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ठाकरे भाइयों में ‘मतभेद’… शिंदे को समर्थन देने से उद्धव नाखुश, राज की मनसे ने क्या कहा?

कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के चुनाव नतीजों के बाद सत्ता की चाबी हासिल करने के लिए महाराष्ट्र में एक अनोखा राजनीतिक समीकरण देखने को मिल रहा है। जहां चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोकने वाले एकनाथ शिंदे की शिवसेना और राज ठाकरे की मनसे अब हाथ मिला चुके हैं।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Jan 22, 2026

Uddhav Thackeray Raj Thackeray together

राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे (Photo: IANS/File)

महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों के बाद सत्ता गठन की हलचल तेज हो गई है। इसी बीच कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) में बड़ा राजनीतिक मोड़ सामने आया है, जहां एकनाथ शिंदे की शिवसेना को राज ठाकरे की पार्टी मनसे (MNS) के नगरसेवकों का समर्थन मिला है। जबकि 15 जनवरी को हुए केडीएमसी चुनावों में मनसे ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उबाठा) से गठबंधन किया तह और शिंदे गुट के खिलाफ उम्मीदवार उतारे थे। इस गठबंधन ने न केवल भाजपा की टेंशन बढ़ा दी है, बल्कि उद्धव गुट को भी तगड़ा झटका दिया है।

मनसे किंगमेकर की भूमिका में

कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में कुल 122 नगरसेवक हैं। इनमें शिंदे गुट के 53 और भाजपा के 50 नगरसेवक चुने गए हैं। चुनाव दोनों दलों ने गठबंधन में लड़ा था, लेकिन सीटों का अंतर बेहद कम होने के कारण भाजपा यहां सत्ता में बराबर हिस्सेदारी की मांग कर रही है। सूत्रों के अनुसार, शिंदे गुट भाजपा के लिए मेयर पद और अन्य अहम पद छोड़ने के मूड में नहीं है। इस बीच मनसे के 5 पार्षदों ने शिंदे सेना को समर्थन दे दिया है, जिससे शिंदे गुट बहुमत के करीब पहुंच गया है। बड़ी बात यह है कि उद्धव गुट के भी कुछ पार्षदों के शिंदे खेमे में जाने की चर्चा गर्म है।

ठाकरे भाइयों में ‘मनभेद’

शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने इस गठबंधन पर कड़ी नाराजगी जताई है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने दावा किया कि उनकी राज ठाकरे से बात हुई है और राज ठाकरे खुद इस फैसले से व्यथित और नाराज हैं। राउत ने कहा, "कल्याण-डोंबिवली का मामला राज ठाकरे ने गंभीरता से लिया है। मनसे प्रमुख ने मुझसे कहा कि यह उनकी पार्टी की आधिकारिक भूमिका नहीं है। कुछ लोग स्थानीय स्तर पर स्वार्थ के लिए ऐसे फैसले लेते हैं।"

संजय राउत ने कहा, "राज ठाकरे बहुत व्यथित हैं जिस तरह से स्थानीय लोगों ने फैसला लिया है। राज साहब का कहना है कि ये मेरी भूमिका नहीं है। ये मेरी पार्टी की भूमिका नहीं है… अगर स्थानीय लोगों ने पार्टी के खिलाफ जाकर निर्णय ली है तो इस पर कड़ा एक्शन होना चाहिए। जैसे अंबरनाथ में कांग्रेस के 12 पार्षद भाजपा के साथ चले गए तो उनको पार्टी से निकाल दिया गया। हमारी पार्टी में भी जो खिलाफ काम करता है उसे निकाल देते हैं।"

मनसे नेता बोले- राज ठाकरे को सब पता था

संजय राउत के दावों के विपरीत, कल्याण-डोंबिवली के मनसे के स्थानीय दिग्गज नेता राजू पाटील ने स्पष्ट किया कि उन्होंने राज ठाकरे को पूरी स्थिति की जानकारी दी थी। पाटील ने कहा, हमने राज ठाकरे को संख्याबल और स्थानीय हालातों के बारे में विस्तार से बताया था। राज ठाकरे ने ही हमें स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने का अधिकार दिया था। विपक्ष में बैठकर हम जनता का काम नहीं कर पाते, इसलिए विकास के लिए शिंदे सेना का साथ देने का फैसला लिया गया।

उद्धव ने जताई नाराजगी

इस घटनाक्रम से उद्धव ठाकरे काफी आहत बताए जा रहे हैं। केडीएमसी के नगरसेवकों से मुलाकात के दौरान उन्होंने मनसे के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि अगर सभी नगरसेवक साथ रहते, तो कल्याण-डोंबिवली में एक मजबूत विपक्ष खड़ा किया जा सकता था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल उनकी पार्टी विपक्ष में बैठेगी। उन्होंने नवनिर्वाचित नगरसेवकों को हौसला देते हुए आश्वासन दिया कि भले ही वे विपक्ष में बैठेंगे, लेकिन उन्हें सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए वह हर संभव प्रयास करेंगे।

मुंबई भी मनसे करेगी खेला?

इस घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जो कुछ कल्याण-डोंबिवली में हुआ, क्या वही तस्वीर मुंबई महानगरपालिका (BMC) में भी देखने को मिलेगी। इसी मुद्दे पर मनसे नेता बाला नांदगावकर का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं है कि KDMC जैसा घटनाक्रम मुंबई में भी होगा या नहीं। राजनीति में कुछ भी संभव है और स्थानीय स्तर पर फैसले लेने का अधिकार पार्टी ने नेताओं को दिया है।

बाला नांदगांवकर ने यह भी कहा कि देश और राज्य की राजनीति में पहले भी ऐसे उदाहरण सामने आ चुके हैं, जहां विरोधी दल स्थानीय समीकरणों के चलते साथ आए। उन्होंने चंद्रपुर में भाजपा-कांग्रेस और कोंकण में शिंदे गुट व ठाकरे गुट के एक साथ आने का हवाला दिया। साथ ही संकेत दिया कि यदि कहीं पार्टी लाइन से हटकर निर्णय लिया गया है, तो उस पर संगठनात्मक स्तर पर कार्रवाई का विचार किया जा सकता है।

कुल मिलाकर कल्याण-डोंबिवली में हुआ यह सियासी प्रयोग महाराष्ट्र की राजनीति के लिए अहम संकेत माना जा रहा है। इससे हाल ही में गठबंधन करने वाले ठाकरे भाइयों के बीच दरार आने की संभावना बन गई है। कुल मिलाकर, कल्याण-डोंबिवली में सामने आया यह सियासी प्रयोग महाराष्ट्र की राजनीति में एक अहम मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ सत्ता समीकरणों को बदल दिया है, बल्कि दो दशक बाद साथ आए ठाकरे भाइयों के गठबंधन में भी तनाव और दरार की स्थिति पैदा कर दी है।