
भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों में संपत्ति पंजीकरण के लिए PAN अनिवार्य,वित्तीय अपराध और सुरक्षा चुनौतियों पर सख्त कदम (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
PAN Now Mandatory for Property Registration in india-Nepal Border: भारत-नेपाल सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में अचल संपत्तियों के पंजीकरण को लेकर सरकार ने एक महत्वपूर्ण और सख्त निर्णय लिया है। अब इन सीमावर्ती जिलों में संपत्ति के क्रय-विक्रय अथवा अन्य पंजीकरण संबंधी कार्यों में पैन (Permanent Account Number) की अनिवार्य प्रविष्टि और सत्यापन किया जाएगा। यह कदम वित्तीय अपराधों पर रोक लगाने, संदिग्ध लेनदेन की निगरानी बढ़ाने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया अहम प्रशासनिक निर्णय माना जा रहा है। इस संबंध में महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने आदेश जारी करते हुए विभागीय स्तर पर तत्काल प्रभाव से व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डिजिटल रूप से सत्यापित बनाया जा रहा है।
निबंधन विभाग द्वारा संचालित ऑनलाइन लेखपत्र पंजीकरण सॉफ्टवेयर में अब ऐसा तकनीकी प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके माध्यम से पंजीकरण कराने वाले सभी पक्षकारों के PAN नंबर की प्रविष्टि अनिवार्य होगी। केवल प्रविष्टि ही नहीं, बल्कि उसका डिजिटल सत्यापन भी किया जाएगा। अर्थात, बिना वैध PAN विवरण के अब पंजीकरण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी। इससे फर्जी पहचान, बोगस दस्तावेज या संदिग्ध लेन-देन के मामलों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
भारत–नेपाल सीमा खुली सीमा मानी जाती है, जहां आवाजाही अपेक्षाकृत आसान होती है। इस कारण सीमा से सटे क्षेत्रों में कभी-कभी संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों, हवाला लेनदेन, बेनामी संपत्ति खरीद और अवैध धन निवेश जैसे मामलों की आशंका बनी रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि संपत्ति लेनदेन अक्सर बड़ी धनराशि से जुड़े होते हैं। यदि इन लेन-देन में पारदर्शिता न हो तो यह वित्तीय अपराधों के लिए माध्यम बन सकते हैं। PAN को अनिवार्य करने से:
जारी निर्देशों के अनुसार संपत्ति पंजीकरण में शामिल सभी पक्षकारों,चाहे वे खरीदार हों, विक्रेता हों, दानदाता, प्राप्तकर्ता या अन्य संबंधित व्यक्ति को अपना PAN विवरण देना अनिवार्य होगा। यदि किसी पक्षकार के पास PAN उपलब्ध नहीं है, तो पहले उसे आयकर विभाग से PAN बनवाना होगा, तभी पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।
सरकार पहले ही पंजीकरण व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में कई कदम उठा चुकी है। अब PAN आधारित सत्यापन से यह व्यवस्था और मजबूत होगी। यह प्रणाली केवल औपचारिकता नहीं होगी, बल्कि तकनीकी रूप से PAN का डेटाबेस से मिलान कर सत्यापन किया जाएगा। इससे गलत या फर्जी नंबर दर्ज कर प्रक्रिया पूरी करने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।
इस फैसले से दोहरे स्तर पर लाभ की उम्मीद की जा रही है। संपत्ति लेनदेन के वास्तविक मूल्य का रिकॉर्ड बनेगा, जिससे कर चोरी और अवैध धन निवेश पर अंकुश लगेगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में संपत्ति खरीद के माध्यम से किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा। इससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आवश्यक सूचनाएं समय पर उपलब्ध हो सकेंगी।
सामान्य नागरिकों के लिए यह व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने वाली है। हालांकि उन्हें पंजीकरण के समय PAN दस्तावेज साथ रखना होगा। इससे प्रक्रिया थोड़ी औपचारिक अवश्य होगी, लेकिन दीर्घकाल में यह सुरक्षित और विश्वसनीय लेन-देन सुनिश्चित करेगी।
महानिरीक्षक निबंधन द्वारा जारी आदेश से यह स्पष्ट संकेत गया है कि सरकार संपत्ति पंजीकरण को केवल राजस्व प्रक्रिया नहीं, बल्कि वित्तीय सुरक्षा और राष्ट्रीय हित से जुड़ा विषय मान रही है। सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतते हुए इस व्यवस्था को लागू किया जाना प्रशासन की रणनीतिक सोच को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को और अधिक आधार-आधारित सत्यापन, डिजिटल रिकॉर्डिंग और केंद्रीय डाटाबेस से जोड़ने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। PAN अनिवार्यता उसी दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
Published on:
06 Feb 2026 11:21 am
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