साइड एंगल' यह है कि भारत अब तेल के लिए मध्य पूर्व पर अपनी निर्भरता कम करने के दबाव में है। यह किल्लत देश को तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और सौर ऊर्जा (Solar Energy) की तरफ धकेल रही है। इसके साथ ही, रूस और दक्षिण अमेरिकी देशों के साथ तेल आयात के नए और सुरक्षित व्यापारिक समझौते करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बातचीत और तेज हो गई है।