
महाराष्ट्र की राजनीति में 'चाणक्य' कहे जाने वाले शरद पवार की पार्टी एनसीपी (एसपी) के पार्षदों ने अकोला नगर निगम में एक ऐसा दांव चला है, जिसने विपक्षी गठबंधन की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। अकोला नगर निगम में सत्ता के लिए चल रही रस्साकशी अब खत्म होती नजर आ रही है। शरद पवार गुट के पार्षदों ने अचानक अपनी भूमिका बदलते हुए भाजपा के नेतृत्व वाली 'शहर सुधार आघाडी' गठबंधन को समर्थन दे दिया है। इस चौंकाने वाले घटनाक्रम के बाद अब अकोला में भाजपा का मेयर बनना लगभग तय हो गया है।
80 सीटों वाली अकोला अकोला महानगरपालिका (नगर निगम) में सत्ता हासिल करने के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा 41 है, जिसे पाने के लिए भाजपा ने एक बेहद चौंकाने वाला समीकरण तैयार किया है। चुनावों में 38 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी भाजपा ने अन्य छोटे दलों और निर्दलीयों को साथ लेकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। इस बीच सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब शरद पवार की एनसीपी (NCP-SP) के 3 पार्षदों ने भाजपा खेमे में एंट्री की। इसके अलावा, भाजपा को अजित पवार गुट के एक, एकनाथ शिंदे की शिवसेना सेना के एक और एक निर्दलीय पार्षद का समर्थन भी हासिल हुआ है, जिससे उनकी कुल ताकत 44 पार्षदों तक पहुंच गई है।
भाजपा ने अमरावती विभागीय आयुक्त कार्यालय में 'शहर सुधार आघाडी' के नाम से अपने इस नए गुट का आधिकारिक पंजीकरण भी करा लिया है, जिससे अब अकोला नगर निगम में भाजपा का मेयर बनना लगभग तय है।
भाजपा को अकोला शहर की सत्ता से दूर रखने के लिए वंचित बहुजन आघाडी (VBA) के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने कांग्रेस, उद्धव सेना और शरद पवार की एनसीपी को एक साथ लाने की बड़ी कोशिश की थी। आंबेडकर के निवास पर 'डिनर डिप्लोमेसी' भी हुई, जहां कांग्रेस ने 21 पार्षद होते हुए भी बड़ा दिल दिखाते हुए किसी भी पद की मांग न करने का वादा किया था। हालांकि, यह गठबंधन पद बंटवारे के विवाद की भेंट चढ़ गया। शिवसेना (UBT), वंचित और एनसीपी (शरद गुट) के बीच मेयर और डिप्टी मेयर पद को लेकर सहमति नहीं बन पाई। इसी खींचतान का फायदा उठाते हुए शरद पवार के तीनों पार्षदों ने पाला बदल लिया और भाजपा के पाले में चले गए।
भाजपा के नए समीकरणों से 44 पार्षद जुट गए हैं, जिससे विपक्षी खेमे में भारी निराशा है। विधायक रणधीर सावरकर के नेतृत्व में भाजपा अब जीत के प्रति आश्वस्त है। आगामी 30 जनवरी को मेयर और अन्य पद के लिए चुनाव होना है। देखना दिलचस्प होगा कि क्या अगले पांच दिनों में अकोला की राजनीति कोई और नया मोड़ आता है, नहीं तो भाजपा का ‘कमल’ खिलना तय है।
Updated on:
25 Jan 2026 04:50 pm
Published on:
25 Jan 2026 04:41 pm
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