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CEC Gyanesh Kumar impeachment notice: ज्ञानेश कुमार पर 7 आरोप, 193 सांसदों ने किए हस्ताक्षर, CEC को हटाने के लिए 10 पन्ने का विपक्ष ने दिया नोटिस

opposition move against CEC: सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का बड़ा कदम। लोकसभा और राज्यसभा में महाभियोग नोटिस देकर हटाने की मांग, चुनाव से पहले बढ़ा राजनीतिक विवाद।

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CEC Gyanesh Kumar (Photo-IANS)

CEC Gyanesh Kumar (Photo-IANS)

impeachment process against CEC India: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद अब विपक्षी दलाें ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की टीएमसी की अगुवाई में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने (महाभियोग) के लिए राज्यसभा और लोकसभा को नोटिस दिया है। करीब 10 पेजों के नोटिस में 7 बिंदुवार आरोप लगाए गए हैं। विपक्ष के इस प्रस्ताव को दोनों सदनों में एक साथ पेश किया जा सकता है।

राजनीतिक प्रेक्षकों और विशेषज्ञाें के अनुसार दोनों ही सदनों में विपक्ष के पास प्रस्ताव पारित कराने के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं है, लेकिन पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले इस तरह का प्रस्ताव नैरेटिव सेट करने और राजनीतिक संदेश देने की रणनीति दिख रही है।

दरअसल, देश में पहली बार किसी सीईसी को हटाने के लिए इस तरह का प्रस्ताव रखा गया है। लोकसभा के 130 सांसदों और राज्यसभा के 63 सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। नियमों के अनुसार, सीईसी को हटाने के लिए नोटिस पर लोकसभा के कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा के 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। नोटिस पर इंडिया ब्लॉक में शामिल कांग्रेस, टीएमसी, सपा, डीएमके के साथ ब्लॉक से बाहर हो चुकी आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी हस्ताक्षर किए हैं।

स्पीकर-सभापति को लेना है नोटिस पर निर्णय, स्वीकार होने पर कमेटी

सीईसी को हटाने के नोटिस को स्वीकार करना या नहीं करने का अधिकार लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा में सभापति सीपी राधाकृष्णन के पास है। नोटिस स्वीकृत होने की स्थिति में सीईसी पर लगे आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई जाएगी जिसमें सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस या उनका नामित साथी जज, एक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तथा एक प्रमुख न्यायविद शामिल होंगे। जांच कमेटी की रिपोर्ट संसद में पेश होगी। यदि रिपोर्ट में सीईसी पर लगाए आरोप सही पाए जाते हैं उस पर संसद में बहस के बाद महाभियोग प्रस्ताव पर वोटिंग होगी। आरोप गलत होने पर मामला वहीं समाप्त हो जाएगा।

महाभियोग जैसी प्रक्रिया

संविधान के अनुच्छेद 324 (5) में सीईसी को पद से हटाने का प्रावधान है। इसके मुताबिक सीईसी को पद से हटाने के लिए वैसी ही प्रक्रिया अपनाई जाएगी जो सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को हटाने (महाभियोग) की होती है। उन्हें सिद्ध कदाचार या कार्य निष्पादन में अक्षमता पर ही हटाया जा सकता है। नियम के मुताबिक दोनों सदनों में विशेष बहुमत (सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत) से प्रस्ताव पारित होने पर ही राष्ट्रपति को सीईसी को पद से हटाने सिफारिश की जा सकती है। इस पर संसद में बहस के दौरान सीईसी को भी अपना पक्ष रखने का मौका हाेगा।

ये लगाए प्रमुख आरोप

  • पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण
  • चुनावी धोखाधड़ी की जांच में जानबूझकर बाधा डालना
  • बड़े पैमाने पर मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करना
  • एसआईआर के जरिए वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जाने की साजिश
  • केंद्र में सत्तारूढ़ दल को लाभ पहुंचाने की कोशिश
  • टीएमसी से दुर्व्यवहार

एसआईआर से चर्चित, जनवरी 2029 तक सीईसी रहेंगे ज्ञानेश

केरल कैडर के 1988 बैच के आईएएस अधिकारी रहे ज्ञानेश कुमार मार्च 2024 में चुनाव आयुक्त और 19 फरवरी 2025 को मुख्य चुनाव आयुक्त बने थे। विभिन्न राज्यों में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को लेकर ज्ञानेश काफी चर्चा में और विपक्ष के निशाने पर हैं। सीईसी के रूप में उनका कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक है।