
साढ़े चार घंटे की जटिल न्यूरोसर्जरी, 40 दिन बाद हालत में बड़ा सुधार; रहस्यमयी गोलीकांड की जांच में जुटी पुलिस (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
KGMU Doctors Perform High-Risk Brain Surgery: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के डॉक्टरों ने असंभव प्रतीत हो रहे एक जटिल ऑपरेशन को सफल बनाकर तीन वर्षीय मासूम बच्ची लक्ष्मी को नया जीवन दिया है। खेलते समय उसके सिर में धंसी गोली लगातार अंदर अपनी स्थिति बदल रही थी, जिससे सर्जरी अत्यंत जोखिम भरी बन गई थी। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने साढ़े चार घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद गोली को सुरक्षित निकाल लिया। करीब 40 दिन बाद अब बच्ची की हालत में उल्लेखनीय सुधार है और अगले दो दिनों में उसे अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है।
यह घटना 17 दिसंबर की शाम की है। बस्तौली गांव निवासी रमेश की तीन वर्षीय बेटी लक्ष्मी घर की छत पर बने टीन शेड के नीचे अपने दो भाइयों,सौभाग्य (8) और हिमांश (7) के साथ खेल रही थी। अचानक तेज आवाज हुई और लक्ष्मी के सिर से खून बहने लगा। परिजन घबरा गए और उसे तुरंत पास के मेघना अस्पताल ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के तहत टांके लगा दिए गए।
लेकिन रात में बच्ची की हालत बिगड़ने लगी। उसे बेहोशी आने लगी और लगातार कमजोरी बढ़ती गई। इसके बाद परिजन उसे डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले गए। जांच में डॉक्टरों ने चौंकाने वाली जानकारी दी,लक्ष्मी के सिर में गोली फंसी हुई थी। बेड उपलब्ध न होने पर उसे तुरंत केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया।
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में जांच के दौरान सिटी स्कैन रिपोर्ट ने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया। गोली सिर के अंदर स्थिर नहीं थी, बल्कि ‘मूविंग पोजीशन’ में थी, यानी उसकी लोकेशन लगातार बदल रही थी। यह स्थिति न्यूरोसर्जरी के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है, क्योंकि जरा सी चूक से मस्तिष्क के महत्वपूर्ण हिस्से को स्थायी क्षति पहुंच सकती थी। न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. अंकुर बजाज के अनुसार, “बच्ची को बेहद गंभीर हालत में लाया गया था। अधिक रक्तस्राव और बेहोशी की स्थिति थी। सबसे बड़ी चुनौती थी सिर के भीतर घूम रही गोली की सटीक लोकेशन तय करना।”
सर्जरी से पहले डॉक्टरों ने एक विशेष तकनीक अपनाई। बच्ची के सिर में एक साथ 9 सर्जिकल नीडल डालकर गोली की सटीक स्थिति चिन्हित की गई। यह प्रक्रिया अत्यंत सावधानी से की गई, ताकि मस्तिष्क के संवेदनशील हिस्सों को नुकसान न पहुंचे। इसके बाद विशेषज्ञों की टीम ने ऑपरेशन शुरू किया। टीम में न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. बी.के. ओझा, डॉ. अंकुर बजाज समेत कुल पांच न्यूरोसर्जन शामिल थे। बाल रोग विशेषज्ञ और एनेस्थीसिया के वरिष्ठ डॉक्टरों को भी ऑपरेशन में शामिल किया गया।
करीब चार घंटे तीस मिनट तक चली जटिल सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने आखिरकार गोली को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया। ऑपरेशन के बाद लक्ष्मी को एक सप्ताह तक आईसीयू में रखा गया। धीरे-धीरे उसकी चेतना लौटी और शरीर की प्रतिक्रियाएं सामान्य होने लगीं। डॉक्टरों के अनुसार, यह सर्जरी इसलिए भी कठिन थी क्योंकि गोली की बदलती स्थिति के कारण हर मिनट रणनीति बदलनी पड़ रही थी।
लक्ष्मी का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। इलाज का खर्च उठाना उनके लिए असंभव था। ऐसे में अस्पताल प्रशासन और सामाजिक संगठनों की मदद से इलाज संभव हो सका। डॉ. बजाज ने बताया कि पूरी जटिल सर्जरी और इलाज का खर्च 40 हजार रुपये से भी कम आया, जो इस स्तर की न्यूरोसर्जरी के लिए बेहद कम है। सर्जरी के लगभग 40 दिन बाद अब लक्ष्मी की हालत में काफी सुधार है। वह धीरे-धीरे सामान्य गतिविधियों की ओर लौट रही है। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर इलाज न मिलता तो उसकी जान बचाना मुश्किल हो सकता था।
इस घटना ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है,आखिर गोली आई कहां से? सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर जांच की। छत के टिन शेड पर गोली के निशान मिले। आसपास के घरों में पूछताछ की गई, लेकिन किसी के पास लाइसेंसी हथियार नहीं मिला। पुलिस के लिए यह मामला अब भी पहेली बना हुआ है। आशंका है कि कहीं दूर से चली गोली भटक कर यहां आ गिरी हो। मामले की जांच जारी है।
यह घटना केजीएमयू के डॉक्टरों की विशेषज्ञता, धैर्य और टीमवर्क की मिसाल बन गई है। एक तरफ जहां एक मासूम की जिंदगी खतरे में थी, वहीं दूसरी ओर मेडिकल टीम ने असाधारण कौशल दिखाते हुए उसे नया जीवन दिया। यह कहानी दर्द, रहस्य और चिकित्सा विज्ञान की जीत की कहानी है, जहां एक मासूम की सांसें डॉक्टरों की सूझबूझ से फिर से चल पड़ीं।
Published on:
30 Jan 2026 08:39 am

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