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Ahmedabad Plane Crash: एयर इंडिया का समझौता संदेहास्पद, पीड़ित परिवारों के वकील ने नहीं मानने की दी सलाह

AI-171 विमान हादसे के बाद एयर इंडिया के अंतिम मुआवजा प्रस्ताव पर विवाद गहरा गया है। वकील ने परिवारों को एआईपी डेटा आने तक समझौते पर हस्ताक्षर न करने की सलाह दी है।

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भारत

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Himadri Joshi

Feb 14, 2026

Air India Plane Crash (Photo-IANS)

पिछले वर्ष अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया फ्लाइट AI-171 हादसे ने देश को गहरे शोक में डाल दिया था। इस दुर्घटना में 260 लोगों की जान गई थी, जिनमें यात्री, क्रू सदस्य और जमीन पर मौजूद लोग शामिल थे। अब इस मामले में अंतिम मुआवजा समझौते को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पीड़ित परिवारों का प्रतिनिधित्व कर रहे अटॉर्नी चक एन चियोनुमा ने परिवारों को प्रस्तावित समझौते पर हस्ताक्षर न करने और एआईपी डेटा जारी होने तक इंतजार करने की सलाह दी है।

पीड़ित परिवारों का प्रतिनिधित्व कर रहे है चियोनुमा

चियोनुमा जो कि 105 से अधिक पीड़ित परिवारों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, ने कहा कि जांच पूरी हुए बिना किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करना उचित नहीं है। उससे पहले यह साफ नहीं हो पाएगा की आपका असल नुकसान कितना हुआ है और उसके बदले में जो मुआवजा आपको दिया जा रहा है वह सही है या नहीं। उनका कहना है कि प्रस्तावित दस्तावेज में परिवारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे एयर इंडिया और उससे जुड़ी सभी संस्थाओं को वर्तमान और भविष्य की सभी देनदारियों से मुक्त कर दें।

एआईपी डेटा सामने आने के बाद ही करे समझौता

चियोनुमा के आगे कहा, यह समझौता उन सभी देशों और राज्यों में लागू होगा जहां भी कोई केस दर्ज किया जाएगा। इतना ही नहीं, इसमें परिवारों को कंपनियों को हर संभावित दावे से सुरक्षित रखने यानी इंडेम्निफाई करने की भी शर्त शामिल है। चियोनुमा ने इसे एकतरफा और व्यापक बताते हुए कहा कि एआईपी डेटा सामने आने के बाद ही वास्तविक नुकसान और जिम्मेदार पक्षों का आकलन संभव होगा। चियोनुमा ने बताया कि कुछ पीड़ित परिवारों को पहले ही समझौते का प्रस्ताव मिल चुका है, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार न करने की सलाह दी है।

इस समझौते की शर्तें संदेहास्पद

चियोनुमा ने कहा, एयर इंडिया ने जो शर्तें रखी है वह संदेहास्पद है। अगर पीड़ित परिवार इस समझौते पर साइन करते है तो भविष्य में वह कभी एयर इंडिया पर केस नहीं कर पाएंगे। हैरानी की बात यह है कि यह समझौता न केवल एयर इंडिया को बल्कि हवाई जहाज और कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियों के साथ-साथ सरकारी संस्थाओं को भी हर तरह की कानूनी जिम्मेदारी से फ्री कर देगा। ऐसे में भविष्य में कोई गलती सामने आने पर भी परिवार दावा नहीं कर पाएंगे। साथ ही अगर भविष्य में कोई एयर इंडिया पर दावा करता है तो उसकी जिम्मेदारी भी पीड़ित परिवारों को ही उठानी पड़ सकती है। इन्हीं शर्तों के चलते चियोनुमा ने समझौता साइन न करने की सलाह दी है।

कंपनी ने दी सफाई

दूसरी ओर एयर इंडिया ने बयान जारी कर कहा है कि कोई भी धनराशि अपनों की क्षति की भरपाई नहीं कर सकती, लेकिन अंतिम मुआवजा प्रक्रिया स्पष्टता और समापन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। एयरलाइन के अनुसार, सभी प्रस्ताव लागू कानूनी ढांचे के अनुरूप और व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर तैयार किए गए हैं। एयर इंडिया पहले ही प्रत्येक मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये की अंतरिम सहायता दे चुकी है। इसके अलावा टाटा समूह द्वारा स्थापित AI-171 मेमोरियल एंड वेलफेयर ट्रस्ट के माध्यम से प्रति परिवार 1 करोड रुपये की अनुग्रह राशि देने की प्रक्रिया जारी है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह भुगतान फुल एंड फाइनल आधार पर होगा, ताकि भविष्य में कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दावा न किया जा सके।