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परिवहन की सुस्ती से बढ़ी धान खराब होने की आशंका

Slow transportation has increased the risk of paddy spoilage जिले में खरीफ उपार्जन के तहत समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान का समय पर परिवहन नहीं हो पाने से गंभीर स्थिति बनती जा रही है। बिगड़ते मौसम और परिवहन की मंथर गति के चलते खरीदी केंद्रों पर खुले में रखा हजारों क्विंटल धान जोखिम में […]

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Slow transportation

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Slow transportation has increased the risk of paddy spoilage

जिले में खरीफ उपार्जन के तहत समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान का समय पर परिवहन नहीं हो पाने से गंभीर स्थिति बनती जा रही है। बिगड़ते मौसम और परिवहन की मंथर गति के चलते खरीदी केंद्रों पर खुले में रखा हजारों क्विंटल धान जोखिम में है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक करीब 27 हजार क्विंटल से अधिक धान का परिवहन शेष है, जो खुले आसमान के नीचे रखा हुआ है।समय पर परिवहन नहीं होने के कारण खरीदी केंद्रों पर बाहर रखे धान के बारदाने धूल-धुसरित हो रहे हैं। वहीं खुले में रखी उपज तेज धूप और हवा के कारण लगातार सूख रही है, जिससे धान के वजन में कमी आ रही है। वजन घटने का असर तब सामने आ रहा है, जब खरीदी केंद्रों से धान का परिवहन होकर गोदामों तक पहुंचता है। बारदानों के वजन में कमी को लेकर परिवहनकर्ताओं और गोदाम कर्मचारियों के बीच आए दिन विवाद की स्थिति बन रही है।जिससे कार्य प्रभावित हो रहा है।
स्थिति को और चिंताजनक बना रहा है मौसम का मिजाज। बीते तीन-चार दिनों से जिले में बादलों की आवाजाही बनी हुई है और हल्की बारिश की आशंका भी जताई जा रही है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के बीच खुले में रखे धान के भीगने और खराब होने का खतरा बढ़ गया है। यदि बारिश होती है तो इससे शासन को आर्थिक नुकसान होने के साथ-साथ किसानों के हक की उपज भी प्रभावित हो सकती है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले भर में संचालित 45 उपार्जन केंद्रों पर खरीदी गई कुल 11 लाख 31 हजार 829 क्विंटल धान में से तीन फरवरी तक 11 लाख 15 हजार 438 क्विंटल धान का परिवहन कर सुरक्षित गोदामों में पहुंचाया जा चुका है। इसके बावजूद अभी भी 27 हजार 478 क्विंटल धान का परिवहन शेष है, जो चिंता का विषय बना हुआ है। केंद्र प्रभारियों का कहना है कि यदि परिवहन कार्य में तेजी नहीं लाई गई तो मौसम की मार से धान के नुकसान की आशंका और बढ़ जाएगी। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र अतिरिक्त परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि खुले में रखी उपज को जल्द से जल्द सुरक्षित गोदामों तक पहुंचाया जा सके।