8 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मिशन-2027 की शुरुआत: मायावती ने फूंका चुनावी बिगुल, ब्राह्मण समाज के सहारे सत्ता में लौटने का संदेश

Mayawati Mission 2027: बसपा सुप्रीमो मायावती ने विधानसभा चुनाव-2027 के लिए चुनावी बिगुल फूंकते हुए ब्राह्मण समाज को साथ लाने की रणनीति का संकेत दिया है।

3 min read
Google source verification

लखनऊ

image

Mohd Danish

Feb 07, 2026

mayawati mission 2027 bsp brahmin strategy

मायावती ने फूंका चुनावी बिगुल | Image - X/@Mayawati

BSP Brahmin Strategy: बसपा सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने विधानसभा चुनाव-2027 को लेकर अपना चुनावी बिगुल फूंक दिया है। पार्टी कार्यालय में उत्तर प्रदेश स्टेट यूनिट, मंडल, जिला और विधानसभा स्तर के पदाधिकारियों की बैठक से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने मौजूदा राजनीतिक हालात पर खुलकर अपनी बात रखी। मायावती ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों से समाज के अधिकांश वर्ग बेहद निराश और त्रस्त हैं, जबकि कुछ खास लोगों के स्वार्थ की ही पूर्ति की जा रही है।

ब्राह्मण समाज की नाराज़गी को बताया अहम राजनीतिक संकेत

मायावती ने कहा कि वर्तमान समय में ब्राह्मण समाज अपनी उपेक्षा, असुरक्षा और अपमान को लेकर खुलकर मुखर हो रहा है और इसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा इस बढ़ती नाराज़गी को लेकर असहज और चिंतित है। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि बसपा ने हमेशा ब्राह्मण समाज को पूरा सम्मान, सुरक्षा और न्याय दिया है, जो किसी अन्य पार्टी या सरकार ने कभी नहीं दिया।

2007 मॉडल को दोहराने का लक्ष्य

मायावती ने कहा कि बसपा पूरी तरह विपक्षी दलों के हथकंडों और साजिशों से वाकिफ है और पार्टी उनका डटकर मुकाबला कर रही है। इसी रणनीति के तहत संगठन को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर फेरबदल किए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मिशन-2027 को मिशन-2007 की तर्ज पर पूरा किया जाएगा और प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाकर कानून का राज स्थापित किया जाएगा।

यूसीसी को बताया सामाजिक समरसता के बजाय तनाव का कारण

भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए मायावती ने कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के खिलाफ आरक्षण-विरोधी नीतियों के चलते इन वर्गों के लोगों को सरकारी नौकरी और प्रमोशन में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि गलत नीतियों के कारण यूनिफॉर्म सिविल कोड सामाजिक समरसता की जगह सामाजिक तनाव का नया कारण बन गया है।

जाति-धर्म की राजनीति से बढ़ रही सामाजिक नफरत

मायावती ने कहा कि केंद्र और राज्यों की अधिकांश सरकारें जनहित के मूल मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय जाति और धर्म की आड़ में अपनी राजनीति चमकाने में लगी हैं। इससे समाज में नफरत और विभाजन की भावना पैदा हो रही है, जो देश और जनहित दोनों के लिए नुकसानदायक है।

कोई भी योग्य नागरिक वोटर बनने से न छूटे

एसआईआर को लेकर मायावती ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में कोई भी योग्य व्यक्ति वोटर बनने से वंचित न रहे। गरीब, मजदूर, महिलाएं और अशिक्षित लोग अगर जानकारी के अभाव में पीछे रह जाते हैं, तो अधिकारियों को स्वयं संपर्क कर उनके नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने चाहिए।

संसद में हंगामे पर जताई गहरी नाराज़गी

मायावती ने कहा कि संसद का मौजूदा बजट सत्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और राजनीतिक ड्रामे की भेंट चढ़ गया है। उन्होंने कहा कि सत्ता और विपक्ष देश और जनहित के मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय एक-दूसरे को नीचा दिखाने में लगे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। पक्ष-विपक्ष को भारतीय संविधान और संसद की गरिमा का सम्मान करना चाहिए।

टैरिफ जैसे अहम मुद्दों पर संसद में होनी चाहिए थी चर्चा

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि टैरिफ समेत कई अहम राष्ट्रीय और जनहित के मुद्दों पर संसद में स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए थी, लेकिन आपसी राजनीतिक लड़ाई के कारण ये मुद्दे हाशिए पर चले गए। उन्होंने कहा कि देश की जनता सब कुछ देख रही है और सत्ता व विपक्ष को ऐसे आचरण से बचना चाहिए।

मंडल जोन प्रभारियों की नियुक्ति से चुनावी तैयारी तेज

बसपा ने विधानसभा चुनाव की तैयारी को तेज करते हुए मंडल जोन प्रभारियों की नियुक्ति की है। मौजीलाल गौतम और विनय कश्यप को लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली की जिम्मेदारी सौंपी गई है। डॉ. सुशील कुमार मुन्ना और राकेश गौतम को सीतापुर, हरदोई और लखीमपुर खीरी का प्रभारी बनाया गया है।

पश्चिम यूपी और लखनऊ सीटों पर विशेष फोकस

मुनकाद अली को मेरठ, गिरीश चंद्र को मुरादाबाद और सूरज सिंह जाटव को अलीगढ़ मंडल की जिम्मेदारी दी गई है। यूपी बसपा स्टेट अध्यक्ष विश्वनाथ पाल को अयोध्या और लखनऊ मंडल का भी प्रमुख कार्य सौंपा गया है। इसके अलावा लखनऊ की सभी 9 विधानसभा सीटों के लिए अलग-अलग प्रभारी नियुक्त कर संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की रणनीति बनाई गई है।