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पत्रिका टॉक शो में घरेलू-कामकाजी महिलाओं ने रखी बात केंद्रीय बजट की नीतियों में महिलाओं को मिले पर्याप्त महत्व

नरसिंहपुर में पत्रिका टॉक शो में महिलाओं ने कहा कि केंद्रीय बजट में ऐसे प्रावधान होने चाहिए, जो महिलाओं को बचत, सुरक्षा और स्वावलंबन का भरोसा दे सकें।

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पत्रिका द्वारा किए गए टॉक शो में महिलाओं ने कहा कि केंद्रीय बजट में ऐसे प्रावधान होने चाहिए, जो सीमित आय में भी महिलाओं को बचत, सुरक्षा और स्वावलंबन का भरोसा दे सकें।

गुरुवार को पत्रिका टॉक शो में महिलाओं की सहभागिता।

Union Budget नरसिंहपुर। आगामी 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट को लेकर महिलाओं की अपेक्षाएं इस बार स्पष्ट और व्यवहारिक रूप में सामने आ रही हैं। गुरुवार को नरसिंहपुर में विभिन्न संगठनों से जुड़ी एवं घरेलू व कामकाजी महिलाओं के साथ पत्रिका द्वारा किए गए टॉक शो में महिलाओं ने कहा कि केंद्रीय बजट में ऐसे प्रावधान होने चाहिए, जो सीमित आय में भी महिलाओं को बचत, सुरक्षा और स्वावलंबन का भरोसा दे सकें।
टॉक शो में वरिष्ठ समाजसेवी संध्या कोठारी, उर्मिला राय, अनुराधा कोठारी, सरला पांडे, ज्योति चौहान, सुमन शर्मा, कविता दुबे, भारती रघुवंशी, अनमिका पटेल, अदिति दुबे, गूंजा लखेरा, सुषमा धुर्वे, प्रीति चावला, योगिता, ताशी हीरानी, पूनम धुर्वे, सीमा नामदेव, कीर्ति साहू, मीना शर्मा, भावना साहू, सरिता जाट, श्रद्धा नेमा, कीर्ति प्रजापति और नमिता जनोरिया ने सहभागिता की। महिलाओं का कहना था कि घरेलू और कामकाजी महिलाएं परिवार की अर्थव्यवस्था को संभालने में अहम भूमिका निभाती हैं, इसलिए बजट नीतियों में उनकी जरूरतों को पर्याप्त महत्व मिलना चाहिए। महंगाई के इस दौर में घरेलू बजट संतुलित करना चुनौती बन जाता है, ऐसे में बजट से महिलाओं को सीधी राहत मिलने की अपेक्षा है।
चर्चा के दौरान महिलाओं ने सुझाव दिया कि बचत योजनाओं में कर छूट बढ़ाई जाए, महिलाओं के नाम निवेश को प्रोत्साहित किया जाए और छोटी बचत योजनाओं पर बेहतर ब्याज दर तय की जाए, ताकि सीमित आय में भी महिलाएं भविष्य के लिए सुरक्षित बचत कर सकें। कामकाजी महिलाओं के लिए आयकर में अतिरिक्त राहत देने की मांग भी सामने आई। स्वावलंबन को लेकर महिलाओं ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों, घरेलू उद्योग, सिलाई-कढ़ाई, खाद्य प्रसंस्करण जैसे कार्यों के लिए आसान ऋण, कम ब्याज दर और सब्सिडी की व्यवस्था बजट में होनी चाहिए। इससे महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन सकेंगी और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ेंगी।
कौशल विकास, स्वास्थ्य पर जोर
महिलाओं ने सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं, मातृत्व लाभ, पोषण योजनाओं को मजबूत करने, कामकाजी महिलाओं के लिए क्रेच सुविधा और सुरक्षित कार्यस्थल जैसे प्रावधानों को जरूरी बताया। साथ ही लड़कियों की शिक्षा और महिलाओं के कौशल विकास के लिए विशेष योजनाओं की भी मांग रखी गई। कामकाजी महिलाओं के लिए पेंशन, बीमा और सामाजिक सुरक्षा की सरल और सुलभ व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना कम हो सके। केंद्रीय बजट आम परिवारों और विशेष रूप से महिलाओं के जीवन को दिशा देने वाला होना चाहिए। यदि बजट में महिलाओं को केंद्र में रखकर ठोस और संवेदनशील प्रावधान किए जाते हैं, तो उसका सकारात्मक असर पूरे समाज पर दिखाई देगा।