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लखनऊ, May 30, 2026

तय समय से पहले विधानसभा चुनाव होने की सुगबुगाहट, सपा ने अंदरखाने फाइनल कर दिए आधे टिकट, मैदान में ‘धुरंधर’

UP Assembly Elections : यूपी में समय से पहले विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट तेज! समाजवादी पार्टी ने अंदरखाने फाइनल किए आधे से ज्यादा टिकट। जानिए क्या है अखिलेश यादव की नई रणनीति।

Akhilesh

यूपी विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट तेज, तय समय से पहले हो सकते हैं चुनाव, PC- ANI

लखनऊ(UP Assembly Elections) : यूपी में पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद होंगे। ऐसे में सत्ता के गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है कि उत्तरप्रदेश में तय समय से पहले विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। जानकारों की मानें तो मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने अपने धुरंधरों को मैदान में उतारना शुरू कर दिया है। सूत्र तो यह भी कह रहे हैं कि सपा ने आधे से ज्यादा विधानसभा के टिकट फाइनल कर दिए हैं और जोर शोर से चुनावी तैयारियों में जुट गई।

उत्तर प्रदेश विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 22 मई 2027 तक है, लेकिन सत्ताधारी दल समय से पहले ही नवंबर-दिसंबर में चुनाव कराने की रणनीति पर काम कर रहा है। इस बीच सपा सूत्रों का दावा है कि पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए लगभग आधी सीटों पर अपने प्रत्याशियों को आंतरिक रूप से हरी झंडी दे दी है।

अभी सपा ने नहीं जारी की सूची

इन चयनित उम्मीदवारों को गुपचुप तरीके से अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर पूरे दमखम के साथ जनता से जुड़ने, संगठन को मजबूत करने और बूथ स्तर पर पकड़ बनाने के साफ निर्देश दे दिए गए हैं। हालांकि, रणनीतिक कारणों से सपा अभी इन नामों की आधिकारिक सूची जारी नहीं कर रही है। पार्टी नेतृत्व का स्पष्ट संदेश है कि टिकटों की औपचारिक घोषणा चुनाव आयोग के कार्यक्रम की घोषणा के बाद ही की जाएगी, लेकिन अंदरूनी तैयारियां पूरी तरह से मुकम्मल हैं।

2022 के चुनाव से सबक ले रही सपा

2022 के चुनावी सबक को ध्यान में रखते हुए यह रणनीति बनाई गई है। जिन सीटों पर 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा या उसके गठबंधन ने बेहद कम अंतर से हार का सामना किया था अथवा जहां मौजूदा विधायकों की पकड़ कमजोर मानी जा रही है, वहां उम्मीदवारों के नाम लगभग फाइनल कर दिए गए हैं।

संगठनात्मक ताकत मजबूत कर रही पार्टी

इस मास्टरस्ट्रोक का मकसद साफ है, समय से पहले उम्मीदवार तय करने से उन्हें पर्याप्त समय मिल जाएगा। वे क्षेत्र में लंबे समय तक प्रचार-प्रसार कर सकेंगे, जातीय समीकरण साध सकेंगे, स्थानीय मुद्दों को उठा सकेंगे और बूथ स्तर तक अपनी संगठनात्मक ताकत को मजबूत कर सकेंगे। सपा इसे 2022 की हार से उबरने और 2027 से पहले ही चुनावी मैदान में दबदबा बनाने का बड़ा मौका मान रही है।

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