
फोटो सोर्स-IANS
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज का यह कथन कि “नेता वही जिसमें नीति हो और नीति उसी में होती है, जिसमें नैतिकता होती है” सभी के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि धर्म और अहंकार की लड़ाई महाकाव्यों का मूल विषय रही है और अंततः अहंकार का ही पतन होता है। उनके मुताबिक, अहंकारी व्यक्ति कभी सच्चा सनातनी नहीं हो सकता।
अखिलेश यादव ने कहा कि अब ‘पीडीए पाठशाला’ के सांकेतिक आंदोलन को वास्तविक जनआंदोलन में बदलने की जरूरत है, ताकि शोषित और वंचित समाज की आने वाली पीढ़ियां शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ सकें। उन्होंने भाजपा पर संतों के अपमान का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे यह साबित होता है कि भाजपा स्वार्थ की राजनीति करती है। जो लोग भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उन्हें झूठे आरोपों के जरिए डराने और दबाने की कोशिश की जाती है।
शिक्षा के मुद्दे पर हमला बोलते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में विलय के नाम पर 27 हजार सरकारी स्कूलों को बंद करने की साजिश रची गई और केंद्र ने राज्यसभा में स्वीकार किया है कि पिछले पांच वर्षों में 18,727 सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। उन्होंने इसे देश के भविष्य के खिलाफ बड़ा षड्यंत्र बताया।
अखिलेश यादव ने कहा कि अगला चुनाव ऐतिहासिक होगा, जिसमें शिक्षा प्रमुख मुद्दा बनेगा। उनका दावा है कि इस बार महिलाएं भाजपा को सत्ता से बाहर करने में अहम भूमिका निभाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को समझ आ चुका है कि यदि सरकारी स्कूल बंद हुए तो निजी स्कूलों की मनमानी बढ़ेगी।
Published on:
25 Feb 2026 06:40 am
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