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अजित पवार ने मौत से दो हफ्ते पहले किया था दावा- बीजेपी के 110 करोड़ के भ्रष्टाचार की फ़ाइल मेरे पास

Ajit Pawar corruption allegations: अजित पवार पर भी भ्रष्टाचार के कई आरोप थे। अजित पवार पर सिंचाई घोटाले का भी आरोप था।

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विमान हादसे में अजीत पवार की हुई मौत (Photo-IANS)

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार का 28 जनवरी को विमान हादसे में निधन हो गया। मौत से करीब दो हफ्ता पहले उन्होंने 1999 की भाजपा-शिवसेना सरकार पर घोटाले का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि वह फ़ाइल अभी भी उनके पास है। भाजपा ने इसे पवार का 'उचित बर्ताव नहीं' बता कर हैरानी जताई थी। लेकिन, अब उनकी मौत के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग उस आरोप की चर्चा कर रहे हैं।

क्या बीजेपी-एनसीपी में चल रही थी खटपट?

अजित पवार ने 13 जनवरी को कहा था कि 1999 में 'पार्टी फंड' के लिए एक सिंचाई परियोजना की लागत सौ करोड़ रुपये बढ़ा कर पेश की गई थी। उन्होंने कहा- पुरंदार लिफ्ट सिंचाई योजना की फ़ाइल 1999 में मेरे पास आई तो यह 330 करोड़ रुपये की योजना बताई गई थी। मैंने फ़ाइल खारिज कर दी। परियोजना पर आने वाले खर्च का पता लगवाया तो पता चला कि यह 220 करोड़ रुपये में पूरी हो सकती है। यह भी पता चला कि अनुमानित खर्च में सौ करोड़ पार्टी फ़ंड के नाम पर और दस करोड़ संबन्धित अफसरों के लिए जोड़े गए थे। पवार ने यह भी कहा था कि वह फ़ाइल अभी भी उनके पास है।

1995 से 1999 के बीच महाराष्ट्र में भाजपा और अविभाजित शिवसेना की सरकार थी। 1999 में ही कांग्रेस-एनसीपी की सरकार सत्ता में आई थी। बीजेपी-शिवसेना सरकार में भाजपा के एकनाथ खड्से सिंचाई मंत्री थे। खड्से ने पवार के आरोपों को नकारते हुए कहा था कि वह खुद सिंचाई विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं और इससे ध्यान हटाने के लिए इस तरह की बातें कर रहे हैं।

अजित पवार पर भी थे भ्रष्टाचार के आरोप

बता दें कि खुद अजित पवार पर भी भ्रष्टाचार के कई आरोप थे। अजित पवार पर सिंचाई घोटाले का भी आरोप था। नवम्बर, 2018 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के तत्कालीन डीजीपी संजय बरवे ने एक हलफनामे में कहा था कि अजित पवार ने सिंचाई परियोजनाओं के ठेके देने में दखलअंदाजी की थी। हालांकि, एसीबी ने उन्हें किसी मामले में आरोपी नहीं बनाया था।

नवम्बर, 2019 में एसीबी ने नौ ऐसे मामले में जांच बंद कर केस खत्म करने की सिफ़ारिश की थी। हालांकि, तब के एसीबी चीफ परम बीर सिंह का कहना था कि इनमें से कोई भी केस अजित पवार (विदर्भ सिंचाई विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष) से संबन्धित नहीं है। 2019 में एसीबी ने बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ में यह भी कहा कि किसी भी मामले में पवार से जुड़ी कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई।

वैसे पवार ने जिस बीजेपी-शिवसेना सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया उसके मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस थे। जब पवार से उनकी दोस्ती नहीं थी, तब फड़नवीस ने भी पवार को भ्रष्टाचारी बताया था और कहा था कि भाजपा की सरकार आएगी तो अजित पवार जेल में चक्की पीसते हुए नजर आएंगे।

लेकिन, बाद में फड़नवीस ने पवार को डिप्टी सीएम की कुर्सी दे दी और साथ में एक दिन मुख्यमंत्री बनने की शुभकामना भी।