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वर्कप्लेस पर पत्नी का अपमान और चरित्र हनन है ‘गंभीर मानसिक क्रूरता’, कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

क्या पति का पत्नी के ऑफिस जाकर उसे बदनाम करना तलाक का आधार हो सकता है? कलकत्ता हाईकोर्ट ने इसे 'गंभीर मानसिक क्रूरता' करार देते हुए सुनाया ऐतिहासिक फैसला। जानें कामकाजी महिलाओं के हक में कोर्ट की बड़ी टिप्पणी।

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प्रतीकात्मक फोटो

Marital Dispute: कलकत्ता हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से संबंधित एक मामले में अहम फैसला दिया है कि यदि कोई पति अपनी पत्नी को उसके वर्कप्लेस पर बदनाम करता है, उसकी चारित्रिक पवित्रता पर सवाल उठाता है और सहकर्मियों के सामने उसे गाली देता है, तो यह मानसिक क्रूरता है। इस क्रूरता के आधार पर शादी खत्म की जा सकती है। जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और जस्टिस सुप्रतिम भट्टाचार्य की बेंच ने फैमिली काेर्ट के फैसले के खिलाफ पत्नी की तलाक की अपील मंजूर करते हुए यह आदेश दिया। बेंच ने कहा कि पत्नी को उसके वर्कप्लेस पर बदनाम करने की कोशिशें मानसिक क्रूरता का सबसे गंभीर रूप हैं।

प्रोफेशनल गरिमा किसी व्यक्ति की पहचान का एक जरूरी हिस्सा होती है। किसी जीवनसाथी द्वारा सार्वजनिक अपमान, चरित्र हनन और पेशेवर बदनामी किसी व्यक्ति की गरिमा और मानसिक शांति पर सीधा हमला है। प्रोफेशनल माहौल में जीवनसाथी को अपमानित करने का मनोवैज्ञानिक असर बहुत गहरा होता है। इसे मामूली वैवाहिक कलह कहकर नजर अंदाज नहीं किया जा सकता।

पड़ोसी पर नहीं चल सकता दहेज का मामला

कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दहेज उत्पीड़न के मामलों में पड़ोसियों को मनमाने ढंग से आरोपी नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले में बेंगलुरु की एक महिला के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

जस्टिस एम.नागप्रसन्ना ने कहा कि IPC की धारा 498ए के तहत पति, पत्नी या उनके परिवार के सदस्यों के बीच के अपराधों में किसी अजनबी को शामिल नहीं किया जा सकता। परिवादी ने पति व उसके परिवार के सदस्यों के साथ पड़ोसी महिला पर उत्पीड़न के लिए उकसाने का आरोप लगाया था।


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