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बजट 2026 में 8 शहरों को बड़ा तोहफा, हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का होगा निर्माण

Budget 2026: केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने मुंबई, पुणे सहित आठ शहरों को जोड़ने वाले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का निर्माण कराने का ऐलान किया है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Feb 01, 2026

Nirmala Sitharaman High-Speed Rail corridors

केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने किया हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का ऐलान (Photo: IANS/File)

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज बजट 2026 पेश करते हुए देश के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को एक नई गति दी है। इस बजट में महाराष्ट्र के लिए बड़ा ऐलान किया गया है। वित्त मंत्री ने मुंबई और पुणे में हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का निर्माण करने की घोषणा की है। सरकार का उद्देश्य इन दो प्रमुख आर्थिक केंद्रों तक पहुंचने का समय कम करना और व्यापारिक गतिविधियों को गति देना है।

7 नए कॉरिडोर में मुंबई-पुणे सबसे अहम

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने देशभर में कुल सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने का ऐलान किया है। 'ग्रोथ कनेक्टर' के तौर पर बनने वाले इन कॉरिडोर्स की सूची में मुंबई-पुणे रूट शीर्ष पर है। अन्य मार्गों में पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। इन परियोजनाओं का लक्ष्य न केवल गति बढ़ाना है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देना भी है।

अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, "पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ यात्री परिवहन प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए देश में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। इन कॉरिडोरों को शहरों के बीच 'ग्रोथ कनेक्टर' के रूप में तैयार किया जाएगा। प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल मार्गों में मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी शामिल हैं।"

12.2 लाख करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर बजट

इस साल सरकार ने बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय आवंटित किया है। मुंबई-पुणे हाई-स्पीड रेल परियोजना इसी बड़े विजन का हिस्सा है। इस कॉरिडोर के बन जाने से सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा और यात्रियों को विश्व स्तरीय यात्रा का अनुभव मिलेगा।

क्या होगा फायदा?

मुंबई और पुणे के बीच का सफर जो वर्तमान में 3-4 घंटे लेता है, वह काफी कम हो जाएगा।

आईटी और औद्योगिक हब के रूप में इन दोनों शहरों के बीच लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

इलेक्ट्रिक हाई-स्पीड ट्रेनें कार्बन फुटप्रिंट कम करने में मदद करेंगी।

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