
पत्रिका के साथ संवाद करते हुए अधिवक्ता।
upcoming Union Budget. नरसिंहपुर. आगामी केंद्रीय बजट को लेकर हर वर्ग उत्सुक है। पत्रिका ने अधिवक्ता और चिकित्सक वर्ग के मन को टटोला। दोनों ही पेशेवर वर्गों का मानना है कि बजट में यदि पेशागत सुविधाओं, कर प्रणाली और आधारभूत ढांचे को लेकर ठोस प्रावधान किए जाते हैं, तो इससे न केवल उनके कार्य परिवेश में सुधार होगा, बल्कि आम जनता को भी बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। अधिवक्ताओं की प्रमुख अपेक्षाएं हैं कि न्याय प्रणाली को मजबूत करने के लिए बजट में न्यायिक आधारभूत ढांचे पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। चैंबर, लाइब्रेरी और डिजिटल सुविधाओं का विस्तार जरूरी है। युवा अधिवक्ताओं के लिए स्वास्थ्य बीमा, पेंशन या सामाजिक सुरक्षा योजना लागू करने की अपेक्षा जताई जा रही है। ई-कोर्ट और डिजिटल फाइलिंग व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के लिए पर्याप्त बजटीय प्रावधान की जरूरत बताई जा रही है। अधिवक्ताओं का यह भी कहना है कि पेशागत खर्चों पर कर राहत दी जाए, ताकि छोटे और नवप्रवेशी अधिवक्ताओं को राहत मिल सके। संवाद में अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष मुकेश शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता उमेश शर्मा, सुदेश वैद्य, शरद शर्मा, संदीप गुप्ता, जलज खेमरिया, शैलेष पुरोहित, राजेश्वर वैष्णव, अरूण सिंह, रविंद्र, राहुल मेहरा आदि प्रमुख रहे।
चिकित्सकों की बजट से उम्मीदें
चिकित्सक वर्ग का फोकस स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और संसाधनों पर है। सरकारी अस्पतालों में आधुनिक उपकरण, दवाइयों और स्टाफ की उपलब्धता बढ़ाने के लिए बजट में अधिक आवंटन की मांग की जा रही है। निजी प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों का कहना है कि चिकित्सा उपकरणों और दवाइयों पर कर बोझ कम किया जाए, जिससे इलाज की लागत घट सके। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत चिकित्सकों के लिए विशेष प्रोत्साहन और सुविधाएं दी जाना चाहिए। स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के दायरे और भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।
वर्जन
सरकारी अस्पताल विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित उपस्वास्थ्य केंद्रों के ढांचे को मजबूत करने के लिए संसाधन विशेष तौर पर मानव संसाधन की उपलब्धता हो।
डॉ. मनीष मिश्रा, सीएमएचओ नरसिंहपुर
इलाज सामग्री और चिकित्सा उपकरणों पर लगने वाला जीएसटी कम होना चाहिए। जिससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा सकें। छोटे-बड़े सभी क्षेत्रो में स्वास्थ्य संसाधनों की पूर्ति जरूरत अनुसार हो सके।
डॉ. ऋचा मिश्रा, सीबीएमओ
जिले में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मेडीकल कॉलेज की स्थापना जरूरी है। डॉक्टर एवं नर्सिंग आफिसर के कौशल विकास पर ध्यान देने योजनाएं बनें।
डॉ. योगेश गोस्वामी, दंत रोग विशेषज्ञ
आयुष्मान भारत जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं को व्यवहारिक और व्यापक बनाना चाहिए। ताकि अस्पताल और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
डॉ. धीरज यादव, दंत रोग विशेषज्ञ
भारत का सार्वजनिक खर्च जीडीपी के 3 से 5 प्रतिशत तक बढऩा चाहिए। जिससे बुनियादी व विशेष स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में और बेहतर सुधार हो सके।
Updated on:
21 Jan 2026 01:53 pm
Published on:
21 Jan 2026 01:52 pm

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