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LAC पर चीन की बड़ी साजिश, अरुणाचल की सीमा पर बसा रहा 628 गांव

चीन LAC पर भारत के खिलाफ बड़ी साजिश रच रहा है। चीन LAC पर विवादित क्षेत्र में अरुणाचल प्रदेश की ओर 628 गांव बसा रहा है। चीन ने इन गांव को 'शियाओकांग' नाम दिया है।

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भारत

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Vinay Shakya

Mar 12, 2026

Lt. Gen Rajeev Ghai with Assam Rifles DG Vikas Lakhera

असम राइफल्स के महानिदेशक विकास लखेरा के साथ Lt. जनरल राजीव घई (फोटो- 'X' ASSAM RIFLES)

चीन LAC पर अरुणाचल प्रदेश की ओर 628 गांव बसा रहा है। इनमें से 72% गांव का निर्माण वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास पूर्वोत्तर राज्यों में किया है, जो 90% अरुणाचल प्रदेश के पास हैं। दिल्ली में बीते मंगलवार को आयोजित असम राइफल्स-USI के वार्षिक सेमिनार में भारतीय सेना के उप प्रमुख (रणनीति) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने इसकी जानकारी दी है। कार्यक्रम में लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा कि चीन की कई बस्तियां उन क्षेत्रों में हैं, जहां दोनों देशों के बीच विवाद है।

चीन के गांव भारत के लिए चुनौती

भारतीय सेना के उप प्रमुख (रणनीति) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने चीन द्वारा बसाए जा रहे गांवों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में जनरल राजीव घई ने कहा कि उत्तरी सीमाओं पर स्थित लगभग 628 गांवों की 'शियाओकांग' परियोजना का जिक्र तो करना ही नहीं चाहिए। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इन 628 गांवों में से लगभग 72% पूर्वोत्तर राज्यों में स्थित हैं। यानी लगभग 450 गांव और इनमें से लगभग 90% अरुणाचल प्रदेश राज्य के सामने हैं। यह समझना मुश्किल नहीं है कि चीने ने ऐसा क्यों है? उन्होंने आगे कहा कि चीन की ये सीमावर्ती बस्तियां निश्चित रूप से एक चुनौती हैं। ये बस्तियां बहुत तेजी से विकसित हो रही हैं। इनमें से कई बस्तियां ऐसे क्षेत्रों में हैं, जिन पर दोनों देशों के बीच विवाद है।

राजीव घई ने पूर्वोत्तर की सुरक्षा चुनौतियों पर जताई चिंता

सेना के उप प्रमुख (रणनीति) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने 'उत्तर-पूर्व में सुरक्षा चुनौतियां' विषय पर अपने विचार रखे। इस दौरान राजीव घई ने कहा कि चीन द्वारा विवादित सीमा क्षेत्र में बसाए जा रहे 628 'शियाओकांग' गांव में करीब 450 का निर्माण हो चुका है। ये गांव नागरिक विकास के रूप में विकसित किए गए हैं, लेकिन भारतीय सुरक्षा विश्लेषक इन्हें दोहरे उपयोग वाली जगह मानते हैं। इन गांव का उपयोग रसद सहायता, सैन्य गतिविधियों और सीमा पर दावों को मजबूत करने के लिए हो सकता है। ये बस्तियां LAC के साथ विवादित क्षेत्रों में चीन के दावों को मजबूत करने का माध्यम हैं।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर बढ़ रही चिंता

कार्यक्रम में सेना के अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि संकरा भूभाग लगभग 22 किलोमीटर चौड़ा और 60 किलोमीटर लंबा है। यह भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को शेष देश से जोड़ता है और रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है। चीन की सीमा पर बढ़ती गतिविधियां इस क्षेत्र की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।

LAC पर चीन-भारत के बीच विवाद

LAC पर चीन-भारत के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। भारत LAC की लंबाई 3,488 किलोमीटर मानता है, जबकि चीन का दावा है कि यह लगभग 2,000 किलोमीटर है। यही विवाद इन गांवों के निर्माण और उनके रणनीतिक महत्व को और बढ़ावा देता है। कार्यक्रम में लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई द्वारा दी गई जानकारी भारत-चीन सीमा पर बढ़ते तनाव और पूर्वोत्तर की सुरक्षा चुनौतियों के लिए चिंता का विषय है।

चीन के 'शियाओकांग' गांवों के लिए क्या है कानून?

चीन द्वारा बसाए जा रहा 'शियाओकांग' गांवों के लिए चीनी भूमि सीमाओं पर एक नया कानून 1 जनवरी 2022 से लागू हो गया है। यह कानून 2021 में चीन की राष्ट्रीय जन कांग्रेस की स्थायी समिति द्वारा देश के भूमि सीमा क्षेत्रों के संरक्षण और उपयोग के लिए पारित किया गया था।

चीन की आधिकारिक समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, इस कानून में प्रावधान है कि राज्य सीमा रक्षा को मजबूत करने, सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक और सामाजिक विकास के साथ-साथ खुलेपन का समर्थन करने को संरक्षण देता है। इसके साथ ही यह कानून ऐसे क्षेत्रों में सार्वजनिक सेवाओं और बुनियादी ढांचे में सुधार करने, वहां के लोगों को प्रोत्साहित-समर्थन करने और सीमा सीमा रक्षा तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास के बीच समन्वय को बढ़ावा देने के लिए उपाय करेगा।