
मृतक आलोक सिंह, उनकी पत्नी पूजा और आरोपी ओमकार शिंदे (Patrika Photo)
मुंबई के मलाड रेलवे स्टेशन पर लोकल ट्रेन में हुए मामूली विवाद ने एक होनहार शिक्षक की जान ले ली। शनिवार शाम भीड़ से भरी ट्रेन में हुए झगड़े के दौरान 33 वर्षीय कॉलेज लेक्चरर आलोक कुमार सिंह की धारदार चीज गोदकर हत्या कर दी गई। इस मामले में सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) ने 27 वर्षीय आरोपी ओमकार एकनाथ शिंदे को रविवार सुबह गिरफ्तार कर लिया।
मृतक आलोक कुमार सिंह के पिता अनिल कुमार सिंह केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की सुरक्षा टीम का हिस्सा हैं। घटना के वक्त वे ड्यूटी पर दिल्ली में थे। बेटे की मौत की सूचना मिलते ही वे रविवार सुबह मुंबई पहुंचे। उन्होंने कहा कि रक्षामंत्री ने इस मामले में सीधे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणनवीस से बात कर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
पुलिस के अनुसार, शनिवार शाम करीब 5.40 बजे बोरीवली जाने वाली धीमी लोकल ट्रेन जब मलाड स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर रुकी, तभी आलोक सिंह और ओमकार शिंदे के बीच उतरने को लेकर बहस हो गई। इसी दौरान गुस्से में आकर आरोपी ने आलोक के पेट के बाईं ओर नुकीली चीज (चिमटी) से वार किया और भीड़ का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया। गंभीर रूप से घायल आलोक को तुरंत कांदिवली पश्चिम स्थित शताब्दी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना के तुरंत बाद जीआरपी ने हत्या का मामला दर्ज कर पांच विशेष टीमें बनाई। मलाड स्टेशन और आसपास के इलाकों में लगे करीब 200 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। रेलवे के फेस रिकग्निशन सिस्टम की मदद से पता चला कि आरोपी नियमित रूप से मलाड से चर्नी रोड के बीच सफर करता था।
रविवार सुबह करीब 7.40 बजे मलाड स्टेशन के पास ऑटो रिक्शा स्टैंड के नजदीक उसे हिरासत में लिया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, गिरफ्तारी से पहले सभी तथ्यों की पुष्टि की गई। आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां उसे 29 जनवरी तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपी ओमकार शिंदे ने बताया कि वह ग्रांट रोड इलाके में नकली ज्वेलरी बेचने की छोटी दुकान चलाता है। उसने स्वीकार किया कि उसने काम में इस्तेमाल होने वाली चिमटी से आलोक पर वार किया। आरोपी का कहना है कि वह गुस्से में था और उसे अंदाजा नहीं था कि वार इतना गहरा होगा कि आलोक जान चली जाएगी। भागते समय उसने चिमटी फेंक दिया। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
एक अधिकारी ने बताया कि आरोपी ओमकार शिंदे आमतौर पर सुबह 7.18 बजे मालाड से लोकल ट्रेन पकड़ता था और काम खत्म होने के बाद शाम 4.16 बजे चर्नी रोड से लोकल ट्रेन से मलाड आता था। मालाड रेलवे स्टेशन के बाहर लगे निगरानी कैमरों की फुटेज से पता चला है कि वह शाम के समय अक्सर पैदल ही घर जाता था, जबकि सुबह स्टेशन तक पहुंचने के लिए ऑटो रिक्शा का इस्तेमाल करता था। रविवार सुबह वह जैसे ही मलाड स्टेशन के पास ऑटो रिक्शा से उतरा, वहां तैनात पुलिस टीम ने उसे दबोच लिया।
पुलिस के मुताबिक, शिंदे के खिलाफ पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। शिंदे अपने माता-पिता और एक भाई के साथ मलाड के कुरार गांव में रहता है। वह खेतवाड़ी में अपने पिता की धातु पॉलिशिंग यूनिट में काम करता है, साथ ही साथ खुद भी कुछ नकली आभूषण बनाने का काम करता है। उसके पिता को हार्ट की बीमारी है।
आलोक सिंह विलेपार्ले स्थित एनएम कॉलेज में पिछले दो साल से गणित और सांख्यिकी पढ़ा रहे थे। आलोक सिंह अपनी पत्नी पूजा सिंह के साथ मालाड पूर्व के कुरार गांव स्थित एक इमारत में किराए के फ्लैट में रह रहे थे। एनएम कॉलेज से पहले आलोक मालाड के एक कॉलेज और अंधेरी के एक इंटरनेशनल स्कूल में भी पढ़ा चुके थे। उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से गणित में बीएससी और एमएससी की डिग्री ली थी, बीएड किया था और शिक्षक पात्रता परीक्षा भी पास की थी। उनकी शादी दो साल पहले हुई थी और उनकी पत्नी पूजा फिलहाल बीएड कर रही हैं।
परिवार ने बताया कि शनिवार को आलोक की पत्नी पूजा का जन्मदिन था और आलोक उन्हें डिनर पर ले जाने वाले थे। इसलिए वह कॉलेज से जल्दी निकले थे और रोज से करीब एक घंटा पहले मलाड स्टेशन पहुंचे थे। आलोक के साथ उनके सहयोगी एस के त्रिवेदी भी मौजूद थे, जो घटना के बाद आरोपी का पीछा भी करते हैं।
घटना के बाद मृतक के परिजनों ने सवाल उठाया कि लोकल ट्रेन में कोई यात्री नुकीला हथियार कैसे लेकर सफर कर सकता है। परिजनों का कहना है कि घटना के बाद आलोक को काफी समय तक स्टेशन पर ही रखा गया था, अगर मलाड स्टेशन के करीब वाले अस्पताल में तुरंत ले जाया गया होता तो शायद जान बच जाती। हालांकि रेलवे पुलिस ने स्पष्ट कहा कि आलोक को ले जाने में देरी नहीं की गई थी, यहां तक की सारी औपचारिकताएं भी अस्पताल पहुंचाने बाद ही की गई। हालांकि अधिकारियों ने माना की एंबुलेंस के इंतजार और शाम में ट्रैफिक के चलते अस्पताल ले जाने में कुछ समय जरुर लगा।
रेलवे प्रशासन के मुताबिक, घटना के कुछ ही मिनटों में स्टेशन मास्टर और रेलवे पुलिस मौके पर पहुंच गए थे और घायल को एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया था, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस सनसनीखेज हत्या ने मुंबई की लोकल ट्रेनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Updated on:
26 Jan 2026 03:58 pm
Published on:
26 Jan 2026 03:44 pm
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