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शिंदे की शिवसेना के साथ ही जाना था तो… ठाकरे भाइयों के गठबंधन में आई खटास!

शिवसेना (उबाठा) नेता ने कहा कि शिंदे गुट का समर्थन करने से पहले मनसे को उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी से चर्चा करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि दोनों दलों ने साथ चुनाव लड़ा था और अगर अलग फैसला लेना था तो बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकाला जा सकता था।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Jan 26, 2026

Raj Thackeray and Uddhav Thackeray unite

राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे (Photo: IANS)

महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों के बाद सत्ता गठन की राजनीति तेज हो गई है। इसी कड़ी में कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) में चौंकाने वाला सियासी समीकरण चर्चा का केंद्र बन गया है। यहां महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के पांच नगरसेवकों के समर्थन से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना बहुमत के बेहद करीब पहुंच गई है। इस घटनाक्रम ने ठाकरे भाइयों के संभावित राजनीतिक तालमेल पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

हाल ही में हुए केडीएमसी चुनाव 2026 में राज ठाकरे की पार्टी मनसे ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उबाठा) के साथ चुनाव लड़ा था। लेकिन नतीजों के बाद पाला बदलते हुए एकनाथ शिंदे की शिवसेना को समर्थन देने का फैसला किया। इस कदम ने न केवल उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को हैरान कर दिया है, बल्कि महायुति के भीतर बीजेपी की रणनीतियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

मनसे बनी किंगमेकर

122 सदस्यीय केडीएमसी में बहुमत का आंकड़ा 62 है। शिंदे गुट के पास 53 और भाजपा के पास 50 पार्षद हैं। दोनों ने चुनाव साथ लड़ा था, लेकिन सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर अंदरूनी खींचतान जारी है। इसी बीच मनसे के पांच पार्षदों के समर्थन से शिंदे गुट की स्थिति मजबूत हो गई है। चर्चा यह भी है कि उद्धव गुट के चार पार्षद यदि पाला बदलते हैं तो शिंदे गुट सीधे बहुमत हासिल कर लेगा। फिलहाल उद्धव गुट के 11 में से केवल सात पार्षदों ने ही समूह के रूप में औपचारिक पंजीकरण कराया है।

गठबंधन उद्धव से, समर्थन शिंदे को?

हैरानी की बात यह है कि 15 जनवरी को हुए चुनावों में मनसे और उद्धव गुट ने मिलकर चुनाव लड़ा था। लेकिन जैसे ही नतीजों के बाद सत्ता की चाबी मनसे के हाथ में आई, स्थानीय नेताओं ने विकास का हवाला देकर शिंदे गुट का हाथ थाम लिया। युवा सेना (उद्धव ठाकरे गुट) सचिव वरुण सरदेसाई ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि मनसे को यह फैसला लेने से पहले चर्चा करनी चाहिए थी।

सरदेसाई ने कहा, ‘‘मनसे एक अलग पार्टी है। मुझे उन्हें यह बताने की जरूरत नहीं कि क्या करना चाहिए। मैं यह कल्याण-डोंबिवली के संदर्भ में कह रहा हूं। दोनों दलों ने साथ चुनाव लड़ा था और अगर अलग फैसला लेना था तो बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकाला जा सकता था। उनसे यह हमारी एकमात्र अपेक्षा थी।” 

KDMC का सीटों का गणित

कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) का नया 'पॉवर गेम' अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। केडीएमसी की 122 सीटों पर बहुमत के लिए 62 का आंकड़ा जरूरी है। वर्तमान समीकरणों पर नजर डालें तो उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 53 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, जबकि उनकी सहयोगी भाजपा 50 सीटों के साथ कड़ी टक्कर दे रही है। इस बीच, राज ठाकरे की मनसे के 5 पार्षदों ने शिंदे गुट को समर्थन देकर समीकरण बदल दिए हैं।

वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के पास 11 सीटें हैं, लेकिन इनमें से 4 पार्षदों के 'नॉट रिचेबल' होने से पार्टी के भीतर हड़कंप मचा हुआ है। यदि ये चार पार्षद भी शिंदे खेमे में शामिल होते हैं, तो सत्ता का पलड़ा पूरी तरह से शिंदे के पक्ष में झुक जाएगा।

मनसे के 5 पार्षदों के समर्थन के बाद शिंदे गुट 58 के आंकड़े पर पहुंच गया है। अब यदि उद्धव गुट के 4 'नॉट रिचेबल' पार्षद भी शिंदे के पाले में जाते हैं, तो शिंदे गुट बिना बीजेपी की शर्तों के अपना मेयर बनाने की स्थिति में आ जाएगा।

संजय राउत बनाम मनसे का दावा

शिवसेना (उबाठा) सांसद संजय राउत का दावा है कि राज ठाकरे खुद इस फैसले से नाराज हैं और यह स्थानीय नेताओं की मनमानी है। राउत का दावा है कि यह मनसे की आधिकारिक लाइन नहीं है और स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों ने स्वार्थ में फैसला लिया है। हालांकि, मनसे के स्थानीय नेता राजू पाटील ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि राज साहब को सब पता है, विपक्ष में बैठकर जनता का काम नहीं होता, इसलिए हमने सत्ता के साथ जाने का निर्णय लिया है।

ऐसे में उद्धव ठाकरे के लिए यह दोहरा झटका है। एक तरफ दो दशक बाद साथ आये चचेरे भाई राज ठाकरे की मनसे ने केडीएमसी में साथ छोड़ दिया, तो दूसरी तरफ अपने ही 11 में से 4 पार्षद लापता हैं। पार्टी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन कल्याण-डोंबिवली की सत्ता पर अब शिंदे की शिवसेना का दबदबा साफ नजर आ रहा है।

उद्धव ठाकरे भी नाराज

इस पूरे घटनाक्रम से उद्धव ठाकरे आहत बताए जा रहे हैं। उन्होंने KDMC के नगरसेवकों से मुलाकात में मनसे के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि अगर सभी साथ रहते तो एक मजबूत विपक्ष खड़ा किया जा सकता था। उन्होंने साफ किया कि फिलहाल उनकी पार्टी विपक्ष में बैठेगी, लेकिन नगरसेवकों को सम्मानजनक भूमिका दिलाने के प्रयास जारी रहेंगे।