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नई दिल्ली, Jun 01, 2026

Dharmendra Pradhan Removal:क्या धर्मेंद्र प्रधान को हटाएंगे नरेंद्र मोदी? कांग्रेस बार-बार कर रही मांग

धर्मेंद्र प्रधान के मंत्रालय की वजह से मोदी सरकार की काफी बदनामी हो रही है। इस वजह से सरकार दबाव में है। ऐसे में नरेंद्र मोदी, धर्मेंद्र प्रधान को हटाएंगे या शिक्षा मंत्री बनाए रख कर विपक्ष के दबाव के सामने नहीं झुकने का संदेश देंगे? यह सवाल आजकल गरम है।

Dharmendra Pradhan, Education minister Pradhan will be removed

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (ANI)

इस बात की पूरी संभावना है कि इस महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी कैबिनेट में फेरबदल करें। हो सकता है कि इसके बाद कई 'सेवक' (मंत्री) 'सेवा तीर्थ' (प्रधानमंत्री कार्यालय) से बाहर हो जाएं और उनकी जगह दूसरे लोग आएं। इनमें से कुछ नए चेहरे भी हो सकते हैं। अटकल है कि संभवतः पहली बार नरेंद्र मोदी भाजपा युवा मोर्चा के किसी नेता को भी कैबिनेट में शामिल कर सकते हैं। करीब आधा दर्जन मौजूदा मंत्रियों का पत्ता कटने की संभावना है। क्या इनमें धर्मेंद्र प्रधान भी होंगे? राजनीतिक गलियारों में यह सवाल चर्चा में है।

धर्मेंद्र प्रधान को हटाए जाने को लेकर चर्चा क्यों है तेज?

प्रधान लंबे समय से मोदी सरकार में मंत्री हैं। इन दिनों उनके मंत्रालय की वजह से लगातार सरकार की बदनामी हो रही है। ताजा मामला नीट पेपर लीक और सीयूईटी परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़ा है। इससे पहले रैगिंग रोकने से जुड़ी यूजीसी के गाइडलाइन और एनसीईआरटी की किताबों से जुड़े विवाद में भी सरकार की खूब किरकिरी हुई थी। यूजीसी की ओर से जारी गाइडलाइन पर छिड़े विवाद के बीच भाजपा के कई कट्टर समर्थकों ने भी प्रधान को हटाने की मांग की थी, लेकिन उन पर कोई एक्शन नहीं हुआ था।

अब प्रधान को हटाए जाने को कांग्रेस ने एक मुद्दा बना लिया है। राहुल गांधी समेत कांग्रेस के तमाम नेता शिक्षा मंत्रालय पर अंगुली उठाते हुए प्रधान को हटाए जाने की मांग को लेकर ट्वीट या प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। 1 जून को भी कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक ऐसी ही प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

कांग्रेस धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ पूरी तरह हमलावर हो चुकी है।

उधर, कॉकरोच जनता पार्टी बना कर चर्चा में आए अभिषेक दिपके ने भी छह जून को प्रधान की बर्खास्तगी की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।

सरकार पर चौतरफा वार

इस समय सरकार चौतरफा घिरी हुई है। ऊर्जा संकट सरकार की परेशानी बढ़ा रहा है। पेट्रोल-डीजल-एलपीजी लगातार महंगा किया जा रहा है, जिसकी वजह से विपक्ष सरकार पर हमलावर है और जनता परेशान। हर चीज की महंगाई बढ़ रही है। पश्चिम एशिया संकट के बीच कमजोर होते रुपये की वजह से सरकार के लिए स्थिति को संभालना और कठिन होता जा रहा है। ऐसी परिस्थिति में प्रधान के मंत्रालय से जुड़ी कमियां उजागर होने या विवाद पनपने से सरकार की साख का संकट और गहरा हो रहा है।

कॉमेडियन भी पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथ ले रहे हैं:

धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री का लंबा साथ

प्रधान को पीएम मोदी ने पहली ही सरकार से मंत्रिमंडल में रखा है। 2014 में वह स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री (पेट्रोलियम मंत्रालय) बनाए गए थे। करीब नौ साल से वह कैबिनेट मंत्री हैं। उन्होंने पहले पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसा अहम मंत्रालय संभाला और 7 जुलाई, 2021 से वह शिक्षा मंत्री हैं। इसी से समझा जा सकता है कि प्रधान पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के कितने भरोसेमंद हैं। तभी उन्हें मंत्रालय के साथ कई राज्यों में बीजेपी की चुनावी जीत सुनिश्चित करने से जुड़ी भूमिकाएं भी सौंपी जाती रही हैं।

ओड़िशा में बीजेपी की पहली सरकार बनने के पीछे भी प्रधान की बड़ी भूमिका रही है। यही वजह है कि प्रधान को सरकार में भी लगातार अहम पद पर कायम रखा गया है। लेकिन, लगातार पेपर लीक होने का मुद्दा सरकार पर भारी पड़ रहा है। इसलिए संभावना है कि नरेंद्र मोदी प्रधान को कैबिनेट से मुक्त करें या फिर कोई दूसरा काम दें।

विवाद के बाद रिजिजू को हटाया था

इस समय संसदीय कार्य मंत्रालय का काम देख रहे किरण रिजिजू कभी कानून मंत्री हुआ करते थे। एक मीडिया समूह के कार्यक्रम में उन्होंने न्यायपालिका के बारे में एक बयान दे दिया था।

उनके इस बयान पर काफी विवाद हुआ था। इसके बाद रिजिजू को मंत्री पद से हटना पड़ा था। माना गया कि इस विवाद के चलते ही उन्हें कानून मंत्री की कुर्सी से हाथ धोना पड़ा।

लंबी समीक्षा बैठक कर चुके हैं पीएम

पीएम मोदी ने पिछले महीने कैबिनेट की एक लंबी बैठक की थी। बताया जाता है कि इसमें विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा हुई। अलग-अलग मानकों के आधार पर पांच सबसे अच्छा और सबसे कमजोर प्रदर्शन वाले मंत्रालयों का भी जिक्र हुआ। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है यह मीटिंग खराब रेटिंग वाले मंत्रालयों के मंत्री के लिए एक संकेत के रूप में थी।

तीसरे कार्यकाल में मंत्रिमंडल का एक भी विस्तार नहीं

नरेंद्र मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बने दो साल हो गए हैं। इस बीच उन्होंने अपने मंत्रिमंडल में कोई बड़ा फेरबदल या विस्तार नहीं किया है। मई 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने के करीब छह महीने बाद नवंबर 2014 में उन्होंने अपना पहला मंत्रिमंडल विस्तार किया था। फिर जुलाई 2016 में उन्होंने बड़ा फेरबदल किया। कई चेहरों को हटाया और कई को शामिल किया। कई के विभाग भी बदले।

पहले कार्यकाल में पीएम मोदी ने सितंबर 2017 में कैबिनेट में आखिरी फेरबदल किया था।

2019 में दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के करीब दो साल बाद (जुलाई, 2021) उन्होंने कैबिनेट में पहला और मई 2023 में आखिरी फेरबदल किया।

नरेंद्र मोदी को तीसरी बार पीएम बने दो साल हो गए हैं। ऐसे में एक और फेरबदल के कयास लगाए जा रहे हैं। इसमें संभव है कि नीतीश की पार्टी जेडीयू की भागीदारी बढ़े और कुछ नए चेहरों को भी लाया जाए। धर्मेंद्र प्रधान को बदलने का फैसला टाला भी जा सकता है। विपक्ष को संदेश देने के लिए कि प्रधानमंत्री उनकी मांगों के दबाव में नहीं आए।

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