
सीएम भजनलाल शर्मा और पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी
लाडनूं (नागौर): मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जैन धर्म दुनिया को जीवन जीने की कला सिखाता है। जीओ और जीने दो का सिद्धांत आज पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण आधार बन गया है। भौतिकवादी युग में जैन समाज के दर्शन समाज को दिशा दे रहे हैं। वे शुक्रवार को जैन विश्व भारती लाडनूं में भागचंद प्रवीण बरड़िया की ओर से निहालचंद प्रकाशचंद बरड़िया की स्मृति में नवनिर्मित सुधर्मा सभा के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने आचार्य महाश्रमण के लाडनूं में मंगल प्रवेश का उल्लेख करते हुए कहा कि आचार्य ने समाज को नई दिशा देने का कार्य किया है। उनके प्रवचन युवाओं को संस्कृति और जागरण का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि आचार्य महाश्रमण ने जैन धर्म की प्राचीन परम्पराओं को आधुनिकता से जोड़कर समाज को नई दिशा देने की मुहिम शुरू की है, जिसके सकारात्मक बदलाव समाज में दिखाई दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जैन विश्व भारती ने धर्म, शिक्षा और संस्कार को व्यावहारिक रूप देने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने बताया कि वे तीन वर्ष पहले यहां दो दिन रहे थे। उन दिनों में उन्होंने यहां के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विशेषताओं का राजस्थान गढ़ है। इसलिए महाश्रमण के मंगल प्रवेश से पूरे राजस्थान की माटी को लाभ मिलेगा।
समारोह की शुरुआत में आचार्य महाश्रमण ने सभी धर्मों को मंगल बताते हुए कहा कि अहिंसा, संयम और तप से व्यक्ति का मंगल और कल्याण होता है। उन्होंने योगक्षेम वर्ष का अर्थ बताते हुए कहा कि अज्ञात को प्राप्त करना और जो ज्ञात है, उसकी रक्षा करना ही योगक्षेम है।
इसके लिए एक वर्ष का समय निर्धारित किया गया है। 6 फरवरी 2026 को उनका प्रवेश हुआ है और 24 फरवरी 2027 को उनका यहां से प्रस्थान होगा। उन्होंने कहा कि इससे पहले 1989 में आचार्य तुलसी के समय यहां योगक्षेम वर्ष का आयोजन हुआ था।
पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने कहा कि आचरण धर्म का सबसे बड़ा लक्षण है और धर्म उसकी नींव है। सत्ता सभ्यता की नींव है। सभ्यता और संस्कृति भी समय के साथ बदलते हैं। आज़ादी के बाद सबसे बड़ा बदलाव शिक्षा में देखने को मिला है। शिक्षा और सत्ता ने धर्मनिरपेक्षता का नया वातावरण बना दिया।
शिक्षा और धर्मनिरपेक्षता ने संस्कृति और सत्ता की नई दीवार खड़ी कर दी। शिक्षा ने नया स्वरूप गढ़ दिया, जबकि सत्ता सनातन और संस्कृति के नाम से खड़ी है। शिक्षा धर्मनिरपेक्ष होने से शासन तंत्र भी उसी हिसाब से काम करने लगा है। आजकल जो नियम-कानून बन रहे हैं, वे नीचे तक नहीं जा रहे हैं। क्योंकि नीचे की आवश्यकताएं सत्ता तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सुधर्मा सभा प्रवचन पांडाल का लोकार्पण और शिलालेख का अनावरण किया। इस दौरान पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। विशिष्ट अतिथि के रूप में राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी, सुधर्मा सभा के निर्माता भागचंद बरड़िया और प्रवीण बरड़िया उपस्थित रहे।
Published on:
07 Feb 2026 07:45 am
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