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लखनऊ, May 31, 2026

टीईटी से राहत की उम्मीद टूटी, अब 1.86 लाख शिक्षकों के सामने नई चुनौती

UP Teachers TET: सुप्रीम कोर्ट से टीईटी मामले में राहत न मिलने के बाद उत्तर प्रदेश के 1.86 लाख शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है। जुलाई में प्रस्तावित टीईटी और सरकारी ड्यूटी के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती बन गया है। शिक्षक संगठन जनगणना और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों से अस्थायी राहत की मांग कर रहे हैं।

TET के विरोध में TFI प्रदर्शन करते शिक्षकों की फाइल फोटो सोर्स प्राथमिक शिक्षक संघ X account

TET के विरोध में TFI प्रदर्शन करते शिक्षकों की फाइल फोटो सोर्स प्राथमिक शिक्षक संघ X account

सुप्रीम कोर्ट द्वारा टीईटी की अनिवार्यता बरकरार रखने और 31 अगस्त 2028 तक इसे पास करने की समय सीमा तय किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश के करीब 1.86 लाख शिक्षक नई चिंता में हैं। जुलाई में प्रस्तावित टीईटी और सितंबर में सीटेट परीक्षा के बीच बड़ी संख्या में शिक्षक जनगणना, बीएलओ और अन्य सरकारी कार्यों में लगे हुए हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल रहा है। इसलिए सरकार को राहत देने पर विचार करना चाहिए।

उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत की उम्मीद थी। लेकिन हालिया फैसले के बाद उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं। अदालत ने पहले दिए गए अपने आदेश को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया है कि सेवा में बने रहने और पदोन्नति पाने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक रहेगा। साथ ही प्रभावित शिक्षकों को परीक्षा पास करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया गया है।

जनगणना, बीएलओ सहित अन्य प्रशासनिक काम,टीईटी परीक्षा की तैयारी में बन रहा बाधा

इस फैसले का असर प्रदेश के करीब 1.86 लाख शिक्षकों पर पड़ रहा है। इनमें से कई शिक्षकों ने जुलाई में होने वाली टीईटी परीक्षा के लिए आवेदन भी कर दिया है। शिक्षकों का कहना है कि एक तरफ उन्हें परीक्षा की तैयारी करनी है। वहीं दूसरी तरफ जनगणना, बीएलओ और अन्य प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ रही हैं। ऐसे में उनके सामने समय प्रबंधन की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।

परीक्षा की तैयारी कर रहे शिक्षकों को जनगणना जैसी जिम्मेदारी से मुक्त किया जाए

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के नेताओं का कहना है कि शिक्षकों को लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है। उनका तर्क है कि जब शिक्षकों को विभिन्न सरकारी अभियानों में व्यस्त रखा जाएगा। तो वे परीक्षा की तैयारी के लिए पर्याप्त समय कैसे निकाल पाएंगे। संगठन ने मांग की है कि परीक्षा की तैयारी कर रहे शिक्षकों को जनगणना जैसी जिम्मेदारियों से अस्थायी राहत दी जाए।

शिक्षक संगठनों की सरकार से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने की मांग

वहीं, विभिन्न शिक्षक संगठनों ने सरकार से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे। शिक्षकों को विशेष राहत देने के लिए सरकार को कानूनी विकल्पों पर विचार करना चाहिए। कुछ संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रभावित शिक्षकों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। तो वे शांतिपूर्ण आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।

अब सभी की निगाहें, आगामी नीति और संभावित निर्णयों पर टिकी

अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने भी इस मामले में जल्द आंदोलन की रूपरेखा घोषित करने की बात कही है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि शिक्षकों की समस्याओं का समाधान निकाला जाना चाहिए। वहीं, कई शिक्षक नेताओं ने यह भी कहा है कि वर्षों से कार्यरत शिक्षकों पर अचानक टीईटी की अनिवार्यता लागू करना उचित नहीं माना जा सकता। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार की आगामी नीति और संभावित निर्णयों पर टिकी हुई हैं।

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