
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस को कहा अलविदा | Image - X/IANS
UP Politics Nasimuddin Siddiqui News: उत्तर प्रदेश में कांग्रेस संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की मुहिम शुरू होते ही पार्टी को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ और चर्चित नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।
उनके इस फैसले से कांग्रेस के भीतर हलचल मच गई है और पार्टी नेतृत्व तुरंत डैमेज कंट्रोल में जुट गया है। इस्तीफे की सूचना मिलते ही उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय स्वयं सिद्दीकी के आवास की ओर रवाना हुए, ताकि उन्हें मनाकर पार्टी में बनाए रखा जा सके।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का राजनीतिक सफर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बेहद प्रभावशाली माना जाता है। मायावती सरकार के दौरान वह सबसे ताकतवर मंत्रियों में शुमार रहे और बसपा के रणनीतिक स्तंभ के रूप में पहचाने गए। लंबे समय तक बहुजन समाज पार्टी में सक्रिय रहने के बाद उन्होंने 2018 में कांग्रेस का दामन थामा।
कांग्रेस में शामिल होने के बाद पार्टी ने उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रांतीय अध्यक्ष नियुक्त किया, जिससे यह संकेत मिला कि सिद्दीकी को मुस्लिम चेहरे और क्षेत्रीय रणनीति के अहम हिस्से के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।
अपने इस्तीफे के पीछे सिद्दीकी ने पार्टी के भीतर वैचारिक घुटन और जनता से जुड़े मुद्दों की लड़ाई को प्रभावी ढंग से न लड़ पाने की बात कही है। उनका कहना है कि जिस उद्देश्य और सोच के साथ उन्होंने कांग्रेस जॉइन की थी, वह पूरा नहीं हो पा रहा। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि संगठनात्मक ढांचे में निर्णय लेने की प्रक्रिया और जमीनी कार्यकर्ताओं की आवाज को पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा, जिससे उन्हें असहज महसूस हो रहा था।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी के इस्तीफे के साथ ही कांग्रेस को एक और बड़ा झटका तब लगा, जब उनके साथ करीब 72 अन्य दिग्गज नेताओं ने भी पार्टी छोड़ दी। इनमें लगभग दो दर्जन पूर्व विधायक शामिल बताए जा रहे हैं। इस सामूहिक इस्तीफे से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में कांग्रेस की संगठनात्मक मजबूती पर सवाल खड़े हो गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले चुनावी समीकरणों पर सीधा असर डाल सकता है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने सिद्दीकी को मनाने के लिए व्यक्तिगत पहल की है। उनका मानना है कि सिद्दीकी जैसे अनुभवी नेता का जाना पार्टी के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व सिद्दीकी की नाराजगी के कारणों को समझकर संगठनात्मक बदलाव और जिम्मेदारियों में पुनर्संतुलन पर विचार कर रहा है, ताकि पार्टी के भीतर असंतोष को कम किया जा सके।
सिद्दीकी के इस कदम से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय राजनीति में नई हलचल मच गई है। विपक्षी दल इस घटनाक्रम को कांग्रेस की आंतरिक कमजोरी के रूप में देख रहे हैं, जबकि समर्थकों का मानना है कि यह फैसला आने वाले समय में नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे सकता है। सियासी गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि सिद्दीकी का अगला कदम क्या होगा और वह किस राजनीतिक मंच से अपनी अगली पारी शुरू करेंगे।
Published on:
24 Jan 2026 05:57 pm
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